RESERVATION IN SOUTH AFRICA

 दक्षिण अफ़्रीका में आरक्षण (Reservation in South Africa)

दक्षिण अफ़्रीका में आरक्षण प्रणाली को मुख्य रूप से ब्लैक इकोनॉमिक एम्पावरमेंट (Black Economic Empowerment – BEE) और Affirmative Action के माध्यम से लागू किया गया है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक रंगभेद (Apartheid) और सामाजिक असमानताओं के शिकार लोगों को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक अवसरों में समान अवसर प्रदान करना है।

अतीत में दक्षिण अफ़्रीका में अफ्रीकी, रंगीन और भारतीय समुदायों को सफेद लोगों के मुकाबले राजनीति, शिक्षा और रोजगार में भेदभाव का सामना करना पड़ता था। 1994 में अपार्थेड制度 समाप्त होने के बाद, सरकार ने पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण और सकारात्मक कार्रवाई की नीतियाँ लागू कीं।

आरक्षण प्रणाली के तहत सरकारी नौकरी, शिक्षा संस्थानों में प्रवेश और कुछ निजी क्षेत्रों में विशेष कोटा और प्राथमिकता दी जाती है। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालयों में ब्लैक, कोलोर और भारतीय छात्रों के लिए प्रवेश और छात्रवृत्ति के अवसर बनाए गए हैं। वहीं, सरकारी और कुछ निजी संस्थाओं में भर्ती और पदोन्नति में पिछड़े वर्गों को प्राथमिकता दी जाती है।

दक्षिण अफ़्रीका में आरक्षण का मुख्य उद्देश्य समानता, सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों का सशक्तिकरण है। इससे समाज में ऐतिहासिक असमानताओं को कम करने में मदद मिली है। हालांकि, इस प्रणाली को लेकर विवाद भी रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि आरक्षण योग्यता और दक्षता को प्रभावित कर सकता है, जबकि समर्थक इसे सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने का आवश्यक उपाय मानते हैं।

संक्षेप में, दक्षिण अफ़्रीका में आरक्षण प्रणाली समाज में समान अवसर और न्याय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह नीति ऐतिहासिक भेदभाव और रंगभेदी सामाजिक ढांचे के कारण पिछड़े हुए वर्गों को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर प्रदान करती है। यह प्रणाली दक्षिण अफ़्रीका के लोकतंत्र और बहुसांस्कृतिक समाज को मजबूत करने में सहायक है।

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