PANGI VALLEY
पांगी घाटी
पांगी घाटी हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले में स्थित एक अत्यंत दुर्गम, सुंदर और ऐतिहासिक क्षेत्र है। यह घाटी हिमालय की ऊँची पर्वत श्रेणियों के बीच बसी हुई है और अपनी कठिन भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य तथा विशिष्ट जनजातीय संस्कृति के लिए जानी जाती है। पांगी घाटी का प्रशासनिक मुख्यालय किल्लर है, जो आसपास के गाँवों के लिए प्रमुख केंद्र का कार्य करता है।
पांगी घाटी समुद्र तल से लगभग 2,500 से 4,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ का मौसम अधिकांश समय ठंडा रहता है। सर्दियों में भारी हिमपात के कारण यह क्षेत्र कई महीनों तक शेष हिमाचल से कटा रहता है। गर्मियों में जब बर्फ पिघलती है, तब घाटी हरियाली, फूलों और बहती नदियों से जीवंत हो उठती है। चंद्रभागा (चिनाब) नदी और उसकी सहायक नदियाँ इस क्षेत्र की जीवनरेखा हैं।
पांगी घाटी के निवासी मुख्य रूप से जनजातीय समुदायों से संबंधित हैं। यहाँ के लोग सरल, साहसी और परिश्रमी माने जाते हैं। कृषि और पशुपालन यहाँ की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं। आलू, जौ, मटर और राजमा जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जबकि भेड़-बकरी पालन व्यापक रूप से किया जाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद लोग आत्मनिर्भर जीवन जीते हैं।
सांस्कृतिक दृष्टि से पांगी घाटी अत्यंत समृद्ध है। यहाँ की लोकपरंपराएँ, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा इसकी विशिष्ट पहचान हैं। त्योहारों के अवसर पर सामूहिक नृत्य-गान सामाजिक एकता को दर्शाते हैं।
हाल के वर्षों में सड़क संपर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। साथ ही, ट्रेकिंग और प्रकृति पर्यटन के कारण पांगी घाटी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है। इस प्रकार, पांगी घाटी हिमालयी जीवन, संघर्ष और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम है।
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