HISTORY OF INDIAN RUPEE

 भारतीय रुपया (INR) का इतिहास

भारतीय रुपया (Indian Rupee – INR) भारत की आधिकारिक मुद्रा है और इसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। “रुपया” शब्द संस्कृत के शब्द “रूप्य” से निकला है, जिसका अर्थ है चाँदी से बना सिक्का। प्राचीन भारत में चाँदी के सिक्कों का प्रयोग प्रचलित था, जिन्हें आधुनिक रुपये का प्रारंभिक रूप माना जाता है।

भारत में मुद्रा प्रणाली की शुरुआत मौर्य काल में मानी जाती है। उस समय “पण” नामक चाँदी के सिक्के चलन में थे। इसके बाद गुप्त काल में सोने और चाँदी के सुंदर एवं मानकीकृत सिक्के जारी किए गए। मध्यकाल में दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के दौरान भी मुद्रा प्रणाली विकसित हुई। शेरशाह सूरी (16वीं शताब्दी) को आधुनिक रुपये का वास्तविक जनक माना जाता है। उन्होंने लगभग 178 ग्रेन वजन का चाँदी का सिक्का जारी किया, जिसे “रुपया” कहा गया।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय मुद्रा प्रणाली में बड़े बदलाव आए। 1835 में ब्रिटिश सरकार ने पूरे भारत में एक समान मुद्रा प्रणाली लागू की, जिसमें चाँदी का रुपया मानक मुद्रा बना। उस समय 1 रुपया = 16 आना की प्रणाली प्रचलित थी। ब्रिटिश काल में कागजी नोटों की शुरुआत भी हुई और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना से पहले सरकार नोट जारी करती थी।

1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना हुई, जिसने भारत की मौद्रिक व्यवस्था को संगठित किया। स्वतंत्रता के बाद 1947 में भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ नए नोट जारी किए। 1957 में दशमलव प्रणाली अपनाई गई, जिसके अंतर्गत 1 रुपया = 100 पैसे कर दिया गया। इससे पुरानी आना-पाई प्रणाली समाप्त हो गई।

1960–70 के दशक में रुपये का मूल्य मुख्य रूप से सरकार द्वारा नियंत्रित रहता था। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति अपनाई। इसी समय रुपये को आंशिक रूप से बाजार आधारित विनिमय दर प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे इसका मूल्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले मांग-आपूर्ति पर निर्भर होने लगा।

समय के साथ भारतीय रुपये के स्वरूप में भी परिवर्तन हुआ। पुराने कागजी नोटों के साथ-साथ सिक्के, सुरक्षा धागा, वॉटरमार्क और उन्नत छपाई तकनीक अपनाई गई। 2010 में रुपये का आधिकारिक प्रतीक (₹) अपनाया गया, जो देवनागरी के “र” और रोमन “R” का मिश्रण है। 2016 में नए डिज़ाइन के नोट जारी किए गए, जिनमें सुरक्षा विशेषताओं को और मजबूत किया गया।

आज भारतीय रुपया न केवल भारत की आर्थिक पहचान है, बल्कि देश की संप्रभुता और ऐतिहासिक विकास का भी प्रतीक है।

Comments

Popular posts from this blog

GUJARATI ALPHABETS AND SYMBOLS

MAHUA BAGH GHAZIPUR