KATKI

 कटकी (Katki) 

कटकी भारत में उगाया जाने वाला एक प्राचीन और पौष्टिक मोटा अनाज है, जिसे अंग्रेज़ी में Kodo Millet कहा जाता है। इसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। मध्य भारत और उत्तर भारत में इसे कटकी या कोदो कहा जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इसे अरिकलु, वरगु या हरका के नाम से भी जाना जाता है। कटकी मुख्यतः मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उगाई जाती है।

कटकी की फसल कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी तरह उग जाती है। यह कम समय में पकने वाली फसल है और इसे अधिक उर्वरक या कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी फसल मानी जाती है। पर्यावरण की दृष्टि से भी कटकी एक टिकाऊ और अनुकूल अनाज है।

पोषण के लिहाज से कटकी अत्यंत लाभकारी है। इसमें प्रचुर मात्रा में आहार फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। कटकी में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यह वजन नियंत्रित रखने और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।

भारतीय भोजन में कटकी का पारंपरिक महत्व रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे खिचड़ी, दलिया, उपमा, पुलाव और रोटी बनाई जाती है। कई आदिवासी समुदायों के दैनिक आहार में कटकी का विशेष स्थान है। व्रत और उपवास के दौरान भी कुछ क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जाता है।

वर्तमान समय में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण कटकी जैसे मोटे अनाजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सरकार द्वारा भी “श्री अन्न” अभियान के अंतर्गत मोटे अनाजों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस प्रकार कटकी न केवल पोषण का समृद्ध स्रोत है, बल्कि सतत कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण अनाज है।

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