INCOME TAX REFUND

 

इन्कम टैक्स रिफंड 

इन्कम टैक्स रिफंड वह राशि है जो आयकर विभाग करदाता को तब लौटाता है जब उसने पूरे वित्तीय वर्ष में अपनी वास्तविक कर देयता से अधिक टैक्स का भुगतान कर दिया हो। यह अतिरिक्त राशि टीडीएस, एडवांस टैक्स, सेल्फ असेसमेंट टैक्स या अन्य किसी रूप में जमा हो सकती है। जब करदाता अपना आयकर रिटर्न दाखिल करता है और उसमें कर गणना के आधार पर अधिक भुगतान सामने आता है, तो उसे रिफंड का अधिकार मिलता है।

आयकर विभाग द्वारा रिफंड जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है। करदाता रिटर्न फाइल करते समय अपने बैंक खाते का विवरण देता है, क्योंकि आजकल सभी रिफंड सीधे बैंक खाते में ECS/NEFT के माध्यम से भेजे जाते हैं। रिफंड की स्थिति को आयकर पोर्टल या NSDL की वेबसाइट पर Refund Status विकल्प के माध्यम से देखा जा सकता है। रिफंड जारी होने से पहले विभाग रिटर्न का तकनीकी और वित्तीय सत्यापन करता है, जिसे ITR Processing कहा जाता है।

रिफंड मिलने के कई कारण हो सकते हैं—जैसे टीडीएस जरूरत से ज्यादा कट जाना, टैक्स रिबेट/डिडक्शन का सही तरह लागू न होना, या एडवांस टैक्स का अत्यधिक भुगतान। करदाता फॉर्म 26AS, AIS और TIS की मदद से अपने टैक्स विवरण का मिलान कर सकते हैं ताकि रिफंड से संबंधित गड़बड़ियों से बचा जा सके।

यदि रिफंड देरी से मिलता है, तो आयकर विभाग ब्याज भी देता है। यह ब्याज आयकर अधिनियम की धारा 244A के अंतर्गत दिया जाता है। हालांकि, यदि रिटर्न समय सीमा के बाद दाखिल किया गया हो, तो ब्याज का लाभ कम हो सकता है।

इन्कम टैक्स रिफंड करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय राहत है, जो उन्हें अधिक भुगतान की गई राशि वापस दिलाता है। इसलिए सही समय पर, सटीक जानकारी के साथ आयकर रिटर्न दाखिल करना हमेशा लाभदायक होता है। इससे न केवल रिफंड समय पर प्राप्त होता है, बल्कि किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी से भी बचाव होता है।

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