DHOLAVIRA/GUJARAT

 धोलावीरा

धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जो भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित है। यह स्थल कच्छ के रण में खदिर बेट द्वीप पर अवस्थित है। धोलावीरा की खोज वर्ष 1967–68 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। यह स्थल हड़प्पा सभ्यता के विकसित नगरीय जीवन, उन्नत नगर नियोजन और जल प्रबंधन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

धोलावीरा की नगर रचना अन्य हड़प्पा स्थलों से भिन्न है। यहाँ नगर को तीन भागों—ऊपरी नगर, मध्य नगर और निचले नगर—में विभाजित किया गया था। चारों ओर मजबूत पत्थर की दीवारें बनाई गई थीं। सड़कों की योजना सुव्यवस्थित थी और भवनों का निर्माण बड़े पत्थरों से किया गया था, जो इसकी विशिष्टता को दर्शाता है।

धोलावीरा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्भुत जल संरक्षण व्यवस्था है। यहाँ वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए विशाल जलाशय, कुंड और नहरें बनाई गई थीं। शुष्क और रेगिस्तानी क्षेत्र में इतनी विकसित जल प्रणाली उस समय की वैज्ञानिक समझ और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण है।

यहाँ से मिले अवशेषों में मिट्टी के बर्तन, मोहरें, तांबे के औजार, मनके, शंख और पत्थर की कलाकृतियाँ शामिल हैं। धोलावीरा से प्राप्त एक विशाल शिलालेख भी प्रसिद्ध है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा हड़प्पाई शिलालेख माना जाता है।

अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण धोलावीरा को वर्ष 2021 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह स्थल प्राचीन भारतीय सभ्यता की समृद्धि, तकनीकी उन्नति और पर्यावरणीय समझ को उजागर करता है।

Comments

Popular posts from this blog

GUJARATI ALPHABETS AND SYMBOLS

MAHUA BAGH GHAZIPUR