MAA PURNAGIRI TEMPLE
माँ पूर्णागिरि मंदिर
माँ पूर्णागिरि मंदिर उत्तराखंड राज्य के चंपावत जनपद में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर भारत–नेपाल सीमा के निकट, टनकपुर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पूर्णागिरि पर्वत की चोटी पर अवस्थित है। माँ पूर्णागिरि को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और यहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूर-दूर से आते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि सती के शरीर का एक अंग यहाँ गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र बन गया। “पूर्णागिरि” शब्द का अर्थ है — वह पर्वत जहाँ पूर्णता की प्राप्ति होती है। इसलिए भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहाँ अवश्य पूर्ण होती है।
मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी मार्ग से होकर जाना पड़ता है। नीचे से ऊपर तक पैदल यात्रा का विशेष महत्व है, हालाँकि वर्तमान समय में सड़क और अन्य सुविधाएँ भी विकसित की गई हैं। मार्ग में सुंदर प्राकृतिक दृश्य, घने वन और पहाड़ी वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं।
माँ पूर्णागिरि मंदिर में चैत्र नवरात्रि के समय विशेष मेले का आयोजन होता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भक्त माँ को नारियल, चुनरी, लाल वस्त्र और प्रसाद अर्पित करते हैं। यहाँ बलि प्रथा भी प्रचलित रही है, हालाँकि अब प्रतीकात्मक पूजा को अधिक महत्व दिया जाता है।
यह मंदिर केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों की आस्था, आजीविका और परंपराएँ इस मंदिर से जुड़ी हुई हैं। नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन हेतु आते हैं।
इस प्रकार माँ पूर्णागिरि मंदिर श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। हिमालय की गोद में स्थित यह शक्तिपीठ भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और मन की शांति प्रदान करता है।
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