CHABAHAR PORT IRAN
चाबहार पोर्ट (Chabahar Port)
📌 चाबहार का रणनीतिक महत्व:
चाबहार पोर्ट (ईरान) भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का एक मुख्य मार्ग है, जो पाकिस्तान और ग्वादर पोर्ट को बायपास करता है। यही वजह है कि भारत ने इसे International North-South Transport Corridor (INSTC) का प्रमुख हिस्सा बनाया है।
📊 संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिबंध और छूट:
अमेरिका ने सितंबर 2025 में चाबहार पर पहले से मिली संयुक्त राज्य प्रतिबंध छूट को वापस ले लिया, जिससे भारत के संचालन और निवेश पर दबाव बढ़ गया। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है ताकि पाबंदी समाप्ति (अप्रैल 2026 तक छूट) के बाद भी रास्ता निकाला जाए।
💰 भारत का निवेश और ‘स्टेटेजिक रिट्रीट’:
भारत ने लगभग $120 मिलियन के निवेश को ईरान में पूरी तरह से निपटा दिया है और अप्रत्यक्ष तरीके से अपना प्रबंधन-व्यवसाय कम कर रहा है ताकि संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके। पोर्ट में लगाया गया समान और इंफ्रास्ट्रक्चर अब ईरान के नियंत्रण में है।
🤝 भारत की नीति और स्थल पर सक्रियता:
भारत ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित रूप से पोर्ट से पूरी तरह “निकालना विकल्प नहीं है” और वह संयुक्त राज्य के साथ बातचीत जारी रखे हुए है ताकि चाबहार को रणनीतिक रूप से सुरक्षित रखा जा सके।
⚓ सैन्य-सहयोग संकेत:
पिछले महीनों में भारतीय तटरक्षक जहाज ICG सार्थक (Sarthak) ने चाबहार पोर्ट का ऐतिहासिक दौरा किया, जो भारत-ईरान के बढ़ते सहयोग का प्रतीक है। �
🌍 भविष्य की चुनौतियाँ:
• अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक प्रतिबंध भारत की रणनीति को चुनौती देते हैं।
• चीन की भूमिका और मध्य एशिया में प्रतिस्पर्धा से भारत को सतर्क रहना पड़ रहा है।
• पोर्ट के संचालन, निवेश सुरक्षा और लॉजिस्टिक नेटवर्क (रेल/रोड) को और मजबूती देने की आवश्यकता है।
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