FANDO AND DANDIO
फांडो और डांडियो नृत्य गोवा राज्य के प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य हैं। ये दोनों नृत्य गोवा की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक जीवन और ऐतिहासिक परंपराओं को अभिव्यक्त करते हैं। जहाँ फांडो नृत्य वीरता और युद्धक परंपराओं से जुड़ा है, वहीं डांडियो नृत्य आनंद, उत्साह और सामूहिक उल्लास का प्रतीक माना जाता है।
फांडो नृत्य मुख्यतः गोवा के हिंदू समुदाय द्वारा किया जाने वाला एक पुरुष प्रधान नृत्य है। इसका प्रदर्शन प्रायः धार्मिक पर्वों, मंदिर उत्सवों और विशेष अवसरों पर किया जाता है। यह नृत्य युद्ध की तैयारी, वीरता और अनुशासन को दर्शाता है। फांडो नृत्य में नर्तक पंक्तियों या वृत्त में खड़े होकर लयबद्ध और सशक्त कदमों के साथ आगे-पीछे की गतियाँ करते हैं। इसमें ढोल, नगाड़े और शहनाई जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। संगीत की तेज ताल नर्तकों में जोश भर देती है। नर्तक पारंपरिक धोती, कमरबंद और सिर पर पगड़ी धारण करते हैं, जो मराठा और कोंकणी संस्कृति का प्रभाव दर्शाते हैं।
दूसरी ओर, डांडियो नृत्य गोवा का एक लोकप्रिय और आनंदमय लोकनृत्य है, जिसे प्रायः समूह में किया जाता है। यह नृत्य डांडिया या लकड़ी की छड़ियों के साथ प्रस्तुत किया जाता है, जिनकी टकराहट से ताल और लय उत्पन्न होती है। डांडियो नृत्य त्योहारों, मेलों और सामाजिक समारोहों में विशेष रूप से किया जाता है। इसमें पुरुष और महिलाएँ रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र पहनकर वृत्ताकार या जोड़ी में नृत्य करते हैं। नृत्य के दौरान तालमेल, फुर्ती और सामूहिक समन्वय का सुंदर प्रदर्शन होता है।
फांडो और डांडियो दोनों नृत्य गोवा की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत जीवनशैली को दर्शाते हैं। ये नृत्य न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि गोवा की लोकसंस्कृति को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण साधन भी हैं।
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