OM
ॐ (ओम)
ॐ (ओम) भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे पवित्र और प्राचीन प्रतीक है। इसे ब्रह्मांड की मूल ध्वनि माना जाता है। वेद, उपनिषद, गीता और अनेक शास्त्रों में ॐ का विशेष महत्व बताया गया है। यह केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि, चेतना और परम सत्य का प्रतीक है।
ॐ तीन ध्वनियों से मिलकर बना है—अ, उ, और म। ‘अ’ सृष्टि की उत्पत्ति, ‘उ’ पालन और ‘म’ संहार का प्रतीक माना जाता है। इन तीनों के बाद आने वाला मौन ब्रह्म की अवस्था को दर्शाता है, जो शांति और पूर्णता का संकेत है। इस प्रकार ॐ जीवन और ब्रह्मांड के चक्र को व्यक्त करता है।
हिंदू धर्म में पूजा, यज्ञ, मंत्रोच्चार और ध्यान की शुरुआत ॐ से की जाती है। गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और अनेक वैदिक मंत्रों में ॐ का प्रयोग अनिवार्य है। योग और ध्यान में ॐ का उच्चारण मन को एकाग्र करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी माना जाता है कि ॐ का जप शरीर और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
ॐ का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। बौद्ध और जैन धर्म में भी इसे आद्य ध्वनि के रूप में स्वीकार किया गया है। यह धार्मिक सीमाओं से परे जाकर आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन गया है। आज विश्वभर में ध्यान, योग और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में ॐ का प्रयोग किया जाता है।
भारतीय दर्शन में ॐ को ईश्वर का प्रतीकात्मक रूप माना गया है। यह हमें आत्मज्ञान, शांति और सत्य की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक है। ॐ का नियमित स्मरण व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति लाता है।
इस प्रकार ॐ केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि जीवन, ब्रह्मांड और परम सत्य की गहन अभिव्यक्ति है, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है।
Comments
Post a Comment