SOFT CASTE DISTINCTION
सॉफ्ट कास्ट डिस्टिंक्शन (Soft Caste Distinction)
सॉफ्ट कास्ट डिस्टिंक्शन एक ऐसा सामाजिक मुद्दा है जो मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई प्रवासी समुदायों—विशेषकर भारत, नेपाल और पाकिस्तान के लोगों में देखा जाता है। यह परंपरागत जाति व्यवस्था (Caste System) जैसी कठोर नहीं होती, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से जाति के आधार पर भेदभाव और अलगाव को दर्शाती है।
इसमें भेदभाव जन्म के आधार पर प्रत्यक्ष रूप से नहीं होता, बल्कि सामाजिक व्यवहार, पारिवारिक संबंध, विवाह, दोस्ती और पेशेवर अवसरों में दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, कुछ भारतीय प्रवासी विश्वविद्यालयों या कार्यस्थलों में अपने जाति समूह के अनुसार अलग रह सकते हैं, या शादी और मित्रता में उसी समूह को प्राथमिकता दे सकते हैं।
सॉफ्ट कास्ट डिस्टिंक्शन में जाति आधारित भेदभाव का कानूनी रूप से कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होता। यह अधिकतर सांस्कृतिक और सामाजिक दबाव के कारण मौजूद रहता है। हालांकि, यह प्रवासी समुदायों में अवसरों में असमानता और सामाजिक अलगाव का कारण बन सकता है।
ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में सॉफ्ट-कास्ट डिस्टिंक्शन पर अनुसंधान हुआ है। रिपोर्टों से पता चला है कि दलित और पिछड़े वर्ग के प्रवासी कभी-कभी शिक्षा, नौकरी और सामाजिक नेटवर्क में पिछड़ जाते हैं। इसलिए कई विश्वविद्यालय और कंपनियाँ अब जाति जागरूकता प्रशिक्षण और समान अवसर नीति लागू कर रही हैं।
सॉफ्ट-कास्ट डिस्टिंक्शन केवल भेदभाव का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और समान अवसर का भी विषय है। शिक्षा, जागरूकता और समुदायिक समर्पण के माध्यम से इसे कम किया जा सकता है। परिवार, समाज और संस्थाएँ मिलकर इस संस्कृति को बदल सकती हैं।
संक्षेप में, सॉफ्ट कास्ट डिस्टिंक्शन एक सूक्ष्म, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रकार का जाति भेदभाव है, जो आधुनिक प्रवासी समाज में समानता और सामाजिक न्याय को चुनौती देता है, लेकिन सही कदम और नीतियों से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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