CASTE SYSTEM IN CHINA
चीन में जाति व्यवस्था (Caste System in China)
चीन में पारंपरिक रूप से भारत जैसी कठोर जाति व्यवस्था नहीं रही है। चीन का समाज ऐतिहासिक रूप से वंश, परिवार, क्षेत्र और पेशे के आधार पर संगठित था, लेकिन जाति के आधार पर भेदभाव की प्रथा भारत जैसी नहीं थी। इसके बावजूद, चीन के इतिहास में कुछ सामाजिक वर्ग और पेशे आधारित भेदभाव देखा गया।
प्राचीन चीन में समाज को मुख्य रूप से चार वर्गों में बाँटा गया था—शूरवीर (Warriors), किसान (Peasants), कारीगर (Artisans) और व्यापारी (Merchants)। इन वर्गों का मुख्य आधार पेशा और समाज में भूमिका थी। किसान और शूरवीर वर्ग को सम्मान मिलता था, जबकि व्यापारी और कुछ कारीगर वर्ग को सामाजिक दृष्टि से कमतर माना जाता था। यह प्रणाली भारत की जाति व्यवस्था जैसी जन्म आधारित नहीं थी, बल्कि सामाजिक योगदान और पेशे के आधार पर थी।
चीन के कुछ क्षेत्रों में जातीय और क्षेत्रीय भेदभाव भी देखने को मिला। मंगोल, हान और अन्य अल्पसंख्यक जातीय समूहों के बीच राजनीतिक और सामाजिक भेदभाव की घटनाएँ हुई हैं। विशेषकर कम्युनिस्ट क्रांति और समाजवादी नीतियों से पहले, भूमि और संपत्ति के वितरण में वर्ग आधारित असमानता आम थी।
आधुनिक चीन में जाति या वर्ग आधारित भेदभाव कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। संविधान और कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करते हैं। हालांकि, वास्तविक जीवन में अल्पसंख्यक जातीय समूह, जैसे उइगर और तिब्बती, कभी-कभी सामाजिक और आर्थिक अवसरों में पिछड़े रह जाते हैं।
संक्षेप में, चीन में पारंपरिक जाति व्यवस्था नहीं थी, लेकिन सामाजिक और पेशा आधारित वर्ग विभाजन मौजूद था। आधुनिक चीन में कानूनी तौर पर सभी नागरिक समान हैं, लेकिन जातीय और क्षेत्रीय असमानताएँ अभी भी कुछ हद तक मौजूद हैं। चीन में जाति आधारित सामाजिक संरचना भारत जैसी कठोर और जन्म आधारित प्रणाली नहीं रही, इसलिए इसे आमतौर पर वर्ग और पेशा आधारित समाज कहा जा सकता है।
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