KANDYAN DANCE

 कैंडियन नृत्य (Kandyan Dance)

कैंडियन नृत्य श्रीलंका का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से देश के मध्य पर्वतीय क्षेत्र कैंडि (Kandy) से संबंधित है। यह नृत्य श्रीलंका की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इसकी जड़ें प्राचीन धार्मिक अनुष्ठानों और लोक परंपराओं में हैं। प्रारंभ में यह नृत्य देवी-देवताओं की आराधना और रोग-निवारण अनुष्ठानों में किया जाता था।

कैंडियन नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऊर्जावान मुद्राएँ, तेज़ ताल और शक्तिशाली शारीरिक गतियाँ हैं। इसमें ऊँची छलांगें, घूमते हुए कदम, घुटनों को मोड़कर नृत्य करना और संतुलन बनाए रखना शामिल होता है। नर्तक शरीर की लचक और शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन करते हैं। यह नृत्य आमतौर पर पुरुषों द्वारा किया जाता था, लेकिन आधुनिक समय में महिलाएँ भी इसमें भाग लेने लगी हैं।

इस नृत्य में प्रयुक्त पारंपरिक वेशभूषा अत्यंत आकर्षक होती है। पुरुष नर्तक रंगीन कढ़ाईदार पोशाक, चांदी के आभूषण, कमरबंद और विशेष सिर पर पहनने वाला मुकुट धारण करते हैं। पैरों में बंधी घुँघरू जैसी घंटियाँ नृत्य की ताल को और प्रभावशाली बनाती हैं। संगीत में मुख्य रूप से गेटा बेराया नामक पारंपरिक ढोल का प्रयोग होता है, जिसकी लय पर पूरा नृत्य आधारित रहता है।

कैंडियन नृत्य धार्मिक उत्सवों, पेराहेरा (Esala Perahera) जैसे भव्य जुलूसों और सांस्कृतिक समारोहों में प्रमुख रूप से प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि श्रीलंका के इतिहास, विश्वास और सामाजिक जीवन को दर्शाने वाला एक जीवंत कला रूप है।

आज कैंडियन नृत्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुत किया जाता है और इसे सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित किया जा रहा है। यह नृत्य अनुशासन, सौंदर्य और परंपरा का अद्भुत संगम है।

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