BANBASA
बनबसा (उत्तराखंड) – परिचय
बनबसा उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जनपद में स्थित एक महत्वपूर्ण कस्बा है। यह भारत–नेपाल सीमा पर शारदा (महाकाली) नदी के तट पर बसा हुआ है। अपनी सामरिक, व्यापारिक और धार्मिक महत्ता के कारण बनबसा का विशेष स्थान है। यह स्थान टनकपुर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और कुमाऊँ क्षेत्र का एक प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है।
बनबसा का ऐतिहासिक महत्व भी उल्लेखनीय है। यह स्थान प्राचीन काल से ही भारत और नेपाल के बीच संपर्क और व्यापार का केंद्र रहा है। शारदा नदी पर बना शारदा बैराज इस क्षेत्र की एक प्रमुख पहचान है, जिससे सिंचाई, विद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है। इस बैराज के कारण आसपास के क्षेत्रों की कृषि व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।
धार्मिक दृष्टि से बनबसा का संबंध रामायण काल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि वनवास के समय भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण कुछ समय के लिए इसी क्षेत्र में ठहरे थे, इसी कारण इसका नाम ‘बनबसा’ पड़ा। यहां स्थित प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य बनबसा की एक और विशेषता है। चारों ओर फैले हरे-भरे वन, नदी का शांत प्रवाह और तराई क्षेत्र की उपजाऊ भूमि इसे आकर्षक बनाती है। यह स्थान वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए भी उपयुक्त है, क्योंकि इसके आसपास वन क्षेत्र पाए जाते हैं।
आज बनबसा एक उभरता हुआ सीमावर्ती कस्बा है, जहां व्यापार, कृषि और आवागमन की सुविधाएं विकसित हो रही हैं। सड़क और रेल मार्ग से इसकी अच्छी कनेक्टिविटी है, जिससे यह क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रगति कर रहा है। संक्षेप में, बनबसा ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करता है।
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