UNTOUCHABILITY IN USA
अमेरिका में अस्पृश्यता (Untouchability in USA)
अस्पृश्यता या Untouchability शब्द मुख्य रूप से भारत के जाति-आधारित सामाजिक भेदभाव से जुड़ा है। अमेरिका में पारंपरिक भारतीय जैसी जाति व्यवस्था नहीं है, लेकिन भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासी समुदायों में इसकी कुछ छाया दिखाई देती है। अमेरिका में यह मुद्दा मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई प्रवासियों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक भेदभाव के रूप में सामने आता है।
अमेरिका में Untouchability का अनुभव सबसे अधिक भारतीय दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को होता है। कुछ संगठनों और अनुसंधानों के अनुसार, भारतीय मूल के प्रवासी छात्र और पेशेवर कार्यस्थल, विश्वविद्यालय और सामुदायिक गतिविधियों में अपनी जाति के कारण भेदभाव का सामना कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ मामलों में पदोन्नति, नौकरी या सामाजिक मेल-जोल में उन्हें अवांछित महसूस कराया जाता है। इसे “सॉफ्ट-जाति भेदभाव” कहा जाता है, क्योंकि यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर मौजूद है।
अमेरिका के विश्वविद्यालयों और कार्यस्थलों में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ संस्थाओं ने जाति और सामाजिक भेदभाव के बारे में प्रशिक्षण और नीति लागू की है, ताकि भारतीय और अन्य दक्षिण एशियाई प्रवासियों के बीच समान अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, गैर-लाभकारी संगठन दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं।
संक्षेप में, अमेरिका में पारंपरिक जाति व्यवस्था नहीं है, लेकिन प्रवासी समुदायों में सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से अस्पृश्यता जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं। शिक्षा, जागरूकता और कानूनी सहायता के माध्यम से इसे कम किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी लोगों को समान अवसर और सम्मान मिले और जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो।
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