MUSHAR

 मुसहर जाति – परिचय 

मुसहर जाति भारत की एक प्राचीन और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय है। यह समाज मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। मुसहर समाज ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा माना जाता है। “मुसहर” शब्द का अर्थ होता है—जो मूषक (चूहा) पकड़ता है, क्योंकि पारंपरिक रूप से यह समाज खेती के दौरान चूहों से फसलों की रक्षा करता था।

पारंपरिक रूप से मुसहर समाज के लोग कृषि मजदूरी, खेतिहर काम और दैनिक जीविकोपार्जन से जुड़े रहे हैं। बहुत से मुसहर लोग छोटे किसानों की सहायता, जंगल से लकड़ी या अन्य कच्चे माल एकत्र करने, और पशुपालन के कामों में संलग्न रहते थे। समय के साथ यह समाज धीरे-धीरे शिक्षा और आधुनिक व्यवसायों में भी सक्रिय होने लगा।

सामाजिक संरचना की दृष्टि से मुसहर समाज में परिवार और कुल परंपरा का महत्व है। विवाह सामाजिक नियमों और परंपराओं के अनुसार संपन्न होते हैं। समाज में पंचायत या समुदायिक बैठकें सामाजिक अनुशासन बनाए रखने और विवादों के समाधान में सहायक होती हैं। मुसहर समाज के लोकगीत, लोकनृत्य और त्यौहार उनके जीवन और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। होली, दिवाली और छठ उनके प्रमुख उत्सव हैं।

भारतीय संविधान और राज्य सरकारों द्वारा मुसहर जाति को अनुसूचित जाति (SC) के रूप में मान्यता दी गई है। इसके तहत शिक्षा, रोजगार और सामाजिक कल्याण में विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। आधुनिक समय में मुसहर समाज के लोग शिक्षा, प्रशासन, राजनीति और सामाजिक कार्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

कुल मिलाकर मुसहर जाति एक संघर्षशील, मेहनती और प्रगतिशील समाज है। सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के बावजूद यह समाज शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। मुसहर समाज भारतीय समाज में मेहनत और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बना हुआ है।

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