CHERAW DANCE

 चेराव नृत्य (Cheraw Dance)

चेराव नृत्य भारत के मिज़ोरम राज्य का एक प्रसिद्ध और विशिष्ट लोक नृत्य है, जिसे सामान्यतः बांस नृत्य के नाम से भी जाना जाता है। यह नृत्य मिज़ो जनजाति की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चेराव नृत्य का इतिहास बहुत प्राचीन माना जाता है और प्रारंभ में इसे धार्मिक एवं अनुष्ठानिक अवसरों पर किया जाता था। समय के साथ यह सामाजिक और उत्सवधर्मी नृत्य के रूप में लोकप्रिय हो गया।

चेराव नृत्य की सबसे अनोखी विशेषता बांस की लंबी छड़ों का प्रयोग है। ज़मीन पर रखी गई दो या अधिक बांस की छड़ें लय के अनुसार खोली और बंद की जाती हैं। नर्तक-नर्तकियाँ इन चलती हुई छड़ों के बीच फुर्ती और तालमेल के साथ कदम रखते हैं। थोड़ी सी चूक चोट का कारण बन सकती है, इसलिए यह नृत्य उच्च कौशल, संतुलन और अभ्यास की माँग करता है।

इस नृत्य में प्रायः महिलाएँ मुख्य नर्तक होती हैं, जबकि पुरुष बांस की छड़ों को पकड़कर ताल देते हैं। नर्तकियाँ पारंपरिक मिज़ो परिधान पहनती हैं, जिनमें रंगीन वस्त्र और आकर्षक डिज़ाइन होते हैं। उनके कदमों की लय बांस की छड़ों की ताल के साथ पूरी तरह समन्वित रहती है।

चेराव नृत्य के साथ ढोल और पारंपरिक लोक संगीत बजाया जाता है। संगीत की गति नृत्य की तीव्रता को नियंत्रित करती है। गीतों में प्रकृति, जीवन और समुदाय की भावना झलकती है।

चेराव नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग और अनुशासन का प्रतीक है। आज यह नृत्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिज़ोरम की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है और भारतीय लोक नृत्यों की विविधता को उजागर करता है।

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