TAMOLI

 तमोली / तंबोली जाति – परिचय 

तमोली या तंबोली भारत में एक जातीय समुदाय का नाम है जो पारंपरिक रूप से पान (तम्बूला/बेटल लीफ) की पैकिंग, बिक्री और उससे जुड़ा व्यापार करता रहा है। “तंबोली” शब्द “तंबूला” (पान का पत्ता) से आया है, जिसका अर्थ है वे लोग जो पान के पत्तों को पैक कर बेचते हैं या पान व्यापार में जुड़े होते हैं। यह समुदाय मुख्यतः उत्तर भारत, मध्य भारत, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में पाया जाता है। 

परंपरागत रूप से तमोली समाज पान के पत्तों, सुपारी और उससे जुड़े उत्पादों को तैयार और बेचने में माहिर रहा है। पुराने समय में दिन-प्रतिदिन का पान का व्यापार इनका मुख्य व्यवसाय रहा, लेकिन आधुनिक समय में यह समुदाय अनेक अन्य व्यवसायों जैसे किराना, हार्डवेयर, कपड़ों की दुकान या सरकारी तथा निजी रोजगार में भी सक्रिय है। कई तमोली आज शिक्षा प्राप्त कर सरकारी नौकरियों, व्यवसाय और स्थानीय राजनीति में भी भाग ले रहे हैं। 

तमोली जाति सामाजिक रूप से आम हिन्दू परंपराओं का पालन करती है और अपने सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक आयोजन इसी के अनुसार मनाती है। विवाह आम तौर पर समुदाय के भीतर ही होता है और सामाजिक परंपराओं का ध्यान रखा जाता है। 

भारत के कई राज्यों में तमोली / तंबोली जाति को पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे उन्हें शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में आरक्षण और सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। राजस्थान जैसे कुछ राज्यों की ओबीसी सूचियों में “तमोली (तंबोली)” नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है। 


कुल मिलाकर, तमोली/तंबोली समाज एक व्यवसायिक तथा आर्थिक रूप से परिवर्तनशील समुदाय है जिसने पारंपरिक पान व्यापार के अलावा आधुनिक रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाई है। यह भारत की सामाजिक विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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