SUBHADRA KUMARI CHAUHAN

 सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान हिंदी साहित्य की एक प्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं। उनका जन्म 16 अगस्त 1904 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) जिले के निहालपुर गाँव में हुआ था। वे बचपन से ही प्रतिभाशाली थीं और कम उम्र में ही कविता लिखने लगी थीं। उनकी रचनाओं में देशप्रेम, वीरता, नारी चेतना और सामाजिक भावनाओं की स्पष्ट अभिव्यक्ति मिलती है।

सुभद्रा कुमारी चौहान को विशेष रूप से उनकी देशभक्ति कविताओं के लिए जाना जाता है। उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता “झाँसी की रानी” है, जिसकी पंक्तियाँ “खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी” आज भी जन-जन में उत्साह और वीरता का संचार करती हैं। इस कविता ने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और बलिदान को अमर बना दिया।

वे केवल कवयित्री ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की सक्रिय सेनानी भी थीं। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उनके लेखन में स्वतंत्रता, त्याग और साहस की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

सुभद्रा कुमारी चौहान ने कविता के साथ-साथ कहानियाँ भी लिखीं। उनकी भाषा सरल, भावपूर्ण और ओजस्वी थी, जिससे आम पाठक भी आसानी से जुड़ पाते थे। उनकी रचनाएँ आज भी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जाती हैं।

15 फरवरी 1948 को एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया। अल्पायु में निधन के बावजूद सुभद्रा कुमारी चौहान हिंदी साहित्य और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमिट छाप छोड़ गईं। वे आज भी देशभक्ति और नारी शक्ति की प्रेरणास्रोत मानी जाती हैं।

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