JIGARTHANDA
जिगरथंडा (Jigarthanda)
जिगरथंडा भारत का एक प्रसिद्ध पारंपरिक शीतल पेय है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक में बहुत लोकप्रिय है। “जिगरथंडा” शब्द उर्दू–फ़ारसी मूल का माना जाता है, जिसका अर्थ है दिल को ठंडक देने वाला। यह नाम इसके गुणों को पूरी तरह दर्शाता है, क्योंकि यह पेय शरीर और मन दोनों को ठंडक और ताजगी प्रदान करता है।
जिगरथंडा विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में पिया जाता है। इसे दूध, बादाम गोंद (जिसे हिंदी में गोंद कतीरा भी कहा जाता है), नन्नारी सिरप (भारतीय सार्सापैरिला की जड़ से बना सिरप), चीनी और आइसक्रीम से तैयार किया जाता है। कुछ स्थानों पर इसमें केसर या इलायची भी मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध और बढ़ जाती है। इसकी बनावट गाढ़ी, ठंडी और मीठी होती है, जो इसे अन्य शीतल पेयों से अलग बनाती है।
तमिलनाडु के मदुरै शहर को जिगरथंडा का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ की गलियों में मिलने वाला पारंपरिक जिगरथंडा पूरे भारत में प्रसिद्ध है। मदुरै के स्थानीय विक्रेताओं द्वारा बनाए गए जिगरथंडा का स्वाद आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। समय के साथ यह पेय अन्य राज्यों और शहरों में भी लोकप्रिय हो गया है।
जिगरथंडा केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उपयोगी माना जाता है। बादाम गोंद शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा प्रदान करता है, जबकि दूध पोषण का अच्छा स्रोत है। यह पाचन में सहायक होता है और गर्मी से होने वाली थकान को कम करता है।
आज के समय में जिगरथंडा आधुनिक कैफे और रेस्तरां में नए रूप में भी परोसा जा रहा है, लेकिन इसका पारंपरिक स्वरूप और सांस्कृतिक महत्व आज भी बना हुआ है। यह पेय दक्षिण भारतीय खाद्य संस्कृति की एक अनूठी और स्वादिष्ट पहचान है।
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