RESERVATION SYSTEM IN USA
अमेरिका में आरक्षण प्रणाली (Reservation System in USA)
अमेरिका में आरक्षण प्रणाली को “Affirmative Action” कहा जाता है। इसका उद्देश्य समाज में पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को शिक्षा, रोजगार और सरकारी अवसरों में समान अवसर प्रदान करना है। यह प्रणाली विशेष रूप से जातीय और नस्लीय अल्पसंख्यकों, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए लागू की जाती है।
अमेरिका में ऐतिहासिक रूप से अफ्रीकी अमेरिकी, हिज़्पैनिक और नेटिव अमेरिकियों जैसे समुदायों को शैक्षणिक और पेशेवर क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसी कारण 1960 और 1970 के दशक में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन और अन्य प्रशासनिक नीतियों के तहत Affirmative Action लागू की गई। इसका मुख्य उद्देश्य उन समूहों को प्राथमिकता देना है, जिन्हें पूर्व में अवसर नहीं मिले।
शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रणाली विशेष रूप से प्रभावी है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों के छात्रों को दाखिला और स्कॉलरशिप के लिए आरक्षण मिलता है। रोजगार में भी समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए कंपनियां और सरकारी संस्थान इस नीति को अपनाते हैं।
हालांकि, अमेरिका में आरक्षण प्रणाली विवादों से भी मुक्त नहीं है। कई लोग इसे “उचित योग्यता के आधार पर अवसरों का हनन” मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने इस विषय में कई बार दिशानिर्देश दिए हैं, जैसे आरक्षण केवल योग्यता और दक्षता के साथ संतुलन बनाए रखते हुए लागू किया जाए।
संक्षेप में, अमेरिका में आरक्षण प्रणाली समाज में समानता, न्याय और अवसर की उपलब्धि के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह सुनिश्चित करती है कि ऐतिहासिक भेदभाव के कारण पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग भी शिक्षा और रोजगार में प्रतिस्पर्धा कर सकें। हालांकि, इसके सही और संतुलित प्रयोग के लिए लगातार निगरानी और सुधार की आवश्यकता है।
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