PONUNG
पोनुंग (Ponung) अरुणाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से आदि जनजाति से संबंधित है। यह नृत्य सामूहिक रूप में किया जाता है और आदि समाज की सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक जीवन तथा प्रकृति से उनके गहरे संबंध को दर्शाता है। पोनुंग नृत्य प्रायः त्योहारों, फसल कटाई के अवसरों और विशेष सामुदायिक आयोजनों में प्रस्तुत किया जाता है।
पोनुंग नृत्य की विशेषता इसकी धीमी, लयबद्ध और सुसंगठित गतियाँ हैं। इसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों भाग लेते हैं, जो गोलाकार या पंक्तिबद्ध होकर एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाते हुए नृत्य करते हैं। नृत्य के दौरान हाथों और पैरों की सरल चालें अपनाई जाती हैं, जिनमें अनुशासन और सामूहिकता का स्पष्ट संदेश मिलता है। यह नृत्य आदि समाज में एकता, सहयोग और सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है।
इस नृत्य में प्रयुक्त पारंपरिक वेशभूषा अत्यंत आकर्षक होती है। महिलाएँ रंगीन वस्त्र, पारंपरिक आभूषण और सिर पर सजावटी अलंकरण पहनती हैं, जबकि पुरुष अपने पारंपरिक परिधान और शस्त्र-सज्जा के साथ नृत्य करते हैं। ढोल, झांझ और अन्य स्थानीय वाद्ययंत्रों की ताल पर नृत्य की गति नियंत्रित होती है। गीतों में प्रकृति, वीरता, प्रेम, कृषि और आदि जनजाति के इतिहास से जुड़े विषयों का वर्णन किया जाता है।
पोनुंग नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह आदि जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। आज के समय में यह नृत्य राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक मंचों पर भी प्रस्तुत किया जाता है, जिससे अरुणाचल प्रदेश की लोकसंस्कृति को नई पहचान मिल रही है। इस प्रकार पोनुंग नृत्य भारतीय लोकनृत्य परंपरा में एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण स्थान रखता है।
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