RAM SETU


रामसेतु, जिसे आदम्स ब्रिज (Adam’s Bridge) भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म के महान ग्रंथ रामायण से जुड़ा एक पौराणिक और ऐतिहासिक स्थल है। यह एक पत्थरों की श्रृंखला है, जो भारत के तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम द्वीप को श्रीलंका के मन्नार द्वीप से जोड़ती है। यह सेतु लगभग 30 किलोमीटर लंबा है और समुद्र की सतह के थोड़ा नीचे स्थित है।

रामायण के अनुसार, जब रावण माता सीता को लंका ले गया था, तब भगवान श्रीराम ने अपनी वानर सेना के साथ लंका पहुँचने के लिए समुद्र पर एक पुल बनाने का निर्णय लिया। यह सेतु नल और नील के नेतृत्व में बनाया गया था, जो वानर सेना के कुशल इंजीनियर थे। भगवान श्रीराम का नाम लिखे हुए पत्थरों को समुद्र में डालते ही वे तैरने लगे और इस तरह समुद्र पर पुल बन गया। इसी सेतु के सहारे भगवान राम और उनकी सेना लंका पहुँचे और रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया।

रामसेतु को लेकर वैज्ञानिक और भौगोलिक शोध भी हुए हैं। नासा के सैटेलाइट चित्रों में भी समुद्र के नीचे पत्थरों की एक श्रृंखला दिखाई देती है, जिसे रामसेतु माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संरचना लगभग 7000 वर्ष पुरानी हो सकती है। यह पुल एक समय में भारत और श्रीलंका के बीच स्थल मार्ग के रूप में भी उपयोग में आता था।

धार्मिक दृष्टिकोण से रामसेतु हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। इसे भगवान राम की दिव्यता और वानर सेना की भक्ति का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु रामेश्वरम जाते हैं और समुद्र के तट से रामसेतु का दर्शन करते हैं।

हालांकि आधुनिक काल में इस पुल को तोड़कर नौवहन मार्ग (सेतु समुद्रम परियोजना) बनाने के प्रयास हुए, लेकिन धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारणों से इस पर विवाद भी हुआ।

निष्कर्षतः, रामसेतु न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। यह पुल श्रीराम की लीला, विश्वास, आस्था और भक्ति का अमिट चिह्न है, जो आने वाली पीढ़ियों को धर्म और पराक्रम की प्रेरणा देता रहेगा।

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