KAHAR
कहार जाति – परिचय
कहार जाति भारत की एक पारंपरिक व्यवसायिक और मजदूर समुदाय है। यह समाज मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है। ऐतिहासिक रूप से कहार समाज का संबंध परिवहन, पानी और भारी सामान ढुलाई से रहा है। “कहार” शब्द अक्सर उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो नालियों, जल स्रोतों और गाँवों में आवश्यक वस्तुओं के ढुलाई और सेवा कार्यों में लगे रहते हैं।
परंपरागत रूप से कहार समाज के लोग सामान ढोने, नाव संचालन, जल स्रोतों की देखरेख और कृषि मजदूरी में संलग्न रहते थे। पुराने समय में यह समाज गांव और कस्बों में आवश्यक वस्तुओं और पानी की आपूर्ति का कार्य करता था। इसके अलावा कहार लोग त्यौहारों और धार्मिक आयोजनों में झांकी, सजावट और अन्य सहयोगी कार्यों में भी मदद करते थे। समाज की मेहनत और समर्पण ग्रामीण जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सामाजिक संरचना की दृष्टि से कहार समाज में परिवार और कुल व्यवस्था का महत्व है। विवाह सामान्यतः समाज की परंपराओं और गोत्र के अनुसार संपन्न होता है। समाज में पंचायत या जातीय समिति सामाजिक अनुशासन बनाए रखने और विवादों के समाधान में सहायक होती है। कहार समाज के लोकगीत, नृत्य और त्योहार उनके जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। प्रमुख पर्वों में होली, दीपावली और छठ शामिल हैं।
भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा कहार जाति को कई राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत शामिल किया गया है। इससे शिक्षा, रोजगार और कल्याण योजनाओं में उन्हें विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।
कुल मिलाकर कहार जाति एक मेहनती, सामाजिक और प्रगतिशील समुदाय है। परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ यह समाज भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, समाज सेवा और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कहार समाज अपने परिश्रम और संघर्ष के कारण भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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