GIDHA
गिद्धा नृत्य (Giddha Dance)
गिद्धा पंजाब का एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय लोक नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से महिलाएँ प्रस्तुत करती हैं। यह नृत्य पंजाबी संस्कृति की जीवंतता, उल्लास और नारी सशक्तिकरण का सुंदर प्रतीक माना जाता है। गिद्धा प्रायः तीज, लोहड़ी, बैसाखी, विवाह और अन्य पारिवारिक व सामाजिक उत्सवों के अवसर पर किया जाता है। इसमें महिलाओं की सामूहिक भागीदारी, तालमेल और आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
गिद्धा नृत्य की विशेष पहचान इसकी बोलियाँ होती हैं। ये छोटी-छोटी तुकबंदी वाली लोक पंक्तियाँ होती हैं, जिनमें हास्य, व्यंग्य, प्रेम, सामाजिक विषय और दैनिक जीवन की झलक मिलती है। नृत्य के दौरान महिलाएँ गोल घेरा बनाकर ताली बजाते हुए बोलियाँ गाती हैं और लयबद्ध गतियों के साथ नृत्य करती हैं। ढोल का प्रयोग बहुत सीमित होता है या कभी-कभी बिल्कुल नहीं किया जाता, क्योंकि तालियाँ ही इसकी मुख्य लय बनाती हैं।
गिद्धा की वेशभूषा अत्यंत आकर्षक होती है। महिलाएँ रंगीन सलवार-कमीज़, फुलकारी दुपट्टा, पारांदी, चूड़ियाँ और पारंपरिक आभूषण पहनती हैं। चेहरे के भाव, आँखों की चंचलता और हाथों की मुद्राएँ नृत्य को और अधिक प्रभावशाली बनाती हैं। इसकी मुद्राएँ सरल लेकिन उत्साह से भरी होती हैं।
सांस्कृतिक दृष्टि से गिद्धा नृत्य महिलाओं को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का मंच प्रदान करता है। यह सामाजिक बंधनों, रिश्तों और जीवन के अनुभवों को गीत और नृत्य के माध्यम से सामने लाता है। आज गिद्धा नृत्य न केवल पंजाब, बल्कि पूरे भारत और विदेशों में पंजाबी समुदाय की पहचान बन चुका है। यह लोक नृत्य पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
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