DOLERA DANCE

डोलेरा (Dolera) नृत्य गोवा राज्य का एक पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से ग्रामीण समाज में प्रचलित है। यह नृत्य सामूहिक आनंद, सामाजिक मेल-जोल और पारंपरिक जीवनशैली की अभिव्यक्ति करता है। डोलेरा नृत्य सामान्यतः फसल कटाई के बाद, ग्रामोत्सवों, धार्मिक पर्वों और सामुदायिक समारोहों में प्रस्तुत किया जाता है।

डोलेरा नृत्य की संरचना सरल किंतु आकर्षक होती है। इसमें पुरुष और महिलाएँ एक साथ वृत्ताकार या पंक्तिबद्ध होकर नृत्य करते हैं। नृत्य की गति संतुलित और लयात्मक होती है, जिसमें पैरों की तालबद्ध चाल, शरीर की हल्की झुकाव वाली मुद्राएँ और हाथों की सुसंगत गतियाँ शामिल होती हैं। यह नृत्य व्यक्तिगत प्रदर्शन की बजाय सामूहिक समन्वय और एकता पर केंद्रित होता है, जिससे समुदाय के बीच सहयोग और भाईचारे की भावना प्रबल होती है।

इस नृत्य में प्रयुक्त संगीत और वाद्ययंत्र स्थानीय लोकसंस्कृति से जुड़े होते हैं। ढोल, मृदंग, ताशा और मंजीरा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र नृत्य की ताल निर्धारित करते हैं। कई बार नृत्य के साथ लोकगीत भी गाए जाते हैं, जिनमें प्रकृति, कृषि, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक मिलती है। गीतों की सरलता और लय दर्शकों को भी नृत्य की ऊर्जा से जोड़ देती है।

पारंपरिक वेशभूषा डोलेरा नृत्य की सुंदरता को और बढ़ाती है। पुरुष आमतौर पर धोती, कुर्ता और सिर पर साफा या पगड़ी पहनते हैं, जबकि महिलाएँ रंगीन साड़ियाँ, ब्लाउज और पारंपरिक आभूषण धारण करती हैं। इन परिधानों में स्थानीय कढ़ाई और रंगों का विशेष महत्व होता है।

कुल मिलाकर, डोलेरा नृत्य गोवा की लोकसंस्कृति, सामाजिक एकता और पारंपरिक उल्लास का प्रतीक है। यह नृत्य न केवल मनोरंजन प्रदान करता है, बल्कि सामुदायिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता 

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