MORRIS DANCE

 मॉरिस डांस (Morris Dance)

मॉरिस डांस इंग्लैंड का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जो सदियों से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सवों और सामाजिक समारोहों का हिस्सा रहा है। यह नृत्य मुख्य रूप से ग्रामीण जीवन, कृषि उत्सव और मौसमी परिवर्तन को दर्शाने के लिए किया जाता है। मॉरिस डांस न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह इंग्लैंड की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी प्रतीक माना जाता है।

मॉरिस डांस में नर्तक विशेष रूप से सजीव रंग-बिरंगे वस्त्र और घंटियों से सुसज्जित जूते पहनते हैं। पुरुष नर्तक पारंपरिक रूप से सफेद वस्त्र और रंगीन फीते पहनते हैं, जबकि कुछ समूह में महिलाओं को भी शामिल किया जाता है। नृत्य के दौरान नर्तक हाथ में छड़ी, रूमाल या तलवार जैसी वस्तुएँ पकड़कर तालबद्ध तरीके से कदम उठाते हैं। यह नृत्य ऊर्जा, ताल और सामूहिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मॉरिस डांस का संगीत पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर आधारित होता है, जैसे ढोलक, बैंडो, बागपाइप और फ्लूट। नृत्य की चालें दोहराव और तालबद्धता पर आधारित होती हैं, जिससे समूह के सभी सदस्य एक समान गति से नृत्य कर सकें। नर्तक कभी एक-दूसरे के साथ छड़ी टकराते हैं, कभी घेरा बनाकर घूमते हैं और कभी ताल के साथ कूदते हैं।

इतिहास में मॉरिस डांस की जड़ें मध्यकालीन इंग्लैंड में मानी जाती हैं। यह नृत्य मुख्य रूप से वसंत और ग्रीष्म उत्सवों में किया जाता था, ताकि कृषि उत्पादकता और खुशहाली का जश्न मनाया जा सके। समय के साथ यह नृत्य इंग्लैंड के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में विकसित हुआ।

आज मॉरिस डांस इंग्लैंड की लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल मनोरंजन और उत्सव का माध्यम है, बल्कि सामाजिक मेल-जोल, परंपरा और सामुदायिक भावना को बनाए रखने का एक प्रभावी साधन भी है। मॉरिस डांस की जीवंतता और रंगीन प्रस्तुति इसे विश्वभर में प्रसिद्ध बनाती है।

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