CASTE SYSTEM IN UK

 यूनाइटेड किंगडम (UK) में जातिव्यवस्था (Caste System) 

यूनाइटेड किंगडम (UK) में जातिव्यवस्था पारंपरिक रूप से भारतीय या दक्षिण एशियाई देशों जैसी जन्म आधारित कठोर प्रणाली नहीं है। ब्रिटेन में जाति का कोई ऐतिहासिक सामाजिक ढांचा नहीं रहा, लेकिन भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासियों के कारण जाति आधारित भेदभाव का मुद्दा सामने आया है।

ब्रिटेन में अधिकांश जाति संबंधी मुद्दे दक्षिण एशियाई समुदाय—विशेषकर भारत, पाकिस्तान और नेपाल से आए प्रवासियों के बीच देखे जाते हैं। अनुसंधान और रिपोर्टों के अनुसार, कुछ भारतीय प्रवासी ब्राह्मण, यादव, दलित और अन्य पिछड़े वर्गों में विभाजित रहते हैं और कभी-कभी सामाजिक या पेशेवर अवसरों में भेदभाव का सामना करते हैं। इसे "सॉफ्ट-कास्ट डिस्टिंक्शन" कहा जाता है, यानी यह कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन समाज और सांस्कृतिक दृष्टि से मौजूद है।

UK में जाति आधारित भेदभाव को कानूनी रूप से नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रहा है। हालाँकि, 2010 के Equality Act में जाति आधारित भेदभाव को शामिल किया गया और यह अब रोजगार, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में अवैध है। इसके तहत किसी भी प्रकार का भेदभाव—जैसे नौकरी में भर्ती, पदोन्नति या शिक्षा में प्रवेश—को रोकने का प्रावधान है।

यूनाइटेड किंगडम में गैर-लाभकारी संगठन और सामाजिक संस्थाएँ भी जागरूकता, प्रशिक्षण और शिकायत निवारण के माध्यम से जाति आधारित भेदभाव को कम करने का प्रयास कर रही हैं। प्रवासी समुदायों में शिक्षा और सामाजिक समावेशन बढ़ाने के लिए कई पहलें की गई हैं।

संक्षेप में, ब्रिटेन में जातिव्यवस्था पारंपरिक रूप से नहीं है, लेकिन प्रवासी दक्षिण एशियाई समुदायों में सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से जाति आधारित भेदभाव मौजूद है। कानून और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से इसे कम करने का प्रयास लगातार जारी है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी लोगों को समान अवसर और सम्मान मिले।


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