MOHAN VEENA
मोहन वीणा – परिचय और महत्व
मोहन वीणा भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अनूठा वाद्य यंत्र है, जिसे प्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित विश्व मोहन भट्ट ने विकसित किया। यह मूल रूप से पश्चिमी स्लाइड गिटार पर आधारित है, लेकिन इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत की आवश्यकताओं के अनुसार कई तकनीकी और संरचनात्मक परिवर्तन किए गए हैं। मोहन वीणा का उद्देश्य गिटार पर भारतीय रागों की शुद्ध और भावपूर्ण प्रस्तुति को संभव बनाना है।
मोहन वीणा में कुल 19 से 21 तार होते हैं। इनमें मुख्य बजाने वाले तार, सहायक तार और तरंग (सिम्पैथेटिक) तार शामिल होते हैं। ये तरंग तार राग के अनुसार स्वतः गूंज उत्पन्न करते हैं, जिससे वादन में गहराई और मधुरता आती है। इसे गोद में रखकर बजाया जाता है और उंगलियों की बजाय धातु या कांच की स्लाइड से तारों पर मींड निकाली जाती है, जो भारतीय संगीत की विशेष पहचान है।
इस वाद्य यंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गमक, मींड, मुरकी और आलाप जैसी शास्त्रीय तकनीकों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। यही कारण है कि मोहन वीणा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इसे एकल वादन, जुगलबंदी और फ्यूजन संगीत में भी व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।
मोहन वीणा को अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली जब विश्व मोहन भट्ट ने इसके माध्यम से अनेक विदेशी कलाकारों के साथ प्रस्तुतियाँ दीं। उनके एल्बम “A Meeting by the River” को ग्रैमी पुरस्कार मिला, जिससे मोहन वीणा विश्व मंच पर चर्चित हुई।
आज मोहन वीणा भारतीय संगीत की नवाचार परंपरा का प्रतीक है। यह वाद्य यंत्र यह दर्शाता है कि परंपरागत संगीत को आधुनिक प्रयोगों के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकता है।
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