KHINNI FRUIT
खिन्नी फल (Khinni Fruit)
खिन्नी एक प्रसिद्ध जंगली फल है, जिसे वैज्ञानिक रूप से Manilkara hexandra कहा जाता है। इसे भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे—खिन्नी, रैयन, खिरनी आदि। यह मुख्यतः मध्य भारत, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। खिन्नी का पेड़ शुष्क एवं अर्ध-शुष्क जलवायु में अच्छी तरह पनपता है और लंबे समय तक जीवित रहता है।
खिन्नी का पेड़ मध्यम से बड़े आकार का होता है। इसकी पत्तियाँ गहरे हरे रंग की और चमकदार होती हैं। इसके फूल छोटे, सफेद या हल्के पीले रंग के होते हैं। फल आकार में छोटा, गोल या अंडाकार होता है। कच्चा फल हरे रंग का होता है, जबकि पकने पर यह पीला, नारंगी या हल्का भूरा हो जाता है। इसका गूदा मुलायम, मीठा और स्वादिष्ट होता है, जबकि बीज कठोर और चमकदार होते हैं।
पोषण की दृष्टि से खिन्नी फल अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन-A व C जैसे तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे कमजोरी दूर करने वाला फल माना जाता है। आयुर्वेद में खिन्नी के फल, पत्तियों और छाल का औषधीय उपयोग भी किया जाता है। यह खाँसी, बुखार, दस्त और पेट से जुड़ी समस्याओं में सहायक माना जाता है।
खिन्नी फल का उपयोग ताजे फल के रूप में किया जाता है, साथ ही इससे लड्डू, चटनी और सूखे मेवे जैसे उत्पाद भी बनाए जाते हैं। कुछ स्थानों पर इसे धूप में सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके बीजों से तेल भी निकाला जाता है, जिसका उपयोग पारंपरिक औषधियों में होता है।
इस प्रकार खिन्नी फल न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य, औषधि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण
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