MEHADI
मेहंदी
मेहंदी भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह एक प्राकृतिक रंग है, जो मेहंदी के पौधे (हिना) की पत्तियों से तैयार किया जाता है। प्राचीन काल से ही भारत में मेहंदी का उपयोग सौंदर्य, धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर किया जाता रहा है। विशेष रूप से विवाह, तीज-त्योहार, करवा चौथ, ईद और अन्य शुभ अवसरों पर मेहंदी लगाने की परंपरा अत्यंत लोकप्रिय है।
मेहंदी का सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। विवाह में दुल्हन के हाथों और पैरों पर लगाई जाने वाली मेहंदी सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह माना जाता है कि जितना गहरा रंग मेहंदी का होगा, उतना ही अधिक प्रेम और अपनापन वैवाहिक जीवन में होगा। “मेहंदी की रस्म” शादी से पहले की प्रमुख रस्मों में से एक होती है, जिसमें परिवार और मित्रजन मिलकर उत्सव मनाते हैं।
धार्मिक दृष्टि से भी मेहंदी का महत्व है। कई व्रत-त्योहारों में महिलाएँ मेहंदी लगाकर पूजा-अर्चना करती हैं। इसे शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। लोककथाओं और गीतों में भी मेहंदी का विशेष स्थान है, जो नारी सौंदर्य और भावनाओं को व्यक्त करती है।
मेहंदी केवल सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी हैं। आयुर्वेद के अनुसार मेहंदी शरीर को ठंडक प्रदान करती है और तनाव कम करने में सहायक होती है। यह त्वचा को मुलायम बनाती है और नाखूनों को मजबूत करती है। सिर के बालों में लगाने पर यह प्राकृतिक रंग और पोषण प्रदान करती है।
आज के समय में मेहंदी डिज़ाइनों में काफी विविधता देखने को मिलती है। पारंपरिक बेल-बूटों के साथ-साथ आधुनिक, अरबी और फ्यूज़न डिज़ाइन भी प्रचलित हैं। इस प्रकार मेहंदी न केवल सौंदर्य का माध्यम है, बल्कि भारतीय परंपरा, भावना और कला की जीवंत अभिव्यक्ति भी है।
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