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Showing posts from January, 2026

FOLK DANCE OF AFRICA

 अफ्रीका के लोक नृत्य अफ्रीका का लोक नृत्य वहाँ की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक जीवन और आध्यात्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह महाद्वीप विविध जनजातियों, भाषाओं और रीति-रिवाजों से समृद्ध है, और यही विविधता उसके लोक नृत्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अफ्रीकी लोक नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समुदाय की भावनाओं, इतिहास और विश्वासों को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी हैं। अफ्रीकी लोक नृत्यों में शरीर की गतिशीलता, लयबद्ध कदम, कंधों और कमर की तीव्र हलचल प्रमुख होती है। ढोल, ड्रम, जेम्बे और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ताल पर नर्तक सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं। नृत्य के दौरान गायक, वादक और नर्तक आपस में संवाद करते हैं, जिससे एक जीवंत और ऊर्जावान वातावरण बनता है। कई नृत्य धार्मिक अनुष्ठानों, वर्षा की कामना, फसल उत्सव, विवाह और जन्म जैसे अवसरों से जुड़े होते हैं। अफ्रीका के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में दक्षिण अफ्रीका का गमबूट डांस, पश्चिमी अफ्रीका का जेम्बे डांस, केन्या और तंज़ानिया का अडुमु (मसाई जम्पिंग डांस) तथा इथियोपिया का एस्किस्ता प्रमुख हैं। इन नृत्यों में पारंप...

ORNAMENTS

 आभूषण (Ornaments) आभूषण मानव सभ्यता का एक अभिन्न अंग रहे हैं। प्राचीन काल से ही लोग शरीर की सजावट के लिए विभिन्न प्रकार के आभूषणों का प्रयोग करते आए हैं। आभूषण न केवल सौंदर्य बढ़ाते हैं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व भी रखते हैं। भारत में आभूषणों को विशेष स्थान प्राप्त है और इन्हें परंपरा, धर्म तथा रीति-रिवाजों से गहराई से जोड़ा जाता है। भारत में आभूषणों का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वैदिक काल तक सोने, चांदी, तांबे और कीमती पत्थरों से बने आभूषणों के प्रमाण मिलते हैं। विभिन्न कालखंडों में आभूषणों की शैली और डिजाइन में परिवर्तन होता रहा, लेकिन उनका महत्व कभी कम नहीं हुआ। आज भी विवाह, त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर आभूषण पहनना शुभ माना जाता है। आभूषणों के प्रकार बहुत विविध हैं। इनमें हार, अंगूठी, कंगन, चूड़ियाँ, झुमके, पायल, नथ, मांग टीका और कमरबंध प्रमुख हैं। ये आभूषण सोना, चांदी, प्लेटिनम, हीरे, मोती और अन्य रत्नों से बनाए जाते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में आभूषणों की विशिष्ट शैलियाँ देखने को मिलती हैं, जैसे राजस्थान के कुंदन आभूषण, दक्षिण भा...

BANGLES

 चूड़ियाँ (Bangles) चूड़ियाँ भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण आभूषण हैं। इन्हें प्रायः कलाई में पहना जाता है और ये सौंदर्य, सौभाग्य तथा नारीत्व का प्रतीक मानी जाती हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में चूड़ियों के अलग-अलग रूप, रंग और परंपराएँ देखने को मिलती हैं। विवाहित महिलाओं के लिए चूड़ियाँ पहनना शुभ माना जाता है और कई क्षेत्रों में यह सुहाग की निशानी होती हैं। प्राचीन काल से ही चूड़ियों का प्रयोग होता आ रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाइयों में भी चूड़ियों के अवशेष मिले हैं, जिससे इनके ऐतिहासिक महत्व का पता चलता है। पहले चूड़ियाँ मिट्टी, शंख, तांबे और कांच से बनाई जाती थीं, जबकि आजकल सोना, चांदी, लाख, प्लास्टिक, फाइबर और रत्नों से सजी आकर्षक चूड़ियाँ भी प्रचलन में हैं। बदलते समय के साथ इनके डिज़ाइन और शैली में भी काफी विविधता आई है। चूड़ियों का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है। त्योहारों, विवाह, करवा चौथ, तीज और अन्य मांगलिक अवसरों पर महिलाएँ विशेष रूप से चूड़ियाँ पहनती हैं। उत्तर भारत में लाल और हरी चूड़ियाँ लोकप्रिय हैं, वहीं राजस्थान की लाख की चूड़ियाँ और हैदराबाद की क...

DEVI SUBHADRA

 देवी सुभद्रा – परिचय और महत्व देवी सुभद्रा हिंदू धर्म में पूजनीय देवी हैं और भगवान श्रीकृष्ण तथा बलराम की बहन मानी जाती हैं। उनका जन्म रोहिणी देवी की कोख से हुआ था। सुभद्रा को सौम्यता, करुणा और मंगल का प्रतीक माना जाता है। वे विशेष रूप से ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के साथ विराजमान हैं, जहाँ उनकी पूजा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। महाभारत काल में देवी सुभद्रा का विशेष स्थान है। उनका विवाह अर्जुन से हुआ था, जो भगवान कृष्ण के प्रिय मित्र और पांडवों में से एक थे। सुभद्रा और अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु महाभारत युद्ध के महान वीर थे। अभिमन्यु की वीरता और बलिदान सुभद्रा के मातृत्व और संस्कारों की महिमा को दर्शाते हैं। देवी सुभद्रा को शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। वे नारी शक्ति के सौम्य रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहाँ धैर्य, प्रेम और त्याग का भाव प्रमुख है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुभद्रा की उपासना से पारिवारिक सुख, संतुलन और समृद्धि प्राप्त होती है। पुरी की रथ यात्रा में देवी सुभद्रा की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। ...

RATH YATRA OF PURI

 पुरी की रथ यात्रा पुरी की रथ यात्रा भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक उत्सवों में से एक है। यह यात्रा ओडिशा राज्य के पुरी नगर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुँचते हैं। रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण तीन विशाल रथ होते हैं, जिनका निर्माण हर वर्ष नए सिरे से किया जाता है। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, बलभद्र का रथ तालध्वज और देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन कहलाता है। ये रथ लकड़ी से बनाए जाते हैं और रंग-बिरंगे कपड़ों, चित्रों और प्रतीकों से सजाए जाते हैं। श्रद्धालु रस्सियों के सहारे इन रथों को खींचते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने मुख्य मंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। यहाँ वे कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं और फिर बहुड़ा यात्रा के माध्यम से वापस अपने मंदिर लौटते हैं। मान्यता है कि इस यात्रा में भाग लेने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प...

FAMOUS SANTOOR PLAYERS

 भारत में संतूर वादन को लोकप्रिय और प्रतिष्ठित बनाने में कई महान कलाकारों का योगदान रहा है। भारत के प्रमुख प्रसिद्ध संतूर वादक निम्नलिखित हैं— भारत के प्रसिद्ध संतूर वादक 1. पंडित शिवकुमार शर्मा पंडित शिवकुमार शर्मा भारत के सबसे प्रसिद्ध संतूर वादक माने जाते हैं। उन्होंने संतूर को लोक वाद्य से उठाकर शास्त्रीय संगीत के मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। उनकी वादन शैली, राग प्रस्तुति और नवाचारों ने संतूर को वैश्विक पहचान दिलाई। 2. राहुल शर्मा राहुल शर्मा पंडित शिवकुमार शर्मा के पुत्र हैं और आधुनिक संतूर वादन के प्रमुख कलाकार हैं। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ फ्यूज़न संगीत में भी संतूर को नई पहचान दी है। 3. भजन सोपोरी पंडित भजन सोपोरी कश्मीर के प्रसिद्ध संतूर वादक थे। उन्होंने सूफी और कश्मीरी लोक संगीत को संतूर के माध्यम से प्रस्तुत किया और संतूर परंपरा को समृद्ध किया। 4. तरुण भट्टाचार्य पंडित तरुण भट्टाचार्य संतूर वादन के एक प्रमुख नाम हैं। उनकी शैली में गहराई, तकनीकी कुशलता और रागों की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। 5. देवेंद्र शर्मा देवेंद्र शर्मा संतूर वादन के वरिष्ठ कलाका...

SHIV KUMAR SHARMA

 पंडित शिवकुमार शर्मा – जीवन और संगीत योगदान पंडित शिवकुमार शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान संतूर वादक थे। उनका जन्म 13 जनवरी 1938 को जम्मू (तत्कालीन जम्मू-कश्मीर) में हुआ। उन्होंने संतूर जैसे लोक वाद्य को भारतीय शास्त्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाकर उसे एकल वादन के योग्य बनाया। उनके पिता पंडित उमा दत्त शर्मा स्वयं एक विद्वान संगीतज्ञ थे, जिनके मार्गदर्शन में शिवकुमार शर्मा ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। शिवकुमार शर्मा ने कम आयु में ही संतूर वादन का गहन अभ्यास आरंभ कर दिया था। उन्होंने संतूर के तारों की संख्या और वादन शैली में नवाचार कर इसे शास्त्रीय संगीत के अनुकूल बनाया। उनकी वादन शैली में माधुर्य, लयात्मकता और रागों की स्पष्टता प्रमुख रही। उनके संतूर से निकलने वाले स्वर श्रोताओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते थे। उन्होंने देश-विदेश में अनेक प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी और भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। पंडित शिवकुमार शर्मा ने कई पश्चिमी संगीतकारों के साथ भी प्रयोग किए, जिससे भारतीय संगीत का वैश्विक विस्तार हुआ। उनके सुपुत्र राहु...

HARI PRASAD CHAURASIA

 हरिप्रसाद चौरसिया – जीवन और योगदान पंडित हरिप्रसाद चौरसिया भारतीय शास्त्रीय संगीत के विश्वविख्यात बांसुरी वादक हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1938 को इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रारंभिक जीवन में उन्हें संगीत के प्रति विशेष प्रोत्साहन नहीं मिला, फिर भी उनकी लगन और साधना ने उन्हें ऊँचाइयों तक पहुँचाया। किशोरावस्था में उन्होंने पहले कुश्ती का अभ्यास किया, किंतु बाद में संगीत के प्रति उनका रुझान गहराता गया और उन्होंने बांसुरी को अपना जीवन समर्पित कर दिया। हरिप्रसाद चौरसिया ने प्रारंभ में पंडित राजाराम से बांसुरी की शिक्षा ली, तत्पश्चात महान संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा के पिता पंडित उमा दत्त शर्मा से मार्गदर्शन प्राप्त किया। आगे चलकर उन्होंने बनारस घराने के प्रसिद्ध गायक पंडित बृजभूषण कबरा से संगीत की सूक्ष्मताओं को आत्मसात किया। उनकी शैली में रागों की शुद्धता, मधुरता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष पहचान दिलाई। देश-विदेश में उनके असंख्य कार्यक्रम हुए और उन्होंने पश्चिमी संगीतकारों के साथ भ...

A MEETING BY THE RIVER

 “ए मीटिंग बाय द रिवर” – परिचय और महत्व  “ए मीटिंग बाय द रिवर” (A Meeting by the River) एक विश्वप्रसिद्ध संगीत एल्बम है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी ब्लूज़–जैज़ परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यह एल्बम वर्ष 1993 में रिकॉर्ड किया गया और 1994 में इसे सर्वश्रेष्ठ वर्ल्ड म्यूज़िक एल्बम के लिए ग्रैमी पुरस्कार प्रदान किया गया। इस एल्बम के मुख्य कलाकार भारतीय स्लाइड गिटार वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट और अमेरिकी गिटारिस्ट राइ कूडर (Ry Cooder) हैं। इस एल्बम की रिकॉर्डिंग भारत में एक शांत नदी के किनारे स्थित आश्रम जैसे वातावरण में की गई थी, जिससे इसका नाम “ए मीटिंग बाय द रिवर” पड़ा। इस शांत प्राकृतिक परिवेश ने संगीत को गहराई, सहजता और आध्यात्मिकता प्रदान की। एल्बम में प्रयुक्त वाद्य यंत्रों में मोहन वीणा, स्लाइड गिटार और अन्य तंत्री वाद्य शामिल हैं। एल्बम की विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की बनावटी सजावट या आधुनिक तकनीकी प्रभावों का अधिक प्रयोग नहीं किया गया। संगीत पूर्णतः राग आधारित, तात्कालिक (इम्प्रोवाइज़्ड) और संवादात्मक है, जहाँ दोनों कलाकार एक-दूसरे के सुरों ...

MOHAN VEENA

 मोहन वीणा – परिचय और महत्व मोहन वीणा भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अनूठा वाद्य यंत्र है, जिसे प्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित विश्व मोहन भट्ट ने विकसित किया। यह मूल रूप से पश्चिमी स्लाइड गिटार पर आधारित है, लेकिन इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत की आवश्यकताओं के अनुसार कई तकनीकी और संरचनात्मक परिवर्तन किए गए हैं। मोहन वीणा का उद्देश्य गिटार पर भारतीय रागों की शुद्ध और भावपूर्ण प्रस्तुति को संभव बनाना है। मोहन वीणा में कुल 19 से 21 तार होते हैं। इनमें मुख्य बजाने वाले तार, सहायक तार और तरंग (सिम्पैथेटिक) तार शामिल होते हैं। ये तरंग तार राग के अनुसार स्वतः गूंज उत्पन्न करते हैं, जिससे वादन में गहराई और मधुरता आती है। इसे गोद में रखकर बजाया जाता है और उंगलियों की बजाय धातु या कांच की स्लाइड से तारों पर मींड निकाली जाती है, जो भारतीय संगीत की विशेष पहचान है। इस वाद्य यंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गमक, मींड, मुरकी और आलाप जैसी शास्त्रीय तकनीकों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। यही कारण है कि मोहन वीणा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इ...

VISHWA MOHAN BHATT

 विश्व मोहन भट्ट – जीवन और योगदान  विश्व मोहन भट्ट भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ और विश्वविख्यात स्लाइड गिटार वादक हैं। उनका जन्म 11 जुलाई 1952 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। वे महान सितार वादक पंडित रविशंकर से संगीत की प्रेरणा पाने वाले परिवार से आते हैं। विश्व मोहन भट्ट ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पश्चिमी वाद्य यंत्र गिटार के माध्यम से नई पहचान दिलाई। उन्होंने पारंपरिक स्पेनिश गिटार में तकनीकी बदलाव कर एक नया वाद्य यंत्र विकसित किया, जिसे “मोहन वीणा” कहा जाता है। इस वाद्य में अतिरिक्त तार और विशेष संरचना होती है, जिससे रागों की शुद्ध अभिव्यक्ति संभव हो पाती है। मोहन वीणा के माध्यम से उन्होंने मींड, गमक और अन्य भारतीय शास्त्रीय अलंकारों को गिटार पर सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। विश्व मोहन भट्ट ने देश-विदेश में अनेक संगीत कार्यक्रम किए हैं और भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई है। वर्ष 1994 में अमेरिकी जैज़ गिटारिस्ट राइ कूडर (Ry Cooder) के साथ उनके एल्बम “A Meeting by the River” को ग्रैमी पुरस्कार मिला। यह उपलब्धि भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए ऐतिहासिक मानी...

GQG PARTNERS

 GQG Partners एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की निवेश प्रबंधन (Investment Management) कंपनी है, जो मुख्य रूप से इक्विटी निवेश पर केंद्रित है। इस कंपनी की स्थापना वर्ष 2016 में प्रसिद्ध निवेश विशेषज्ञ राजीव जैन (Rajiv Jain) द्वारा की गई थी। GQG का मुख्यालय अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थित है, जबकि इसके कार्यालय दुनिया के कई प्रमुख वित्तीय केंद्रों में मौजूद हैं। GQG Partners का पूरा नाम Global Quality Growth (GQG) है, जो इसके निवेश दर्शन को दर्शाता है। कंपनी उन कंपनियों में निवेश करती है जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो, प्रबंधन कुशल हो और दीर्घकालिक विकास की संभावना अधिक हो। GQG का मानना है कि गुणवत्ता (Quality) और सतत विकास (Growth) के संयोजन से निवेशकों को लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिल सकता है। यह कंपनी उभरते बाजारों (Emerging Markets), विकसित बाजारों (Developed Markets) और वैश्विक इक्विटी फंड्स में निवेश करती है। GQG Partners का निवेश दृष्टिकोण रिसर्च-आधारित होता है, जिसमें आर्थिक नीतियों, वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों, कंपनी के मूलभूत कारकों और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है...

VANGUARD GROUP

 वैनगार्ड (Vanguard Group) का परिचय वैनगार्ड ग्रुप (Vanguard Group) विश्व की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित निवेश प्रबंधन कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1975 में प्रसिद्ध निवेशक जॉन सी. बोगल (John C. Bogle) द्वारा की गई थी। वैनगार्ड का मुख्यालय अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के मालवर्न (Malvern) शहर में स्थित है। यह कंपनी मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF), पेंशन फंड और अन्य निवेश सेवाएँ प्रदान करती है। वैनगार्ड को कम लागत (Low Cost Investing) के लिए जाना जाता है। कंपनी का मानना है कि निवेशकों को लंबे समय में बेहतर रिटर्न तभी मिल सकता है जब निवेश की लागत कम रखी जाए। इसी सोच के तहत वैनगार्ड ने इंडेक्स फंड की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया। इंडेक्स फंड वे फंड होते हैं जो किसी शेयर बाजार सूचकांक, जैसे S&P 500, को फॉलो करते हैं और सक्रिय ट्रेडिंग से बचते हैं। वैनगार्ड की सबसे बड़ी खासियत इसका यूनिक ओनरशिप मॉडल है। यह कंपनी अपने निवेशकों के स्वामित्व में है, यानी इसके म्यूचुअल फंड निवेशक ही अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी के मालिक होते हैं। इस कारण वैनगार्ड का फोकस मुनाफा क...

NANDMURI BALKRISHNA

 नंदमुरी बालकृष्ण (Nandamuri Balakrishna) नंदमुरी बालकृष्ण दक्षिण भारतीय सिनेमा, विशेषकर तेलुगु फिल्म उद्योग के एक प्रसिद्ध अभिनेता और राजनेता हैं। उनका जन्म 10 जून 1960 को तमिलनाडु के चेन्नई में हुआ था। वे महान अभिनेता और तेलुगु सिनेमा के दिग्गज एन. टी. रामाराव (एनटीआर) के पुत्र हैं। बालकृष्ण को उनके प्रशंसक स्नेहपूर्वक “बालैया” या “बालैया बाबू” के नाम से जानते हैं। बालकृष्ण ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी। बाद में उन्होंने नायक के रूप में अनेक सफल फिल्मों में अभिनय किया। उनकी फिल्मों में पौराणिक, ऐतिहासिक और एक्शन भूमिकाएँ विशेष रूप से लोकप्रिय रही हैं। “समर सिंह रेड्डी”, “नरसिंह नायडू”, “सिंहम्मा नायडू”, “लक्ष्मी नरसिम्हा”, “अखंडा” और “वीर सिम्हा रेड्डी” जैसी फिल्में उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ मानी जाती हैं। उनकी दमदार संवाद अदायगी और ऊर्जावान अभिनय शैली दर्शकों को खासा आकर्षित करती है। फिल्मों के अलावा नंदमुरी बालकृष्ण सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे हैदराबाद स्थित बसवतारकम इंडो-अमेरिकन कैंसर अस्पताल के चेयरमैन हैं, जो उनकी ...

SCUBA DIVING

 स्कूबा डाइविंग (Scuba Diving) स्कूबा डाइविंग एक रोमांचक जलक्रीड़ा है, जिसमें व्यक्ति विशेष उपकरणों की सहायता से समुद्र या अन्य जलाशयों के भीतर जाकर वहाँ की दुनिया को नजदीक से देख सकता है। “स्कूबा” शब्द का पूरा रूप Self Contained Underwater Breathing Apparatus है, जिसका अर्थ है—स्वतंत्र जल-श्वसन उपकरण। इसकी मदद से गोताखोर पानी के अंदर सांस ले सकता है और लंबे समय तक रह सकता है। स्कूबा डाइविंग के लिए कुछ विशेष उपकरण आवश्यक होते हैं, जैसे—ऑक्सीजन सिलेंडर, रेगुलेटर, मास्क, फिन्स, वेटसूट और बुआयेंसी कंट्रोल डिवाइस। ये सभी उपकरण गोताखोर की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाए गए हैं। डाइविंग से पहले उचित प्रशिक्षण लेना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि पानी के अंदर दबाव, श्वसन और संकेतों को समझना आवश्यक है। स्कूबा डाइविंग का सबसे बड़ा आकर्षण समुद्र के भीतर की अद्भुत जैव-विविधता है। रंग-बिरंगी मछलियाँ, प्रवाल भित्तियाँ (कोरल रीफ), समुद्री कछुए और अन्य जलजीव गोताखोरों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। भारत में अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, गोवा और केरल जैसे स्थान स्कूबा डाइविंग के लिए प्रसिद्ध हैं। यह ...

SHANKARACHARYA AVIMUKTESHWARANAND

 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी हिंदू धर्म के एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु, विद्वान संत और सनातन परंपरा के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि हैं। वे उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ, बद्रीनाथ के शंकराचार्य हैं। अद्वैत वेदांत की परंपरा में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वे जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित शंकराचार्य परंपरा के उत्तराधिकारी हैं और वेद, उपनिषद, गीता तथा धर्मशास्त्रों के गहन ज्ञाता हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी का जन्म एक धार्मिक परिवार में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म, साधना और शास्त्र अध्ययन की ओर रहा। उन्होंने गुरु परंपरा के अंतर्गत वेदांत, संस्कृत व्याकरण, मीमांसा और दर्शन का विधिवत अध्ययन किया। कठोर तपस्या, ब्रह्मचर्य और संयमपूर्ण जीवन के कारण वे संत समाज में शीघ्र ही सम्मानित हुए। वे सनातन धर्म की मूल मान्यताओं, गौ-रक्षा, वैदिक संस्कृति, सामाजिक नैतिकता और राष्ट्र के सांस्कृतिक मूल्यों के प्रबल समर्थक हैं। शंकराचार्य जी समय-समय पर सामाजिक और धार्मिक विषयों पर स्पष्ट एवं निर्भीक विचार रखते हैं। वे मानते हैं कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य,...

MSEI

 एमएसईआई (MSEI) – मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया एमएसईआई (Metropolitan Stock Exchange of India) भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय स्तर का स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी और यह भारत में प्रतिभूति बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया। पहले इसे एमसीएक्स-एसएक्स (MCX-SX) के नाम से जाना जाता था, बाद में इसका नाम बदलकर मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया कर दिया गया। एमएसईआई का मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है। यह एक्सचेंज सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) द्वारा मान्यता प्राप्त है और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर आधारित है। एमएसईआई में करेंसी डेरिवेटिव्स, इक्विटी डेरिवेटिव्स, इक्विटी कैश सेगमेंट और डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे विभिन्न वित्तीय उत्पादों में कारोबार की सुविधा उपलब्ध है। एमएसईआई की एक प्रमुख विशेषता इसका एसएक्स40 (SX40) इंडेक्स है। यह सूचकांक भारतीय अर्थव्यवस्था के 40 मजबूत और बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है। एसएक्स40 को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह बाजार की वास्तविक स्थिति...

TARANTELLA

 टारंटेला (Tarantella) नृत्य टारंटेला इटली का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति दक्षिणी इटली में हुई। यह नृत्य अपने तेज़, ऊर्जावान और जीवंत स्वरूप के लिए जाना जाता है। टारंटेला मुख्य रूप से खुशी, उत्सव और सामाजिक मेल-जोल के अवसरों पर किया जाता है और यह इटालियन लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। टारंटेला आमतौर पर जोड़े या समूह में किया जाता है। इसमें नर्तक तेज़ कदमों, घुमावदार चालों और उछाल-फंदों के साथ नृत्य करते हैं। नर्तक अपनी गति, ताल और शरीर के हाव-भाव के माध्यम से संगीत की लय का पालन करते हैं। इस नृत्य की विशेषता इसकी तेज़ गति और लयबद्धता है, जो दर्शकों को उत्साहित कर देती है। टारंटेला के संगीत में पारंपरिक इटालियन वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है, जैसे ड्रम, कास्टनेट्स, गिटार और फ्लूट। संगीत आमतौर पर तेज़ और उत्साही ताल में होता है, जो नर्तकों को गति और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। नृत्य की लय और संगीत इतनी सम्मोहक होती है कि इसमें भाग लेने वाले सभी लोग सहज ही ताल से जुड़ जाते हैं। इतिहास में टारंटेला का संबंध मध्ययुगीन दक्षिणी इटली से है। माना जाता है...

FLAMENCO

 फ्लेमेंको (Flamenco) नृत्य फ्लेमेंको स्पेन का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जो विशेष रूप से अंडालूसिया क्षेत्र में उत्पन्न हुआ। यह नृत्य गहरी भावनाओं, ऊर्जा और संगीत के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है। फ्लेमेंको केवल नृत्य नहीं, बल्कि संगीत, गायन और ताल का मिश्रण है, जो स्पेन की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को दर्शाता है। फ्लेमेंको आमतौर पर एकल या जोड़े में किया जाता है। इस नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता है हाथों और अंगों की मुद्राएँ, पैरों की तेज़ थाप और भावनाओं की अभिव्यक्ति। नर्तक अपने शरीर और हाथों के हाव-भाव से संगीत की ताल और गीत की भावनाओं को दर्शाते हैं। इसमें कास्टनेट्स (ताल वाद्य) का प्रयोग भी होता है, जो नृत्य की लय को और प्रभावशाली बनाता है। फ्लेमेंको का संगीत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें गिटार, हाथों की ताली, और पारंपरिक स्पेनिश गीत शामिल होते हैं। गीतों में प्रेम, पीड़ा, उत्साह और जीवन की विभिन्न भावनाओं को व्यक्त किया जाता है। नर्तक संगीत की हर ताल और सुर के साथ अपनी चाल, घूमना और कूद को तालबद्ध करता है। फ्लेमेंको का इतिहास बहुत प्राचीन है। माना जाता है कि इसका विकास र...

MORRIS DANCE

 मॉरिस डांस (Morris Dance) मॉरिस डांस इंग्लैंड का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जो सदियों से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सवों और सामाजिक समारोहों का हिस्सा रहा है। यह नृत्य मुख्य रूप से ग्रामीण जीवन, कृषि उत्सव और मौसमी परिवर्तन को दर्शाने के लिए किया जाता है। मॉरिस डांस न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह इंग्लैंड की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी प्रतीक माना जाता है। मॉरिस डांस में नर्तक विशेष रूप से सजीव रंग-बिरंगे वस्त्र और घंटियों से सुसज्जित जूते पहनते हैं। पुरुष नर्तक पारंपरिक रूप से सफेद वस्त्र और रंगीन फीते पहनते हैं, जबकि कुछ समूह में महिलाओं को भी शामिल किया जाता है। नृत्य के दौरान नर्तक हाथ में छड़ी, रूमाल या तलवार जैसी वस्तुएँ पकड़कर तालबद्ध तरीके से कदम उठाते हैं। यह नृत्य ऊर्जा, ताल और सामूहिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। मॉरिस डांस का संगीत पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर आधारित होता है, जैसे ढोलक, बैंडो, बागपाइप और फ्लूट। नृत्य की चालें दोहराव और तालबद्धता पर आधारित होती हैं, जिससे समूह के सभी सदस्य एक समान गति से नृत्य कर सकें। नर्तक कभी एक-दूसरे के साथ छड़ी टक...

KAZACHOK

 कज़ाचोक (Kazachok) नृत्य कज़ाचोक रूस और पूर्वी यूरोप का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से कज़ाक समुदाय के लोग करते हैं। यह नृत्य ऊर्जा, उत्साह और तेजी के लिए जाना जाता है। कज़ाचोक ने रूस और यूक्रेन के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष लोकप्रियता प्राप्त की और यह आज भी सांस्कृतिक समारोहों, उत्सवों और मंच प्रस्तुतियों में प्रमुख रूप से किया जाता है। कज़ाचोक नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसके तेज़ और ऊर्जावान कदम हैं। इसमें नर्तक जमीन पर बैठकर, घुटनों को मोड़कर, पैरों को तेजी से हिलाते हुए और उछल-कूद कर नृत्य करते हैं। कभी-कभी नर्तक अपने शरीर को झुकाकर या सीधे खड़े होकर पैरों को तेज़ी से फैलाते और मोड़ते हैं। यह नृत्य शारीरिक शक्ति, संतुलन और तेजी की मांग करता है। पुरुष इसे अधिकतर जोरदार और तेज़ मूवमेंट के साथ करते हैं, जबकि महिला इसे सौम्य और लयबद्ध अंदाज में करती हैं। कज़ाचोक का संगीत तेज़, उत्साही और तालबद्ध होता है। इसमें पारंपरिक एकॉर्डियन, ड्रम और वायलिन जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। नृत्य की लय अक्सर 2/4 या 4/4 ताल पर आधारित होती है, जो नर्तकों की ऊर्जा ...

WALTZ

 वाल्ट्ज़ (Waltz) नृत्य वाल्ट्ज़ यूरोप का एक प्रसिद्ध शास्त्रीय और लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति ऑस्ट्रिया और जर्मनी में हुई थी। यह नृत्य अपनी सुडौल गति, गोलाकार चाल और संगीत के साथ तालबद्ध मूवमेंट के लिए जाना जाता है। वाल्ट्ज़ ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में अत्यधिक लोकप्रियता हासिल की और आज भी यह विश्व भर के बैले, शास्त्रीय नृत्य और सामाजिक समारोहों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वाल्ट्ज़ आमतौर पर जोड़े में किया जाता है। इसमें पुरुष और महिला आपस में एक-दूसरे को पकड़कर गोलाकार रूप में घूमते हैं। नृत्य की चालें सरल लेकिन सटीक और लयबद्ध होती हैं। वाल्ट्ज़ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 3/4 ताल है, जिसमें प्रत्येक माप में तीन धुन की लय होती है। नर्तक अपने कदमों को संगीत की ताल से मेल करके घुमते हैं और धीरे-धीरे पूरे फर्श पर घूमते हुए नृत्य करते हैं। वाल्ट्ज़ का इतिहास शाही दरबारों और सामाजिक सभाओं से जुड़ा है। 18वीं शताब्दी में इसे विशेष रूप से शाही बॉल और उच्च समाज के समारोहों में पेश किया जाता था। 19वीं शताब्दी में वाल्ट्ज़ ने यूरोप के अन्य देशों में भी लोकप्रियता पाई और इसे सामाज...

POLKA

 पोल्का (Polka) लोक नृत्य पोल्का यूरोप का एक प्रसिद्ध और जीवंत लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति चेक गणराज्य (पूर्व बोहेमिया) में 19वीं शताब्दी के आसपास हुई। यह नृत्य तेज़ गति, ऊर्जावान कदम और आनंदपूर्ण ताल के लिए जाना जाता है। पोल्का ने जल्दी ही मध्य और पश्चिमी यूरोप के कई देशों में लोकप्रियता हासिल कर ली और आज भी यह उत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से किया जाता है। पोल्का आमतौर पर जोड़े में किया जाने वाला नृत्य है। इसमें पुरुष और महिला हाथ में हाथ डालकर या पास-पास खड़े होकर नृत्य करते हैं। नर्तक तेज़ और लयबद्ध कदमों के साथ घूमते हैं, कूदते हैं और कभी-कभी छोटी-छोटी उछालें भी लगाते हैं। यह नृत्य सरल दिखने के बावजूद उच्च ऊर्जा और ताल का सटीक ज्ञान मांगता है। पोल्का का संगीत आमतौर पर 2/4 ताल पर आधारित होता है, जो नृत्य को उत्साही और गतिशील बनाता है। पोल्का का संबंध खुशी, उत्सव और सामाजिक मेल-जोल से है। यह नृत्य अक्सर शादी, फसल उत्सव, मेलों और पारंपरिक जश्नों में किया जाता है। इसके साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे अकॉर्डियन, वायलिन, बास और ड्रम बजाए जाते हैं, जो नृत्य की गति और ...

HORA

 होरा (Hora) लोक नृत्य होरा यूरोप का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से रोमानिया, बुल्गारिया, मोल्दोवा और बाल्कन क्षेत्र में लोकप्रिय है। यह नृत्य सामूहिक रूप से किया जाता है और सामाजिक एकता, आनंद तथा सामूहिक सहभागिता का प्रतीक माना जाता है। होरा केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि लोगों को आपस में जोड़ने वाली सांस्कृतिक परंपरा है। होरा नृत्य आमतौर पर गोल घेरा बनाकर किया जाता है, जिसमें सभी नर्तक एक-दूसरे के हाथ पकड़कर या कंधों पर हाथ रखकर नृत्य करते हैं। इसकी चालें सरल लेकिन तालबद्ध होती हैं, जिससे हर आयु वर्ग के लोग इसमें आसानी से भाग ले सकते हैं। नृत्य की गति कभी धीमी तो कभी तेज़ होती है, जो संगीत की लय के अनुसार बदलती रहती है। होरा के साथ बजने वाला संगीत पारंपरिक लोक वाद्यों पर आधारित होता है। इसमें वायलिन, अकॉर्डियन, फ्लूट और ड्रम जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। संगीत की ताल निरंतर और दोहराव वाली होती है, जिससे नृत्य में सामूहिक सामंजस्य बना रहता है। कई स्थानों पर इसके साथ लोक गीत भी गाए जाते हैं। यह नृत्य विशेष रूप से शादियों, फसली उत्सवों, धार्मिक पर्वों ...

FANDANGO

 फैनडैंगो (Fandango) फैनडैंगो यूरोप का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति स्पेन में मानी जाती है। यह नृत्य विशेष रूप से स्पेन के अंडालूसिया क्षेत्र में लोकप्रिय रहा है। फैनडैंगो न केवल एक नृत्य है, बल्कि इसमें संगीत, गायन और ताल का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। समय के साथ यह नृत्य स्पेन की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। फैनडैंगो आमतौर पर जोड़े में किया जाने वाला नृत्य है, जिसमें पुरुष और महिला दोनों समान उत्साह के साथ भाग लेते हैं। इस नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज़ लय, जीवंत भाव-भंगिमाएँ और पैरों की तालबद्ध थाप है। नर्तक हाथों की मुद्राओं, घूमने की चाल और पैरों की तेज़ गति से दर्शकों को आकर्षित करते हैं। कई बार इसमें कास्टनेट्स (ताल वाद्य) का भी प्रयोग किया जाता है, जो नृत्य की लय को और प्रभावशाली बनाते हैं। फैनडैंगो के संगीत में पारंपरिक रूप से गिटार, ताली और गायन का उपयोग होता है। इसकी ताल सामान्यतः 3/4 या 6/8 होती है, जो नृत्य को गतिशील बनाती है। यह नृत्य उत्सवों, मेलों और सामाजिक समारोहों में किया जाता है, जहाँ लोग खुशी और उमंग के साथ इस...

FOLK DANCES OF EUROPE

 यूरोप के लोक नृत्य (Folk Dances of Europe ) यूरोप सांस्कृतिक विविधता से भरपूर महाद्वीप है, जहाँ प्रत्येक देश के अपने विशिष्ट लोक नृत्य हैं। ये नृत्य वहाँ के इतिहास, परंपराओं, मौसम, कृषि जीवन और सामाजिक उत्सवों से जुड़े हुए हैं। यूरोप के लोक नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी हैं। 1. फ्लेमेंको (Flamenco) – स्पेन फ्लेमेंको स्पेन का प्रसिद्ध लोक नृत्य है, जो विशेष रूप से अंडालूसिया क्षेत्र में लोकप्रिय है। इसमें भावनात्मक अभिव्यक्ति, पैरों की तेज़ थाप, हाथों की मुद्राएँ और तालबद्ध संगीत प्रमुख होते हैं। यह नृत्य गायन और गिटार संगीत के साथ किया जाता है। 2. पोल्का (Polka) – चेक गणराज्य पोल्का एक तेज़ और उत्साहपूर्ण लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति बोहेमिया क्षेत्र में हुई। यह जोड़े में किया जाने वाला नृत्य है और पूरे मध्य यूरोप में लोकप्रिय है। 3. वाल्ट्ज़ (Waltz) – ऑस्ट्रिया वाल्ट्ज़ ऑस्ट्रिया का पारंपरिक नृत्य है, जो धीमी और गोलाकार गति के लिए जाना जाता है। यह 3/4 ताल पर आधारित होता है और शाही सभाओं व सामाजिक आयोजनों में किया जाता था। ...

HISTORY OF DOLLAR

 डॉलर का इतिहास (History of Dollar ] डॉलर (Dollar) विश्व की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली मुद्राओं में से एक है। आज यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्त और विदेशी मुद्रा भंडार में प्रमुख भूमिका निभाता है। डॉलर का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है और इसका संबंध यूरोप तथा अमेरिका दोनों से जुड़ा हुआ है। “डॉलर” शब्द की उत्पत्ति यूरोप से मानी जाती है। 16वीं शताब्दी में बोहेमिया (वर्तमान चेक गणराज्य) के योआखिम्सथाल (Joachimsthal) क्षेत्र में चाँदी के सिक्के ढाले जाते थे, जिन्हें “थालर” कहा जाता था। समय के साथ “थालर” शब्द बदलकर “डॉलर” बन गया। यूरोप के कई देशों में इस नाम से मिलते-जुलते सिक्के प्रचलन में आए। अमेरिका में डॉलर का इतिहास औपनिवेशिक काल से शुरू होता है। स्वतंत्रता से पहले अमेरिकी उपनिवेशों में ब्रिटिश पाउंड, स्पेनिश डॉलर और अन्य यूरोपीय मुद्राएँ चलती थीं। विशेष रूप से स्पेनिश सिल्वर डॉलर बहुत लोकप्रिय था और इसी ने अमेरिकी डॉलर की नींव रखी। 1776 में अमेरिका की स्वतंत्रता के बाद एक स्वतंत्र मुद्रा की आवश्यकता महसूस हुई। परिणामस्वरूप 1792 का कॉइनिज एक्ट (Coinage Act) पारित किया गया, जिसके त...

HISTORY OF INDIAN RUPEE

 भारतीय रुपया (INR) का इतिहास भारतीय रुपया (Indian Rupee – INR) भारत की आधिकारिक मुद्रा है और इसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। “रुपया” शब्द संस्कृत के शब्द “रूप्य” से निकला है, जिसका अर्थ है चाँदी से बना सिक्का। प्राचीन भारत में चाँदी के सिक्कों का प्रयोग प्रचलित था, जिन्हें आधुनिक रुपये का प्रारंभिक रूप माना जाता है। भारत में मुद्रा प्रणाली की शुरुआत मौर्य काल में मानी जाती है। उस समय “पण” नामक चाँदी के सिक्के चलन में थे। इसके बाद गुप्त काल में सोने और चाँदी के सुंदर एवं मानकीकृत सिक्के जारी किए गए। मध्यकाल में दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के दौरान भी मुद्रा प्रणाली विकसित हुई। शेरशाह सूरी (16वीं शताब्दी) को आधुनिक रुपये का वास्तविक जनक माना जाता है। उन्होंने लगभग 178 ग्रेन वजन का चाँदी का सिक्का जारी किया, जिसे “रुपया” कहा गया। ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय मुद्रा प्रणाली में बड़े बदलाव आए। 1835 में ब्रिटिश सरकार ने पूरे भारत में एक समान मुद्रा प्रणाली लागू की, जिसमें चाँदी का रुपया मानक मुद्रा बना। उस समय 1 रुपया = 16 आना की प्रणाली प्रचलित थी। ब्रिटिश काल में कागजी नोटों की शुर...

EUROPEAN UNION

 यूरोपीय संघ (European Union – EU) यूरोपीय संघ विश्व का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना यूरोप के देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य यूरोपीय देशों में शांति, स्थिरता, समृद्धि और एकता को मजबूत करना है। वर्तमान में यूरोपीय संघ में 27 सदस्य देश शामिल हैं। इसका मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में स्थित है। यूरोपीय संघ की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई, जब यूरोप के देश युद्ध से हुए विनाश से उबरना चाहते थे। वर्ष 1951 में यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय (ECSC) की स्थापना की गई, जिसे यूरोपीय एकीकरण की पहली सीढ़ी माना जाता है। इसके बाद 1957 की रोम संधि के तहत यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) बना। आधुनिक यूरोपीय संघ का औपचारिक गठन 1993 में मास्ट्रिख्ट संधि के माध्यम से हुआ। यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकल बाजार (Single Market) है, जिसमें सदस्य देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों की मुक्त आवाजाही की अनुमति है। इससे व्यापार में वृद्धि हुई है और नागरिकों को रोजगार, शिक्षा और यात्रा के ...

GOLD PRODUCING COUNTRIES

 विश्व में सोना (Gold) उत्पादन करने वाले प्रमुख देश निम्नलिखित हैं— चीन (China) – चीन विश्व का सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है। यहाँ शानडोंग, हेनान और फुजियान जैसे प्रांतों में बड़े पैमाने पर सोने की खदानें हैं। ऑस्ट्रेलिया (Australia) – ऑस्ट्रेलिया सोना उत्पादन में दूसरे स्थान पर आता है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र इसकी प्रमुख खदानों के लिए प्रसिद्ध है। रूस (Russia) – रूस साइबेरिया और सुदूर पूर्वी क्षेत्रों में स्थित खदानों से भारी मात्रा में सोना निकालता है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) – अमेरिका में नेवादा, अलास्का और कोलोराडो राज्यों में सोने का उत्पादन होता है। कनाडा (Canada) – कनाडा में ओंटारियो, क्यूबेक और ब्रिटिश कोलंबिया में सोने की खदानें हैं। दक्षिण अफ्रीका (South Africa) – कभी विश्व का सबसे बड़ा सोना उत्पादक रहा दक्षिण अफ्रीका आज भी प्रमुख देशों में शामिल है। घाना (Ghana) – अफ्रीका का सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है, इसलिए इसे “गोल्ड कोस्ट” भी कहा जाता है। पेरू (Peru) – दक्षिण अमेरिका का प्रमुख सोना उत्पादक देश है। मेक्सिको (Mexico) – मेक्सिको में चाँदी के साथ-साथ सोने का भी...

NAPO RIVER

 नापो नदी (Napo River) दक्षिण अमेरिका की एक प्रमुख नदी है, जो मुख्य रूप से पेरू और इक्वाडोर से होकर बहती है। यह नदी अमेज़न नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है और अमेज़न नदी तंत्र का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है। नापो नदी का उद्गम इक्वाडोर के एंडीज पर्वत क्षेत्र में होता है और यह पूर्व की ओर बहते हुए पेरू में प्रवेश करती है। अंततः यह अमेज़न नदी में मिल जाती है। नापो नदी की कुल लंबाई लगभग 1,100 किलोमीटर मानी जाती है। यह नदी पेरू के घने उष्णकटिबंधीय वर्षावनों से होकर बहती है, जहाँ जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। नदी के आसपास का क्षेत्र दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का घर है, जिनमें अनेक प्रजातियाँ केवल अमेज़न क्षेत्र में ही पाई जाती हैं। आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से नापो नदी का विशेष महत्व है। नदी के किनारे रहने वाले आदिवासी समुदाय, जैसे किचवा और अन्य जनजातियाँ, इस नदी पर निर्भर हैं। यह नदी परिवहन का एक प्रमुख साधन है, क्योंकि घने जंगलों में सड़कें सीमित हैं। मछली पालन, कृषि और स्थानीय व्यापार में भी नापो नदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। नापो नदी पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। य...

RIVERS OF PERU

 पेरू (Peru) में अनेक महत्वपूर्ण नदियाँ बहती हैं, जो देश की कृषि, जल संसाधन, परिवहन और जैव विविधता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पेरू की अधिकांश नदियाँ अमेज़न नदी तंत्र का हिस्सा हैं। प्रमुख नदियों की सूची नीचे दी गई है: पेरू की प्रमुख नदियाँ (हिंदी में) अमेज़न नदी (Amazon River) – विश्व की सबसे लंबी और जल-प्रवाह में सबसे बड़ी नदी, जिसका उद्गम पेरू के एंडीज पर्वत क्षेत्र से होता है। उकायाली नदी (Ucayali River) – अमेज़न नदी की मुख्य सहायक नदी, पेरू की सबसे लंबी नदियों में से एक। मारान्योन नदी (Marañón River) – अमेज़न नदी का प्रमुख स्रोत, एंडीज पर्वत से निकलती है। हुआलागा नदी (Huallaga River) – अमेज़न तंत्र की महत्वपूर्ण सहायक नदी। नापो नदी (Napo River) – पेरू और इक्वाडोर से होकर बहने वाली प्रमुख नदी। पुतुमायो नदी (Putumayo River) – पेरू, कोलंबिया और ब्राज़ील की सीमा से होकर बहती है। मद्रे दे दियोस नदी (Madre de Dios River) – दक्षिणी पेरू की प्रमुख नदी, जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र में बहती है। ताम्बोपाटा नदी (Tambopata River) – मद्रे दे दियोस की सहायक नदी। रिमाक नदी (Rímac River) – लीमा...

DURANGO CITY

 दुरांगो सिटी (Durango City), जिसे आधिकारिक रूप से विक्टोरिया दे दुरांगो कहा जाता है, मेक्सिको के दुरांगो राज्य की राजधानी और सबसे महत्वपूर्ण नगर है। इस शहर की स्थापना वर्ष 1563 में स्पेनिश उपनिवेशकाल के दौरान की गई थी। अपने ऐतिहासिक महत्व, औपनिवेशिक वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के कारण दुरांगो सिटी मेक्सिको के प्रमुख शहरों में गिनी जाती है। दुरांगो सिटी का इतिहास खनन गतिविधियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। औपनिवेशिक काल में यह क्षेत्र चाँदी और सोने के उत्पादन का प्रमुख केंद्र था, जिसने शहर को आर्थिक समृद्धि प्रदान की। इसी समृद्धि के कारण यहाँ भव्य चर्च, महल और प्रशासनिक भवनों का निर्माण हुआ। आज भी शहर की कई इमारतें उस काल की याद दिलाती हैं। भौगोलिक रूप से दुरांगो सिटी एक ऊँचे पठार पर स्थित है और इसके आसपास पहाड़ी क्षेत्र फैले हुए हैं। यहाँ की जलवायु सामान्यतः शुष्क और मध्यम रहती है। गर्मियाँ हल्की गर्म और सर्दियाँ अपेक्षाकृत ठंडी होती हैं, जिससे यह शहर रहने योग्य माना जाता है। दुरांगो सिटी राज्य का प्रशासनिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ विश्वविद्यालय, सरकारी कार्यालय, संग...

CHIHUAHUA MEXICO

 चिहुआहुआ (Chihuahua) मेक्सिको का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है, जो देश के उत्तरी भाग में स्थित है। इसकी राजधानी का नाम भी चिहुआहुआ शहर है। यह राज्य अपने विशाल रेगिस्तानी क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों, खनिज संसाधनों और समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है। चिहुआहुआ की सीमा संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सास और न्यू मैक्सिको राज्यों से भी लगती है। ऐतिहासिक दृष्टि से चिहुआहुआ का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह क्षेत्र मैक्सिकन स्वतंत्रता संग्राम और मैक्सिकन क्रांति के दौरान प्रमुख घटनाओं का साक्षी रहा। प्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता पान्चो विला से चिहुआहुआ का गहरा संबंध माना जाता है। औपनिवेशिक काल में यह क्षेत्र खनन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। चिहुआहुआ खनिज संपदा से भरपूर है। यहाँ चाँदी, सोना, तांबा, सीसा और जस्ता जैसे खनिज पाए जाते हैं। विशेष रूप से चाँदी उत्पादन में चिहुआहुआ का नाम मेक्सिको के अग्रणी राज्यों में लिया जाता है। खनन उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है। भौगोलिक रूप से चिहुआहुआ अत्यंत विविध है। यहाँ एक ओर विस्तृत चिहुआहुआन रेगिस्तान है, तो दूसरी ओर सिएरा माद्...

ZACATECAS MEXICO

 ज़ाकाटेकास (Zacatecas) मेक्सिको का एक ऐतिहासिक और खनिज-समृद्ध राज्य है, जो देश के मध्य-उत्तर भाग में स्थित है। इसकी राजधानी भी ज़ाकाटेकास शहर है, जो अपनी औपनिवेशिक वास्तुकला, चाँदी की खदानों और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। शहर की स्थापना 1546 ई. में स्पेनिश उपनिवेशकाल के दौरान हुई थी, जब यहाँ चाँदी के विशाल भंडार खोजे गए। ज़ाकाटेकास का सबसे बड़ा महत्व इसके खनन उद्योग से जुड़ा है। यह क्षेत्र सदियों से विश्व के प्रमुख चाँदी उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। चाँदी के साथ-साथ यहाँ सोना, सीसा और जस्ता भी निकाले जाते हैं। औपनिवेशिक काल में ज़ाकाटेकास की चाँदी ने स्पेनिश साम्राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी और इस क्षेत्र को अपार समृद्धि दिलाई। भौगोलिक रूप से ज़ाकाटेकास एक ऊँचे पठारी क्षेत्र में स्थित है। यहाँ की जलवायु सामान्यतः शुष्क और अर्ध-शुष्क है, जबकि कुछ पहाड़ी इलाकों में ठंडा मौसम पाया जाता है। सीमित वर्षा के बावजूद, यहाँ कृषि और पशुपालन किया जाता है। मक्का, सेम और मिर्च जैसी फसलें प्रमुख हैं। सांस्कृतिक दृष्टि से ज़ाकाटेकास अत्यंत समृद्ध है। ज़ाकाटेकास का ऐतिहास...

DURANGO, MEXICO

 दुरांगो (Durango) मेक्सिको का एक महत्वपूर्ण राज्य और उसी नाम की उसकी राजधानी है। यह देश के उत्तर-मध्य भाग में स्थित है और अपने समृद्ध इतिहास, खनिज संसाधनों, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। दुरांगो की स्थापना वर्ष 1563 में स्पेनिश उपनिवेशकाल के दौरान की गई थी। दुरांगो का ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। औपनिवेशिक काल में यह क्षेत्र खनन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा, विशेष रूप से चाँदी और सोने के उत्पादन के लिए। इसी कारण दुरांगो को लंबे समय तक “खनिजों की भूमि” कहा जाता रहा है। आज भी यहाँ खनन उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। भौगोलिक दृष्टि से दुरांगो अत्यंत विविध है। यहाँ सिएरा माद्रे ऑक्सीडेंटल पर्वत श्रृंखला का विस्तार मिलता है, जहाँ ऊँचे पहाड़, घने जंगल और गहरी घाटियाँ स्थित हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ भाग शुष्क और अर्ध-रेगिस्तानी भी हैं। इस विविधता के कारण दुरांगो में अलग-अलग प्रकार की जलवायु और जैव विविधता पाई जाती है। दुरांगो की अर्थव्यवस्था में खनन के साथ-साथ कृषि और पशुपालन का भी महत्वपूर्ण योगदान है। यहाँ मक्का, सेम और गेहूँ की खेती की ...

LIMA

 लीमा (Lima) पेरू की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यह शहर दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर प्रशांत महासागर के किनारे स्थित है। लीमा पेरू का राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र माना जाता है। इसकी स्थापना 18 जनवरी 1535 को स्पेनिश विजेता फ्रांसिस्को पिज़ारो ने की थी, जिसके कारण इसे औपनिवेशिक इतिहास का महत्वपूर्ण नगर माना जाता है। लीमा का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत समृद्ध है। यहाँ का ऐतिहासिक केंद्र (Historic Centre of Lima) यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है। इस क्षेत्र में पुराने गिरजाघर, महल, संग्रहालय और औपनिवेशिक शैली की इमारतें देखने को मिलती हैं। लीमा कैथेड्रल और सैन फ्रांसिस्को चर्च यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। भौगोलिक रूप से लीमा एक रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित है, फिर भी यहाँ का मौसम अपेक्षाकृत मध्यम रहता है। शहर में वर्षा बहुत कम होती है, लेकिन समुद्र के कारण यहाँ नमी बनी रहती है। लीमा के पास बहने वाली रिमाक नदी शहर के लिए जल का प्रमुख स्रोत है। आर्थिक दृष्टि से लीमा पेरू का सबसे विकसित शहर है। देश के अधिकांश उद्योग, बैंक, व्यापारिक प्रतिष्ठान और अंतरराष्ट्रीय कं...

PERU

 पेरू (Peru) दक्षिण अमेरिका महाद्वीप का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक देश है। यह देश अपनी प्राचीन सभ्यताओं, प्राकृतिक विविधता, खनिज संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व-प्रसिद्ध है। पेरू की राजधानी लीमा है, जो प्रशांत महासागर के तट पर स्थित एक प्रमुख शहर है। पेरू का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। यहाँ की सबसे प्रसिद्ध प्राचीन सभ्यता इंका सभ्यता थी, जिसने दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्से पर शासन किया। इंका साम्राज्य की राजधानी कुस्को थी और माचू पिच्चू आज भी विश्व के सात नए आश्चर्यों में शामिल है। 16वीं शताब्दी में स्पेनिश उपनिवेशवादियों के आगमन के बाद पेरू स्पेन का उपनिवेश बना और 1821 में इसे स्वतंत्रता प्राप्त हुई। भौगोलिक दृष्टि से पेरू अत्यंत विविध है। यहाँ तीन प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र पाए जाते हैं—तटीय मैदान, एंडीज पर्वत और अमेज़न वर्षावन। एंडीज पर्वतमाला पेरू के मध्य भाग से होकर गुजरती है, जबकि पूर्वी भाग में घने जंगल और जैव विविधता पाई जाती है। पेरू की अर्थव्यवस्था में खनन उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है। यह विश्व के प्रमुख चाँदी, तांबा, सोना और जस्ता उत्पादक देशों में शामिल है। क...

SILVER PRODUCING COUNTRIES

 विश्व में चाँदी (Silver) का उत्पादन कई देशों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। चाँदी एक बहुमूल्य धातु है जिसका उपयोग आभूषण, सिक्के, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, चिकित्सा उपकरण और उद्योगों में व्यापक रूप से होता है। नीचे प्रमुख चाँदी उत्पादक देशों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है। मेक्सिको मेक्सिको विश्व का सबसे बड़ा चाँदी उत्पादक देश है। यहाँ ज़ाकाटेकास, दु्रांगो और चिहुआहुआ जैसे क्षेत्रों में विशाल चाँदी खदानें स्थित हैं। देश की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। चीन चीन चाँदी उत्पादन में दूसरा प्रमुख देश है। यहाँ चाँदी का उपयोग औद्योगिक कार्यों, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर पैनलों में बड़े पैमाने पर होता है। चीन की आधुनिक खनन तकनीक उत्पादन को बढ़ाने में सहायक है। पेरू पेरू लैटिन अमेरिका का एक प्रमुख खनिज उत्पादक देश है। यहाँ एंडीज पर्वत क्षेत्र में कई समृद्ध चाँदी खदानें हैं। चाँदी के साथ-साथ पेरू सीसा और जस्ता भी बड़ी मात्रा में निकालता है। ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया में चाँदी अक्सर सीसा और जस्ता के साथ सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। यहाँ उन्नत खनन तकनीक और पर्यावरणी...

36 ISLANDS OF LAKSHADWEEP

🏝️ लक्षद्वीप के आबाद द्वीप (10) कवारत्ती अगत्ती अमिनी अंड्रोथ कालपेनी कदमत किल्तान चेतलात बित्रा मिनिकॉय 🌴 लक्षद्वीप के अनआबाद द्वीप (26) बंगाराम थिन्नाकरा परली-I परली-II चेरियाम वलीयाकरा कुर्थी सुवेलीपराम पित्ती द्वीप (बर्ड आइलैंड) सेसमपाट्टी तिलक्कम कदमत चेरियम किल्तान चेरियम अंड्रोथ चेरियम अमिनी चेरियम चेतलात चेरियम कवारत्ती चेरियम कलपिट्टी वलियापानी मन्नली एरियापानी तिन्नकरा चेरियम बंगाराम चेरियम मिनिकॉय विलीगिली मिनिकॉय चेरियम पेरुमलपरम 📌 महत्वपूर्ण तथ्य लक्षद्वीप में कुल 36 द्वीप हैं। इनमें से केवल 10 द्वीपों पर मानव आबादी है। कवारत्ती लक्षद्वीप की राजधानी है। पित्ती द्वीप एक संरक्षित पक्षी अभयारण्य है।

AGATTI ISLAND INDIA

 अगात्ती द्वीप (Agatti Island)  अगत्ती द्वीप भारत के केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप का एक सुंदर और प्रमुख द्वीप है। यह अरब सागर में स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ समुद्र तटों तथा नीले-हरे लैगून के लिए प्रसिद्ध है। अगत्ती द्वीप लक्षद्वीप के उन गिने-चुने द्वीपों में शामिल है जहाँ हवाई अड्डा स्थित है, इसलिए यह पूरे द्वीपसमूह का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। अगत्ती द्वीप का क्षेत्रफल लगभग 3.8 वर्ग किलोमीटर है और इसकी लंबाई करीब 7.6 किलोमीटर है। यहाँ की जनसंख्या सीमित है और अधिकांश लोग मछली पकड़ने, नारियल की खेती तथा पर्यटन से जुड़े कार्यों में संलग्न हैं। इस द्वीप पर नारियल के पेड़ों की भरमार है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है। अगत्ती की सबसे बड़ी विशेषता इसका लैगून और प्रवाल भित्तियाँ (कोरल रीफ) हैं। यहाँ का समुद्र जल अत्यंत साफ़ है, जिससे समुद्री जीवों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। रंग-बिरली मछलियाँ, कछुए और कोरल संरचनाएँ पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि अगत्ती स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, कयाकिंग और ग्लास बॉटम बोट जैसी जल-क्रीड़ाओं ...

VANDE BHARAT SLEEPER TRAIN

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  वंदे भारत स्लीपर ट्रेन – परिचय: वंदे भारत स्लीपर भारतीय रेलवे की नई हाई-टेक ओवरनाइट ट्रेन है, जिसे सामान्य वंदे भारत एक्सप्रेस का स्लीपर (बेड) वर्ज़न कहा जाता है। यह लंबी दूरी के यात्रियों को आरामदायक और तेज़ यात्रा का विकल्प देती है। इसमें AC 1st Class, AC 2-Tier और AC 3-Tier जैसे केबिन होंगे ताकि यात्री बैठते और लेटते हुए सफर कर सकें।  लॉन्च और रूट: 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री ने पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर लॉन्च किया। यह गुवाहाटी और हावड़ा (कोलकाता) के बीच चली है। आने वाले समय में पटना, जयपुर, मुंबई, जम्मू और दिल्ली से भी इस तरह की ट्रेनें दौड़ने की योजना है।  फीचर्स और सुविधाएँ: ✔ आधुनिक ब्लैंकेट और कवर जिन्हें हटाकर साफ़ किया जा सकता है। � ✔ स्थानीय व्यंजन वाला खाना उपलब्ध है। � ✔ साफ-सुथरे पर्दे, सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम जैसे आधुनिक फीचर्स। � ✔ ट्रेन 180 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चल सकती है।  किराया और टिकट बुकिंग: • टिकट एयरलाइन स्टाइल डायनेमिक प्राइसिंग के आधार पर तय होता है। � • RAC (Reservation Against Cancellation) या ...

SATUA BABA

 \ सतुआ बाबा (Satua Baba)  सतुआ बाबा, जिनका असली नाम जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास है, इन दिनों प्रयागराज के माघ मेले 2026 (Magh Mela) में कई लग्ज़री कारों और वैभवशाली जीवनशैली की वजह से सुर्खियों में हैं।  वायरल मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सतुआ बाबा ने मेले में ₹3 करोड़ से भी अधिक कीमत वाली पोर्श कार (Porsche) और पहले ₹3 करोड़ से अधिक का लैंड रोवर डिफेंडर (Land Rover Defender) लाकर धमाल मचा दिया।  अब हाल ही में उनके बेड़े में लग्ज़री मर्सिडीज़ (Mercedes-Benz) जीएलएस 450 भी शामिल हुई है, जिसकी कीमत करीब ₹1.5 करोड़ बताई जा रही है। इसके आगे भी मीडिया में उनके ज्योतिषीय कार्यक्रमों, कार पूजा और महंगे अक्सेसरीज़ की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।  सोशल मीडिया पर उनके जीवनशैली को लेकर बहस चल रही है – एक तरफ उनके भक्त इसे आध्यात्मिक दृष्टि से एक प्रतीक मानते हैं, वहीं आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक साधु को इतने महंगे वाहन और भव्य जीवन की आवश्यकता है।  सतुआ बाबा को राजनीतिक हलकों में भी खास पहचान मिली है। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adity...

COLOUR OF MILESTONE

 भारत में माइलस्टोन (Milestone) सड़क किनारे लगाए जाने वाले पत्थर/बोर्ड होते हैं, जिनके रंग (Colours) से सड़क का प्रकार और महत्व समझ में आता है। विभिन्न रंगों वाले माइलस्टोन का अर्थ इस प्रकार है: 🟡 पीला रंग (Yellow Colour) अर्थ: राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway – NH) जानकारी: दूरी काले रंग में लिखी होती है सड़कें केंद्र सरकार के अधीन होती हैं उदाहरण: NH-19, NH-44 🟢 हरा रंग (Green Colour) अर्थ: राज्य राजमार्ग (State Highway – SH) जानकारी: दूरी सफेद रंग में लिखी होती है सड़कें राज्य सरकार द्वारा संचालित होती हैं उदाहरण: SH-1, SH-75 ⚪ सफेद रंग (White Colour) अर्थ: जिला सड़क / ग्रामीण सड़क (District Road / Rural Road) जानकारी: स्थानीय यातायात के लिए गाँव, कस्बों और जिलों को जोड़ती हैं 🔵 नीला रंग (Blue Colour) अर्थ: शहरी सड़क / नगर निगम सड़क जानकारी: शहरों के भीतर की प्रमुख सड़कें नगर पालिका या नगर निगम के अधीन 🔴 लाल रंग (Red Colour) अर्थ: सीमा सड़क / विशेष सामरिक सड़क जानकारी: अक्सर सेना या सीमा क्षेत्रों में रणनीतिक महत्व की सड़कें 🟤 भूरा रंग (Brown Colour) अर्थ: पर्यटन स्थल क...

BIHAR BHAWAN DELHI

🏛️ बिहार भवन – एक परिचय बिहार भवन (Bihar Bhawan) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिहार सरकार का एक महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय और आवासीय परिसर है। यह मुख्य रूप से बिहार के अधिकारियों, प्रतिनिधियों, और राज्य के कार्यक्रमों के समन्वय के लिए उपयोग होता है। साथ ही यह बिहार सूचना केंद्र (Bihar Information Centre) के रूप में भी काम करता है जो मीडिया, सरकारी कार्यक्रमों और विकास योजनाओं की जानकारी दिल्ली में फैलाता है।  📌 बिहार सूचना केंद्र का रोल दिल्ली में बिहार भवन के अंतर्गत काम करने वाला बिहार सूचना केंद्र लगातार बिहार सरकार के विकास कार्यक्रमों, प्रेस कांफ्रेंस और योजनाओं को दिल्ली-एनसीआर में मीडिया व सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वयित कर रहा है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारी के कार्यक्रमों को सुचारू रूप से आयोजित किया जाता है।  📌 कार्यसूची और आयोजन बिहार भवन में अक्सर प्रेस कॉन्फ़्रेंस, आयोजन और जानकारी सत्र का आयोजन किया जाता है जिसमें बिहार से दिल्ली आने वाले प्रतिनिधि राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं पर मीडिया संवाद करते हैं। इससे बिहार के विविध विकास पहलु...

BIHAR BHAWAN MUMBAI

📍 बिहार भवन मुंबई — क्या है? बिहार सरकार ने मुंबई (Mumbai), महाराष्ट्र में एक नया ‘बिहार भवन’ बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। यह निर्णय पटना में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर किया गया है और इसका उद्देश्य बिहार के प्रवासी नागरिकों, मरीजों, स्टूडेंट्स और राज्य के अधिकारियों के लिए सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।  🏢 भवन का स्वरूप और लागत – बिहार भवन मुंबई में 30 मंजिला (30-storey) इमारत के रूप में बनाया जाएगा। � – इस परियोजना के लिए ₹314.20 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ है। � – यह भवन एलफिंस्टन एस्टेट (Mumbai Port Trust area) में लगभग 0.68 एकड़ में बनेगा।  🏨 भवन में उपलब्ध सुविधाएँ भवन में आधुनिक सुविधाओं वाला एक बड़ा परिसर होगा, जिसमें शामिल हैं: ✔ 178 कमरे — ठहरने और प्रशासनिक कामों के लिए। � ✔ 240-बेड की डॉरमेट्री — खासकर इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए। � ✔ कॉन्फ़्रेंस हॉल (72 सीट) — बैठकें/कार्यक्रमों के लिए। � ✔ कॅफ़ेटेरिया, मेडिकल रूम और कार्यालय सुविधाएँ। � ✔ स्मार्ट पार्किंग — 233 वाहनों के लिए सेन्सर-आधारित डबल/ट्रिपल-डेकर पार्किंग।  ❤️ मरीजों के लिए राहत...

GAZA STRIP

गाज़ा : परिचय गाज़ा, जिसे गाज़ा पट्टी (Gaza Strip) भी कहा जाता है, मध्य पूर्व का एक छोटा लेकिन अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह भूमध्य सागर के तट पर स्थित है और इसके उत्तर-पूर्व में इज़राइल तथा दक्षिण-पश्चिम में मिस्र की सीमा लगती है। गाज़ा पट्टी लगभग 365 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है, लेकिन यहाँ 20 लाख से अधिक लोग रहते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। गाज़ा का इतिहास बहुत पुराना है। प्राचीन काल में यह व्यापारिक मार्गों का महत्वपूर्ण केंद्र था। आधुनिक इतिहास में गाज़ा लंबे समय तक मिस्र के नियंत्रण में रहा। 1967 के अरब-इज़राइल युद्ध के बाद यह इज़राइल के कब्ज़े में चला गया। वर्ष 2005 में इज़राइल ने यहाँ से अपने सैनिक और बस्तियाँ हटा लीं, लेकिन सीमाओं, हवाई क्षेत्र और समुद्री क्षेत्र पर उसका प्रभाव बना रहा। वर्ष 2007 से गाज़ा पर हमास का नियंत्रण है, जबकि फिलिस्तीनी प्राधिकरण वेस्ट बैंक में सक्रिय है। इसके बाद से गाज़ा को इज़राइल और मिस्र द्वारा कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इन प्रतिबंधों के कारण यहाँ आर्थिक स्थिति कमजोर, बेरोज़गारी अधिक और स्वास्थ्य...

LTIMindtree

🧑‍💼 LTIMindtree क्या है? LTIMindtree Limited भारत की एक प्रमुख आईटी परामर्श एवं तकनीकी सेवा कंपनी है, जिसका मुख्यालय मुंबई, भारत में स्थित है। यह Larsen & Toubro (L&T) Group की हिस्सा है और दुनिया भर में डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी, और आईटी समाधान देती है। � 🔄 मर्जर का इतिहास पहले LTI (L&T Infotech) और Mindtree अलग-अलग कंपनियाँ थीं। मई 2022 में इन दोनों के विलय का ऐलान हुआ और नया नाम LTIMindtree रखा गया। यह मर्जर नवंबर 2022 से प्रभावी हुआ और तब से दोनों कंपनियाँ एक साथ काम कर रही हैं।  🌍 वैश्विक उपस्थिति और सेवाएँ LTIMindtree दुनिया भर के 90,000+ कर्मचारियों के साथ 50 से अधिक देशों में सक्रिय है। कंपनी बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ, स्वास्थ्य, ऊर्जा, रिटेल, टेलीकॉम और उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों को तकनीकी समाधान प्रदान करती है। � मुख्य सेवाओं में शामिल हैं: ✔ क्लाउड समाधान (AWS, Azure, GCP) ✔ डेटा प्रबंधन और एनालिटिक्स ✔ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल परिवर्तन ✔ डाटा सिक्योरिटी और AI आधारित समाधान � 📊 कारोबार और प्रदर्शन कंपनी का नेटवर्क और ग्राहक आध...

GAZA BOARD OF PEACE

गाजा पीस बोर्ड: क्या है यह? गाजा पीस बोर्ड एक नया अंतरराष्ट्रीय शांति मंच है जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में युद्ध और उसके बाद की स्थिति को स्थिर बनाने, पुनर्निर्माण, और शांति प्रक्रिया पर निगरानी के लिए प्रस्तावित किया है। इसका मुख्य लक्ष्य गाजा में शांति स्थापित करना और वहाँ के नागरिकों के लिए बेहतर प्रशासन व जीवन की दिशा तय करना है। � मुख्य बिंदु और अपडेट्स: • ट्रंप का प्रस्ताव: ट्रंप प्रशासन ने करीब 20-बिंदुओं वाली योजना के हिस्से के रूप में यह बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें गाजा के पुनर्निर्माण और शांति के लिए वैश्विक भागीदारी शामिल है। � • भारत को निमंत्रण: अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। इसमें पाकिस्तान सहित कई अन्य देशों को भी बुलाया गया है। � • स्थायी सदस्यता शुल्क: स्थायी सदस्यता के लिए देशों से लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹8,000 करोड़+) देने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे यह पहल आर्थिक और राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। � • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रि...

PETROLEUM COMPANIES IN USA

 संयुक्त राज्य अमेरिका की पेट्रोलियम कंपनियाँ  संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) विश्व के सबसे बड़े पेट्रोलियम उत्पादक और उपभोक्ता देशों में से एक है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास में पेट्रोलियम कंपनियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहाँ अनेक बड़ी और प्रभावशाली तेल एवं गैस कंपनियाँ कार्यरत हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर भी पहचान प्राप्त है। अमेरिका की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों में एक्सॉन मोबिल (ExxonMobil), शेवरॉन (Chevron), कॉनकोफिलिप्स (ConocoPhillips), ऑक्सिडेंटल पेट्रोलियम (Occidental Petroleum) और मैरेथॉन ऑयल (Marathon Oil) शामिल हैं। ये कंपनियाँ कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण, उत्पादन, परिशोधन (रिफाइनिंग) और विपणन का कार्य करती हैं। एक्सॉन मोबिल और शेवरॉन विश्व की सबसे बड़ी निजी तेल कंपनियों में गिनी जाती हैं। अमेरिका में पेट्रोलियम उद्योग का विस्तार टेक्सास, अलास्का, कैलिफ़ोर्निया और खाड़ी तट (गल्फ कोस्ट) क्षेत्रों में अधिक है। शेल गैस और शेल ऑयल क्रांति ने अमेरिका को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आधुनिक ...

GENERAL MOTORS

 जनरल मोटर्स (General Motors)  जनरल मोटर्स, जिसे संक्षेप में GM कहा जाता है, संयुक्त राज्य अमेरिका की एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कंपनी है। इसकी स्थापना वर्ष 1908 में विलियम सी. ड्यूरेंट द्वारा की गई थी। जनरल मोटर्स का मुख्यालय डेट्रॉइट, मिशिगन में स्थित है। यह कंपनी लंबे समय तक विश्व की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता रही है और आज भी वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जनरल मोटर्स विभिन्न प्रकार के वाहनों का निर्माण करती है, जिनमें कार, ट्रक, एसयूवी और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। इसके प्रसिद्ध ब्रांडों में शेवरले (Chevrolet), कैडिलैक (Cadillac), जीएमसी (GMC) और ब्यूइक (Buick) शामिल हैं। ये ब्रांड अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। शेवरले आम जनता के लिए, कैडिलैक लक्ज़री सेगमेंट के लिए, जबकि जीएमसी और ब्यूइक प्रीमियम वाहनों के लिए जानी जाती हैं। जनरल मोटर्स ने ऑटोमोबाइल तकनीक के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। सुरक्षा फीचर्स, ईंधन दक्ष इंजन और आधुनिक डिजाइन के साथ-साथ कंपनी अब इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वचालित ड्राइविंग तक...

CHEVROLET

 शेवरले (Chevrolet) – शेवरले, जिसे सामान्यतः चेवी (Chevy) कहा जाता है, संयुक्त राज्य अमेरिका की एक प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल ब्रांड है। यह जनरल मोटर्स (General Motors) की प्रमुख सहायक कंपनी है। शेवरले की स्थापना वर्ष 1911 में लुई शेवरले और विलियम सी. ड्यूरेंट द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों के लिए विश्वसनीय, किफायती और आधुनिक वाहन उपलब्ध कराना था। शेवरले ने अपनी शुरुआत से ही ऑटोमोबाइल उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कंपनी ने समय के साथ कई लोकप्रिय मॉडल पेश किए, जिनमें सेडान, हैचबैक, एसयूवी, पिकअप ट्रक और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। Chevrolet Silverado पिकअप ट्रक अमेरिका के सबसे अधिक बिकने वाले वाहनों में से एक है। वहीं Chevrolet Camaro अपनी स्पोर्टी डिजाइन और शक्तिशाली इंजन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। शेवरले के वाहन मजबूती, प्रदर्शन और किफायती रखरखाव के लिए जाने जाते हैं। कंपनी ने सुरक्षा और तकनीक पर भी विशेष ध्यान दिया है। आधुनिक शेवरले कारों में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्ट सिस्टम, इंफोटेनमेंट सिस्टम और ईंधन दक्ष तकनीक उपलब्ध कराई जाती है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में...

FORD MOTOR

 फोर्ड मोटर कंपनी (Ford Motor Company)  फोर्ड मोटर कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका की एक प्रमुख और ऐतिहासिक ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी है। इसकी स्थापना वर्ष 1903 में हेनरी फोर्ड द्वारा की गई थी। कंपनी का मुख्यालय डियरबॉर्न, मिशिगन में स्थित है। फोर्ड ने ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़े पैमाने पर उत्पादन की अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू कर परिवहन को आम जनता के लिए सुलभ बनाया। फोर्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि मॉडल टी (Model T) मानी जाती है, जिसे 1908 में लॉन्च किया गया था। इस कार ने असेंबली लाइन उत्पादन प्रणाली के कारण कम कीमत पर उपलब्ध होकर आम लोगों के जीवन में क्रांति ला दी। इसके बाद फोर्ड ने लगातार नई तकनीकों और डिज़ाइनों के साथ कई सफल वाहन पेश किए। आज फोर्ड कार, एसयूवी, पिकअप ट्रक और वाणिज्यिक वाहनों का निर्माण करती है। Ford F-Series पिकअप ट्रक अमेरिका में दशकों से सबसे अधिक बिकने वाले वाहनों में शामिल है। इसके अलावा Ford Mustang अपनी शक्तिशाली परफॉर्मेंस और आकर्षक डिज़ाइन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। Ford Explorer और Ford Escape जैसी एसयूवी भी लोकप्रिय हैं। फोर्ड मोटर कंपनी ने सुरक्षा, ईंधन ...

GENERAL ELECTRIC

 जनरल इलेक्ट्रिक (General Electric)  जनरल इलेक्ट्रिक, जिसे संक्षेप में GE कहा जाता है, संयुक्त राज्य अमेरिका की एक प्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय औद्योगिक और प्रौद्योगिकी कंपनी है। इसकी स्थापना 1892 में हुई थी। कंपनी के गठन में प्रसिद्ध वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जनरल इलेक्ट्रिक का मुख्यालय वर्तमान में बोस्टन, मैसाचुसेट्स में स्थित है। यह कंपनी विश्वभर में अपने नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है। जनरल इलेक्ट्रिक ने ऊर्जा, उद्योग और विज्ञान के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। प्रारंभ में कंपनी का मुख्य कार्य विद्युत उपकरणों और प्रकाश व्यवस्था से जुड़ा था। समय के साथ GE ने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और पावर, हेल्थकेयर, एविएशन, नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में अग्रणी स्थान प्राप्त किया। GE एविएशन जेट इंजन निर्माण में विश्व की अग्रणी कंपनियों में से एक है। इसके इंजन वाणिज्यिक और सैन्य दोनों प्रकार के विमानों में उपयोग किए जाते हैं। GE हेल्थकेयर मेडिकल इमेजिंग, डायग्नोस्टिक उपकरण और स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र...

STELLANTIS

 स्टेलांटिस (Stellantis)  स्टेलांटिस एक वैश्विक बहुराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कंपनी है, जिसका गठन जनवरी 2021 में हुआ। यह कंपनी फिएट क्राइस्लर ऑटोमोबाइल्स (FCA) और ग्रुप पीएसए (PSA Group) के विलय से बनी है। स्टेलांटिस का मुख्यालय नीदरलैंड्स में स्थित है। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में गिनी जाती है और उत्पादन के मामले में शीर्ष कंपनियों में शामिल है। स्टेलांटिस के अंतर्गत कई प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांड आते हैं। इनमें जीप (Jeep), डॉज (Dodge), क्राइस्लर (Chrysler), राम (RAM), फिएट (Fiat), अल्फा रोमियो (Alfa Romeo), मासेराती (Maserati), प्यूजो (Peugeot), सिट्रोएन (Citroën) और ओपल (Opel) शामिल हैं। ये ब्रांड अलग-अलग क्षेत्रों और उपभोक्ता वर्गों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। स्टेलांटिस का उद्देश्य नवाचार, टिकाऊ विकास और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है। कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड तकनीक और कम कार्बन उत्सर्जन वाले इंजनों पर विशेष ध्यान दे रही है। STLA प्लेटफॉर्म के माध्यम से कंपनी भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उन्नत तकनीकी आधार तैयार कर रही है। इसके साथ ही बैटर...

AUTOMOBILE INDUSTRY IN USA

 संयुक्त राज्य अमेरिका में ऑटोमोबाइल उद्योग  संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का ऑटोमोबाइल उद्योग विश्व के सबसे पुराने, बड़े और प्रभावशाली उद्योगों में से एक है। इस उद्योग ने न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर परिवहन, तकनीक और औद्योगिक विकास की दिशा भी तय की है। बीसवीं सदी की शुरुआत में हेनरी फोर्ड द्वारा असेंबली लाइन प्रणाली की शुरुआत ने ऑटोमोबाइल उत्पादन को क्रांतिकारी रूप से बदल दिया। अमेरिका के ऑटोमोबाइल उद्योग के प्रमुख स्तंभ “बिग थ्री” माने जाते हैं—जनरल मोटर्स (General Motors), फोर्ड मोटर कंपनी (Ford Motor Company) और स्टेलांटिस (Stellantis, पूर्व में क्राइस्लर)। इन कंपनियों ने दशकों तक कार, ट्रक और एसयूवी के उत्पादन में नेतृत्व किया। इनके अलावा टेस्ला जैसी नई कंपनियों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में अमेरिका को अग्रणी बना दिया है। यह उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है। वाहन निर्माण के साथ-साथ पुर्ज़ा उद्योग, स्टील, रबर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, डीलरशिप और मरम्मत सेवाएँ भी इससे जुड़ी हैं। मिशिगन...

KANDYAN DANCE

 कैंडियन नृत्य (Kandyan Dance) कैंडियन नृत्य श्रीलंका का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से देश के मध्य पर्वतीय क्षेत्र कैंडि (Kandy) से संबंधित है। यह नृत्य श्रीलंका की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इसकी जड़ें प्राचीन धार्मिक अनुष्ठानों और लोक परंपराओं में हैं। प्रारंभ में यह नृत्य देवी-देवताओं की आराधना और रोग-निवारण अनुष्ठानों में किया जाता था। कैंडियन नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऊर्जावान मुद्राएँ, तेज़ ताल और शक्तिशाली शारीरिक गतियाँ हैं। इसमें ऊँची छलांगें, घूमते हुए कदम, घुटनों को मोड़कर नृत्य करना और संतुलन बनाए रखना शामिल होता है। नर्तक शरीर की लचक और शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन करते हैं। यह नृत्य आमतौर पर पुरुषों द्वारा किया जाता था, लेकिन आधुनिक समय में महिलाएँ भी इसमें भाग लेने लगी हैं। इस नृत्य में प्रयुक्त पारंपरिक वेशभूषा अत्यंत आकर्षक होती है। पुरुष नर्तक रंगीन कढ़ाईदार पोशाक, चांदी के आभूषण, कमरबंद और विशेष सिर पर पहनने वाला मुकुट धारण करते हैं। पैरों में बंधी घुँघरू जैसी घंटियाँ नृत्य की ताल को और प्रभावशाली बनाती हैं। संगी...

56 BHOG

 छप्पन भोग (56 Bhog) की सामग्री  छप्पन भोग भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले 56 प्रकार के व्यंजनों का पावन भोग है। इसमें मीठे, नमकीन, पकवान, पेय और फल-सब्ज़ियाँ शामिल होती हैं। परंपरा अनुसार इसके रूप अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़ा भिन्न हो सकते हैं, नीचे एक प्रचलित सूची दी जा रही है— खीर चावल कढ़ी दाल पूरी कचौड़ी समोसा पकौड़ी सादा रोटी घी लगी रोटी पराठा मठरी नमकपारा शक्करपारा मालपुआ जलेबी गुलाब जामुन रसगुल्ला लड्डू बूंदी पेड़ा बर्फी खाजा हलवा श्रीखंड दही माखन (मक्खन) मिश्री शहद फलाहार केला सेब अंगूर अनार नारियल पान सुपारी इलायची सौंफ दूध छाछ लस्सी मेवा (काजू, बादाम) किशमिश पिस्ता खांड चूरमा बेसन के लड्डू सत्तू खिचड़ी सब्ज़ी रायता अचार पापड़ घी जल (पानी) निष्कर्ष: छप्पन भोग भक्ति, समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। यह भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और कृतज्ञता प्रकट करने का एक पवित्र माध्यम माना जाता है।

FOLK DANCE OF SRI LANKA

 श्रीलंका के लोक नृत्य (Folk Dance of Sri Lanka) श्रीलंका एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला द्वीपीय देश है, जहाँ के लोक नृत्य उसकी परंपराओं, धार्मिक विश्वासों और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं। श्रीलंका के लोक नृत्य मुख्य रूप से सिंहली, तमिल और कंडीअन परंपराओं से जुड़े हुए हैं। ये नृत्य प्राचीन काल से उत्सवों, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक आयोजनों में किए जाते रहे हैं। श्रीलंका का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य कंडीअन नृत्य (Kandyan Dance) है, जो मध्य श्रीलंका के कंडी क्षेत्र से संबंधित है। यह नृत्य शक्तिशाली कदमों, ऊँची छलांगों और लयबद्ध शारीरिक गतियों के लिए जाना जाता है। पारंपरिक कंडीअन नर्तक रंग-बिरंगे वस्त्र, चांदी के आभूषण और विशेष सिर की सजावट पहनते हैं। यह नृत्य प्रायः ढोल (गेटा बेराया) की ताल पर किया जाता है। दूसरा प्रमुख लोक नृत्य लो-कंट्री नृत्य (Low Country Dance) है, जो श्रीलंका के तटीय क्षेत्रों में प्रचलित है। यह नृत्य मुखौटों के उपयोग और नाटकीय भाव-भंगिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। इसमें लोक कथाओं, देवी-देवताओं और आत्माओं से जुड़ी मान्यताओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता ...

LINE DANCE

 लाइन डांस (Line Dance) लाइन डांस एक लोकप्रिय सामूहिक नृत्य शैली है, जिसमें नर्तक एक सीधी पंक्ति या कई समानांतर पंक्तियों में खड़े होकर नृत्य करते हैं। इस नृत्य में सभी प्रतिभागी एक ही दिशा में मुख करके, समान ताल और कदमों के साथ नृत्य करते हैं। लाइन डांस की विशेषता यह है कि इसमें जोड़ी या साथी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि हर व्यक्ति स्वतंत्र रूप से समूह के साथ तालमेल बनाकर नृत्य करता है। लाइन डांस की उत्पत्ति मुख्य रूप से अमेरिका में मानी जाती है, जहाँ यह कंट्री और वेस्टर्न संगीत के साथ विकसित हुआ। समय के साथ यह नृत्य शैली अन्य संगीत विधाओं जैसे पॉप, रॉक, जैज़ और लैटिन संगीत तक फैल गई। आज लाइन डांस केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया सहित विश्व के अनेक देशों में लोकप्रिय है। इस नृत्य में कदमों का क्रम पहले से निर्धारित होता है, जिसे “स्टेप पैटर्न” कहा जाता है। ये कदम आमतौर पर सरल होते हैं, जिससे हर आयु वर्ग के लोग इसे आसानी से सीख सकते हैं। लाइन डांस में आगे-पीछे चलना, दाएँ-बाएँ घूमना, ताली बजाना और हल्की छलांग जैसे आकर्षक कदम शामिल होते हैं। लाइन डांस ...

SQUAIRE DANCE

 स्क्वायर डांस (Square Dance) स्क्वायर डांस संयुक्त राज्य अमेरिका का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है, जिसे विशेष रूप से सामाजिक और सामूहिक नृत्य के रूप में जाना जाता है। यह नृत्य चार जोड़ों द्वारा किया जाता है, जो वर्ग (स्क्वायर) के आकार में खड़े होते हैं, इसी कारण इसे “स्क्वायर डांस” कहा जाता है। इस नृत्य की जड़ें यूरोपीय लोक नृत्यों, विशेषकर इंग्लैंड और फ्रांस के कंट्री डांस में पाई जाती हैं, जिन्हें यूरोपीय प्रवासियों द्वारा अमेरिका लाया गया। समय के साथ यह नृत्य अमेरिकी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया। स्क्वायर डांस की सबसे अनोखी विशेषता “कॉलर” की भूमिका होती है। कॉलर नृत्य के दौरान प्रतिभागियों को निर्देश देता है, जैसे घूमना, साथी बदलना, आगे-पीछे चलना या घेरा बनाना। नर्तक कॉलर के निर्देशों के अनुसार तालबद्ध ढंग से कदम मिलाते हैं। इससे नृत्य में उत्साह, एकरूपता और आनंद बना रहता है। इस नृत्य में प्रयुक्त संगीत प्रायः पारंपरिक अमेरिकी लोक संगीत होता है, जिसमें वायलिन (फिडल), गिटार और बैंजो जैसे वाद्य यंत्र शामिल होते हैं। संगीत की लय सरल, तेज और जीवंत होती है, जिससे नर्तकों में ऊर्जा का...

DHOLAVIRA/GUJARAT

 धोलावीरा धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जो भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित है। यह स्थल कच्छ के रण में खदिर बेट द्वीप पर अवस्थित है। धोलावीरा की खोज वर्ष 1967–68 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। यह स्थल हड़प्पा सभ्यता के विकसित नगरीय जीवन, उन्नत नगर नियोजन और जल प्रबंधन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। धोलावीरा की नगर रचना अन्य हड़प्पा स्थलों से भिन्न है। यहाँ नगर को तीन भागों—ऊपरी नगर, मध्य नगर और निचले नगर—में विभाजित किया गया था। चारों ओर मजबूत पत्थर की दीवारें बनाई गई थीं। सड़कों की योजना सुव्यवस्थित थी और भवनों का निर्माण बड़े पत्थरों से किया गया था, जो इसकी विशिष्टता को दर्शाता है। धोलावीरा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्भुत जल संरक्षण व्यवस्था है। यहाँ वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए विशाल जलाशय, कुंड और नहरें बनाई गई थीं। शुष्क और रेगिस्तानी क्षेत्र में इतनी विकसित जल प्रणाली उस समय की वैज्ञानिक समझ और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण है। यहाँ से मिले अवशेषों में मिट्टी के बर्तन, मोहरें, तांबे क...