NAAGAD DANCE

 नागाड (Naagad) नृत्य गोवा राज्य का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो मुख्य रूप से ढोल या नगाड़े की गूंजती ताल पर आधारित होता है। “नागाड” शब्द का संबंध नगाड़े जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र से माना जाता है, जिसकी तेज और प्रभावशाली ध्वनि इस नृत्य की पहचान है। यह नृत्य प्रायः धार्मिक उत्सवों, मंदिर समारोहों, ग्रामोत्सवों और विजय अथवा उत्सव के अवसरों पर किया जाता है।

नागाड नृत्य में नर्तक ऊर्जा, शक्ति और सामूहिक समन्वय का प्रदर्शन करते हैं। इसमें अधिकतर पुरुष भाग लेते हैं, जो पंक्ति या वृत्ताकार रूप में नृत्य करते हुए तालबद्ध कदम आगे-पीछे बढ़ाते हैं। नृत्य की गति प्रारंभ में धीमी होती है, लेकिन जैसे-जैसे नगाड़े की ताल तेज होती जाती है, वैसे-वैसे नृत्य भी अधिक जोशीला और प्रभावशाली बनता जाता है। पैरों की मजबूत थाप, शरीर की सशक्त मुद्राएँ और सामूहिक तालमेल इस नृत्य की विशेषता हैं।

इस नृत्य में संगीत और वाद्ययंत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। नगाड़ा, ढोल, ताशा और कभी-कभी शहनाई जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है। नगाड़े की गूंजती ध्वनि न केवल नर्तकों को उत्साहित करती है, बल्कि दर्शकों में भी जोश और उल्लास भर देती है। संगीत की ताल के अनुसार नर्तक अपनी गति और मुद्राओं में परिवर्तन करते हैं।

पारंपरिक वेशभूषा नागाड नृत्य की गरिमा को और बढ़ा देती है। नर्तक सामान्यतः धोती, कमरबंद और सिर पर साफा या पगड़ी धारण करते हैं। कुछ स्थानों पर रंगीन पट्टियाँ और पारंपरिक आभूषण भी पहने जाते हैं, जो स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।

समग्र रूप से, नागाड नृत्य गोवा की लोकपरंपरा, सामुदायिक उत्साह और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त प्रतीक है। यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि सामूहिक ऊर्जा, अनुशासन और परंपरा के प्रति सम्मान को भी अभिव्यक्त करता है।

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