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Showing posts from February, 2026

SURAJKUND MELA

सूरजकुंड मेला भारत का एक प्रसिद्ध हस्तशिल्प और सांस्कृतिक मेला है, जो हर वर्ष हरियाणा के फरीदाबाद जिले में आयोजित किया जाता है। यह मेला सूरजकुंड नामक ऐतिहासिक स्थल के पास लगता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी। इस मेले का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति को बढ़ावा देना है। सूरजकुंड मेला आमतौर पर फरवरी महीने में लगभग पंद्रह दिनों तक चलता है। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों के कलाकार और शिल्पकार भाग लेते हैं। हर वर्ष किसी एक राज्य को “थीम स्टेट” बनाया जाता है, जिसकी संस्कृति, वेशभूषा, खान-पान और लोक कला को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाता है। इसके साथ ही कई विदेशी कलाकार भी इस मेले में भाग लेते हैं, जिससे यह एक अंतरराष्ट्रीय मेला बन गया है। मेले में हाथ से बने कपड़े, आभूषण, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की वस्तुएँ, पेंटिंग, कालीन, सजावटी सामान आदि की प्रदर्शनी और बिक्री होती है। यहाँ पर लोक नृत्य, लोक संगीत और नाटक जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाते हैं, जो दर्शकों का मन मोह लेते हैं। विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजन भी यहाँ उपलब्ध होते हैं। सूरजकुंड मेला न केवल ...

PADMSRI POKHILA LEKTHIPI

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   पद्मश्री पुरस्कार विजेता पोखिला लेक्तेपि (Pokhila Lekthepi)  🌟 पोखिला लेक्तेपि — संक्षिप्त परिचय (Biography in Hindi) नाम: पोखिला लेक्तेपि (Pokhila Lekthepi) उम्र: लगभग 72 वर्ष (2026 में) � पेशा: भारतीय लोक एवं करबी संगीत गायिका जन्म स्थान: डोकमौका, करबी अंगलॉन्ग जिला, असम � कार्य काल: 1964 से वर्तमान तक  🏆 प्रमुख उपलब्धियाँ और सम्मान 🇮🇳 Padma Shri 2026 सरकार ने 2026 में पोखिला लेक्तेपि को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह सम्मान कला (Art) के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए दिया गया है।  📜 अन्य सम्मान ✔️ Assam Gaurav Award (2024) – असम सरकार का उच्च नागरिक सम्मान � ✔️ Shilpi Award & Shilpi Pension (2023) – असम सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान के लिए � ✔️ Queen of Melody का खिताब (2011)  🎶 संगीत और करियर पोखिला लेक्तेपि ने 300 से अधिक गीत गाए हैं, जिनमें करबी लोकगीत और आधुनिक करबी संगीत शामिल हैं।  उन्होंने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली, पर अपने परिवार से सीखकर संगीत में अपन...

KACHNAAR

कचनार एक सुंदर और आकर्षक वृक्ष है, जो भारत के विभिन्न भागों में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम बौहिनिया वरिगेटा (Bauhinia Variegata) है। कचनार का वृक्ष मध्यम आकार का होता है और इसकी ऊँचाई लगभग 10 से 12 मीटर तक हो सकती है। इसकी पत्तियाँ हरे रंग की और ऊँट के खुर के आकार जैसी होती हैं, जो इसे अन्य पेड़ों से अलग पहचान देती हैं। कचनार के फूल बहुत सुंदर और रंग-बिरंगे होते हैं। ये गुलाबी, सफेद और बैंगनी रंग के होते हैं और बसंत ऋतु में खिलते हैं। जब कचनार के पेड़ पर फूल आते हैं, तो पूरा पेड़ रंगीन दिखाई देता है और वातावरण सुगंधित हो जाता है। इसके फूल देखने में ऑर्किड जैसे लगते हैं, इसलिए इसे "ऑर्किड ट्री" भी कहा जाता है। कचनार के फूल न केवल सुंदर होते हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं। कचनार का उपयोग आयुर्वेद में अनेक रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। इसकी छाल, फूल और पत्तियाँ औषधि के रूप में काम आती हैं। यह पाचन संबंधी समस्याओं, सूजन और त्वचा रोगों में लाभकारी माना जाता है। इसके फूलों की सब्जी भी बनाई जाती है, जो स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। कचनार का वृक्ष धार्मिक और ...