ANAND BAKSHI
आनंद बख्शी : हिंदी सिनेमा के महान गीतकार
आनंद बख्शी हिंदी फिल्म जगत के ऐसे महान गीतकार थे, जिनके गीतों ने दशकों तक भारतीय सिनेमा और संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। उनका जन्म 21 जुलाई 1930 को रावलपिंडी (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। प्रारंभिक जीवन में आनंद बख्शी को अनेक संघर्षों का सामना करना पड़ा, लेकिन संगीत और साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
आनंद बख्शी ने अपने करियर की शुरुआत 1950 के दशक में की। शुरुआती वर्षों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, परंतु उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा पहचान में आई और वे हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतकारों में शामिल हो गए। उन्होंने लगभग चार दशकों तक सक्रिय रूप से फिल्मों के लिए गीत लिखे और करीब 650 से अधिक फिल्मों में 4000 से ज्यादा गीतों की रचना की।
उनके गीतों की सबसे बड़ी विशेषता सरल, भावपूर्ण और आम आदमी की भाषा में गहरी भावनाओं को व्यक्त करना था। प्रेम, विरह, खुशी, दर्द, देशभक्ति और जीवन के यथार्थ को उन्होंने बेहद सहज शब्दों में पिरोया। “मेरे सपनों की रानी”, “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे”, “चिंगारी कोई भड़के”, “तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी”, और “सावन का महीना” जैसे गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।
आनंद बख्शी ने लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल, आर. डी. बर्मन, मदन मोहन और शिव-हरि जैसे महान संगीतकारों के साथ काम किया। उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण हैं।
30 मार्च 2002 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके लिखे गीत आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। आनंद बख्शी का योगदान हिंदी सिनेमा के संगीत को अमर बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे सदैव एक संवेदनशील, सरल और जनमानस के गीतकार के रूप में याद किए जाते रहेंगे।
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