MCI

 मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) 

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (Medical Council of India – MCI) भारत में चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सकीय पेशे के नियमन के लिए स्थापित एक प्रमुख वैधानिक संस्था थी। इसकी स्थापना 1934 में इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1933 के अंतर्गत की गई थी। MCI का मुख्य उद्देश्य देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना और चिकित्सकों के पंजीकरण की व्यवस्था करना था।

MCI भारत भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, पोस्टग्रेजुएट और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के मानकों को निर्धारित करता था। नए मेडिकल कॉलेज खोलने, सीटों की संख्या बढ़ाने तथा पाठ्यक्रमों की मान्यता देने का अधिकार इसी संस्था के पास था। इसके अलावा यह सुनिश्चित किया जाता था कि मेडिकल संस्थान निर्धारित ढांचे, फैकल्टी और सुविधाओं के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नहीं।

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का एक महत्वपूर्ण कार्य भारतीय चिकित्सा रजिस्टर का संधारण था। इसके माध्यम से योग्य और पंजीकृत डॉक्टरों को ही चिकित्सा अभ्यास की अनुमति मिलती थी। MCI चिकित्सकीय आचार संहिता (Medical Ethics) का भी निर्धारण करता था, ताकि डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास और पारदर्शिता बनी रहे।

हालांकि, समय के साथ MCI पर भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और अक्षमता जैसे आरोप लगते रहे। इन्हीं कारणों से भारत सरकार ने वर्ष 2018 में इसे भंग कर दिया और इसके स्थान पर एक अस्थायी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया गया। बाद में 2020 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission – NMC) की स्थापना की गई, जिसने MCI का स्थान ले लिया।

यद्यपि आज MCI अस्तित्व में नहीं है, फिर भी भारतीय चिकित्सा शिक्षा के विकास में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इस संस्था ने दशकों तक चिकित्सा मानकों को बनाए रखने और डॉक्टरों के पेशे को व्यवस्थित करने में अहम योगदान दिया।

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