FOLK DANCE OF SRI LANKA
श्रीलंका के लोक नृत्य (Folk Dance of Sri Lanka)
श्रीलंका एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला द्वीपीय देश है, जहाँ के लोक नृत्य उसकी परंपराओं, धार्मिक विश्वासों और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं। श्रीलंका के लोक नृत्य मुख्य रूप से सिंहली, तमिल और कंडीअन परंपराओं से जुड़े हुए हैं। ये नृत्य प्राचीन काल से उत्सवों, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक आयोजनों में किए जाते रहे हैं।
श्रीलंका का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य कंडीअन नृत्य (Kandyan Dance) है, जो मध्य श्रीलंका के कंडी क्षेत्र से संबंधित है। यह नृत्य शक्तिशाली कदमों, ऊँची छलांगों और लयबद्ध शारीरिक गतियों के लिए जाना जाता है। पारंपरिक कंडीअन नर्तक रंग-बिरंगे वस्त्र, चांदी के आभूषण और विशेष सिर की सजावट पहनते हैं। यह नृत्य प्रायः ढोल (गेटा बेराया) की ताल पर किया जाता है।
दूसरा प्रमुख लोक नृत्य लो-कंट्री नृत्य (Low Country Dance) है, जो श्रीलंका के तटीय क्षेत्रों में प्रचलित है। यह नृत्य मुखौटों के उपयोग और नाटकीय भाव-भंगिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। इसमें लोक कथाओं, देवी-देवताओं और आत्माओं से जुड़ी मान्यताओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
सबरगमुवा नृत्य (Sabaragamuwa Dance) भी श्रीलंका का एक महत्वपूर्ण लोक नृत्य है, जो सबरगमुवा प्रांत से संबंधित है। यह नृत्य कृषि, वर्षा और देवताओं की आराधना से जुड़ा होता है। इसमें नर्तक पारंपरिक गीतों और ढोल की मधुर ध्वनि पर नृत्य करते हैं।
तमिल समुदाय में कोविल नृत्य और अन्य धार्मिक नृत्य रूप प्रचलित हैं, जो मंदिर उत्सवों में किए जाते हैं।
कुल मिलाकर, श्रीलंका के लोक नृत्य देश की सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक आस्था और सामूहिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब हैं। ये नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित करने का माध्यम भी हैं।
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