JHANGORA
झंगोरा (सांवा/सामक)
झंगोरा एक प्राचीन और पौष्टिक मोटा अनाज है, जिसे भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे उत्तर भारत में झंगोरा, सांवा या सामक चावल कहा जाता है, जबकि अंग्रेज़ी में इसे Barnyard Millet कहा जाता है। यह अनाज विशेष रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में उगाया जाता है। झंगोरा कम समय में पकने वाली फसल है और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है, इसलिए यह पहाड़ी और शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
पोषण की दृष्टि से झंगोरा अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त आहार है। झंगोरा पचने में हल्का होता है और पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, गैस और एसिडिटी में भी लाभ देता है।
भारत में झंगोरा का विशेष महत्व व्रत और उपवास के भोजन में है। नवरात्रि, एकादशी और महाशिवरात्रि जैसे उपवासों में इससे खीर, पुलाव, खिचड़ी और कटलेट बनाए जाते हैं। उत्तराखंड में झंगोरे की खीर एक पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजन है, जिसे दूध और गुड़ या चीनी से तैयार किया जाता है।
कृषि के दृष्टिकोण से झंगोरा पर्यावरण-अनुकूल फसल है। यह कम उर्वरक और कीटनाशकों में भी उग जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। आज के समय में जब लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, तब झंगोरा जैसे मोटे अनाजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस प्रकार झंगोरा न केवल पोषण का स्रोत है, बल्कि किसानों की आय और सतत कृषि के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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