INDIAN PEAFAWL

 भारतीय मोर (Indian Peafowl)

भारतीय मोर, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Pavo cristatus कहा जाता है, भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। यह अपनी मनमोहक सुंदरता, रंग-बिरंगे पंखों और आकर्षक नृत्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य में मोर का विशेष स्थान रहा है। प्राचीन काल से ही इसे सौंदर्य, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

नर मोर अपने लंबे, चमकीले और आंखनुमा आकृतियों वाले पंखों के कारण विशेष पहचान रखता है। इन पंखों को फैलाकर किया गया उसका नृत्य वर्षा ऋतु में देखने योग्य होता है। मादा मोरनी अपेक्षाकृत साधारण रंग की होती है और उसके पंख छोटे होते हैं। मोर की आवाज तेज और विशिष्ट होती है, जिसे अक्सर वर्षा के आगमन से जोड़ा जाता है।

भारतीय मोर मुख्य रूप से जंगलों, खेतों, घास के मैदानों और गांवों के आसपास पाया जाता है। यह सर्वाहारी पक्षी है और अनाज, बीज, फल, कीड़े-मकोड़े, छोटे सरीसृप तथा सांप तक खा लेता है। इसी कारण किसान इसे मित्रवत पक्षी मानते हैं, क्योंकि यह हानिकारक जीवों को नियंत्रित करता है।

मोर का भारतीय धर्म और पौराणिक कथाओं में भी महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान कृष्ण को मोरपंख धारण करते हुए दर्शाया जाता है, वहीं कार्तिकेय को मोर की सवारी करते हुए माना जाता है। विभिन्न लोककथाओं और चित्रकलाओं में मोर सौभाग्य और सौंदर्य का प्रतीक है।

भारतीय मोर को 1963 में भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षित है। हालांकि आवास नष्ट होने और अवैध शिकार के कारण इसके अस्तित्व पर खतरा भी मंडराता है। इसलिए मोर का संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। भारतीय मोर न केवल प्रकृति की अनुपम देन है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का भी अभिन्न अंग है।

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