DEVI SUBHADRA

 देवी सुभद्रा – परिचय और महत्व

देवी सुभद्रा हिंदू धर्म में पूजनीय देवी हैं और भगवान श्रीकृष्ण तथा बलराम की बहन मानी जाती हैं। उनका जन्म रोहिणी देवी की कोख से हुआ था। सुभद्रा को सौम्यता, करुणा और मंगल का प्रतीक माना जाता है। वे विशेष रूप से ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के साथ विराजमान हैं, जहाँ उनकी पूजा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है।

महाभारत काल में देवी सुभद्रा का विशेष स्थान है। उनका विवाह अर्जुन से हुआ था, जो भगवान कृष्ण के प्रिय मित्र और पांडवों में से एक थे। सुभद्रा और अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु महाभारत युद्ध के महान वीर थे। अभिमन्यु की वीरता और बलिदान सुभद्रा के मातृत्व और संस्कारों की महिमा को दर्शाते हैं।

देवी सुभद्रा को शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। वे नारी शक्ति के सौम्य रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहाँ धैर्य, प्रेम और त्याग का भाव प्रमुख है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुभद्रा की उपासना से पारिवारिक सुख, संतुलन और समृद्धि प्राप्त होती है।

पुरी की रथ यात्रा में देवी सुभद्रा की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। वे भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देती हैं। उनका रथ दर्पदलन कहलाता है, जिसे खींचना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस यात्रा में सुभद्रा भक्ति और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति के रूप में पूजित होती हैं।

देवी सुभद्रा की पूजा भारत के अनेक भागों में की जाती है। वे सरलता, स्नेह और सौहार्द की प्रतीक हैं। भारतीय धार्मिक परंपरा में उनका स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है और वे भक्तों के जीवन में शांति और संतुलन प्रदान करने वाली देवी के रूप में जानी जाती हैं।

Comments

Popular posts from this blog

GUJARATI ALPHABETS AND SYMBOLS

MAHUA BAGH GHAZIPUR