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Showing posts from January, 2026

INDO EU TRADE DEALS 2026

 भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement - FTA) एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे दोनों पक्षों ने "मदर ऑफ ऑल डील्स" (सभी डीलों की माँ) कहा है। यह समझौता 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मौजूद थे। मुख्य बातें (Key Highlights) कब शुरू हुआ और कितना बड़ा है? बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, जो 2013 में रुकी थी। 2022 में दोबारा शुरू हुई और अब 2026 में पूरी हुई। यह भारत और EU का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों (दुनिया की एक-तिहाई आबादी) को कवर करता है और वैश्विक GDP का 25% (करीब $27 ट्रिलियन) का बाजार बनाता है। टैरिफ (शुल्क) में कटौती EU भारत से आने वाले 99.5% सामान पर टैरिफ खत्म या बहुत कम करेगा (7 साल में ज्यादातर शून्य)। इससे भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों को फायदा होगा। भारत EU से आने वाले 96.6%...

PADMSRI R V S MANI

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  डॉ. पद्मश्री आर.वी.एस. मणि (R.V.S. Mani) श्री रामास्वामी वेंकट सुब्रमण्यम मणि (R.V.S. Mani) एक पूर्व केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) अधिकारी हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो सिविल सेवा (Civil Service) क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था वर्तमान स्थिति: रिटायर्ड हैं, लेखन और सार्वजनिक चर्चाओं में सक्रिय। 5 किताबें लिखीं, जो राजनीतिक हस्तक्षेप और आतंकवाद जांच पर आधारित हैं। जीवनी (संक्षिप्त परिचय) जन्म: दिल्ली में जन्मे (पूर्ण तिथि सार्वजनिक नहीं, लेकिन परिवार सरकारी सेवा से जुड़ा)। पिता के.आर. रामास्वामी भी MHA में थे और रिटायर हुए। शिक्षा: दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से M.Sc. (Human Resource Development)। पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर की योग्यताएं। करियर: सेंट्रल सेक्रेटेरिएट सर्विस (CSS) में शामिल। मुख्य पद: Under Secretary, Internal Security Division, Ministry of Home Affairs (2006-2010)। योगदान: राष्ट्रीय सुरक्ष...

IPS KUNDAN KRISHNAN

 आईपीएस कुंदन कृष्णन की नवीनतम अपडेट्स और जीवनी (जनवरी 2026 तक) श्री कुंदन कृष्णन बिहार कैडर के एक वरिष्ठ और चर्चित आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें उनकी साहसी, कठोर और अपराध-विरोधी पुलिसिंग के लिए जाना जाता है। अपराधी उनके नाम से खौफ खाते हैं। जनवरी 2026 तक, वे बिहार पुलिस के डायरेक्टर जनरल (ऑपरेशंस), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के पद पर तैनात हैं, साथ ही स्पेशल ब्रांच का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। गैलेंट्री मेडल (वीरता पदक) 2026: गणतंत्र दिवस 2026 पर राष्ट्रपति द्वारा मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित। यह सम्मान 2002 में छपरा (सारण) जेल विद्रोह को कुचलने में उनकी भूमिका के लिए मिला, जहां उन्होंने AK-47 लेकर ऑपरेशन लीड किया था। STF में सक्रियता: 2025 में STF ने उनके नेतृत्व में 1682 अपराधियों (143 रिवॉर्डेड सहित) को गिरफ्तार किया, 6 अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया (जिनमें 5 रिवॉर्डेड और 2 नक्सली शामिल)। अपराधी अब भाग रहे हैं या सरेंडर कर रहे हैं। अन्य: NVD2026 (नेशनल वोटर्स डे) में विशेष अवॉर्ड मिला। पहले किसानों से जुड़े विवादास्पद बयान पर माफी मांगी थी (जुलाई 2025)। जीवनी (संक्...

IAS PRIYANKA NIRANJAN

 आईएएस प्रियंका निरंजन  श्रीमती प्रियंका निरंजन एक प्रमुख भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जो उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की हैं। वे अपनी सख्त प्रशासनिक शैली, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कानून व्यवस्था पर फोकस के लिए जानी जाती हैं। जनवरी 2026 तक, वे गोंडा जिले की जिलाधिकारी (District Magistrate and Collector) के पद पर तैनात हैं, जिसका चार्ज उन्होंने 28 जुलाई 2025 को ग्रहण किया था। यह उनका उत्तर प्रदेश में चौथा लगातार डीएम पद है (पहले जालौन, बस्ती और मिर्जापुर में कार्यरत रहीं)। नवीनतम अपडेट्स (2026) वर्तमान पद: गोंडा DM & Collector (जुलाई 2025 से जारी)। यहां वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों (घाघरा नदी से सटे इलाकों) का दौरा कर राहत कार्यों पर फोकस कर रही हैं, साथ ही ग्रामीण विकास और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में सक्रिय हैं। प्रशासनिक शैली: फील्ड इंस्पेक्शन और जन-भागीदारी पर जोर। पहले जिलों में नदियों के पुनरुद्धार जैसे कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी। कोई बड़ा बदलाव: 2026 में कोई नई ट्रांसफर या प्रमोशन की खबर नहीं। वे लगातार डिस्ट्रिक्ट लेवल पर ही त...

PADMSRI NARAYAN VYAS

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  डॉ. पद्मश्री नारायण व्यास (Dr. Narayan Vyas) डॉ. नारायण व्यास एक वरिष्ठ भारतीय पुरातत्वविद् (आर्कियोलॉजिस्ट) हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो पुरातत्व (Archaeology) क्षेत्र में उनके जीवनभर के योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था, और मध्य प्रदेश के उज्जैन से चुने गए प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह सम्मान उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में 37+ वर्षों की सेवा, उत्खनन, शोध, एपिग्राफी (शिलालेख अध्ययन), इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के लिए मिला है। प्रतिक्रिया: डॉ. व्यास ने कहा, "यह सम्मान मेरी तपस्या का फल है... मैं अभी भी काम कर रहा हूं, जैसे भीमबेटका की गुफा चित्रों पर।" उन्होंने इसे देश की धरोहर और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला बताया। परिवार में जश्न का माहौल रहा, और उन्होंने गुरु डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को समर्पित किया। प्रशंसा: ...

PADMSRI MAMIDALA JAGDISH KUMAR

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  डॉ. पद्मश्री मामिडाला जगदीश कुमार (Prof. Mamidala Jagadesh Kumar) प्रोफेसर मामिडाला जगदीश कुमार एक प्रमुख भारतीय शिक्षाविद्, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और शिक्षा प्रशासक हैं। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो साहित्य एवं शिक्षा (Literature and Education) क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह सम्मान उन्हें उच्च शिक्षा में सुधारों (जैसे CUET, NEP 2020 कार्यान्वयन, डिस्टेंस लर्निंग, UGC NET सुधार आदि), IIT दिल्ली में शिक्षण-शोध, JNU और UGC के नेतृत्व के लिए मिला है। वर्तमान स्थिति: अप्रैल 2025 में UGC चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त। अब वे मुख्य रूप से शोध और लेखन में सक्रिय हैं। कोई नया बड़ा पद नहीं संभाला है। जीवनी (संक्षिप्त परिचय) जन्म: 8 अप्रैल 1960, ममीडाला गांव, टिप्परथी मंडल, नलगोंडा जिला, तेलंगाना (वर्तमान आयु: 65-66 वर्ष)। परिवार: पिता एम. रंगा राव (...

PADMSRI LARS CHRISTIAN KOCH

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  डॉ. पद्मश्री लार्स-क्रिश्चियन कोच (Prof. Dr. Lars-Christian Koch) प्रोफेसर (डॉ.) लार्स-क्रिश्चियन कोच एक प्रसिद्ध जर्मन एथनोम्यूजिकोलॉजिस्ट (संगीतशास्त्री) हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उन्हें कला (Arts) क्षेत्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति उनके गहन योगदान के लिए दिया गया है। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह पुरस्कार उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत (खासकर उत्तर भारतीय राग संगीत) की थ्योरी और प्रैक्टिस, बौद्ध संगीत, रवींद्र संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के निर्माण पर उनके दशकों के शोध के लिए मिला है। प्रशंसा और बधाई: भारतीय राजदूत अजित वी. गुप्ते (जर्मनी में) ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। भारतीय दूतावास और टैगोर सेंटर ने उनके भारत-जर्मनी सांस्कृतिक आदान-प्रदान में योगदान की सराहना की। वर्तमान पद: 2018 से वे हंबोल्ट फोरम (Humboldt Forum), बर्लिन में Staatliche...

PADMSRI PALKONDA VIJAY ANANDA REDDY

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  डॉ. पद्मश्री पलकोंडा विजय आनंद रेड्डी डॉ. पलकोंडा विजय आनंद रेड्डी (Dr. Palkonda Vijay Anand Reddy) एक प्रसिद्ध भारतीय ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) हैं, जिन्हें हाल ही में पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कैंसर के इलाज में उनके योगदान के लिए दिया गया है। यह खबर 25-26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस पर घोषित हुई थी, और यह तेलंगाना से चुने गए कई पद्मश्री प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों में डॉ. रेड्डी को मेडिसिन (ऑन्कोलॉजी) क्षेत्र में पद्मश्री दिया गया। उन्होंने इस सम्मान को विनम्रता से स्वीकार किया और कहा, "मैं इस सम्मान को बहुत विनम्रता से स्वीकार करता हूं। यह मेरे मरीजों, परिवार, शिक्षकों और अपोलो हॉस्पिटल्स को समर्पित है, जहां मैं पिछले तीन दशकों से गरीब बच्चों का मुफ्त इलाज कर रहा हूं।" पुरस्कार समर्पण: उन्होंने पुरस्कार को अपने मरीजों (खासकर बच्चों और गरीब परिवारों) को समर्पित किया। CURE फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने कैंसर पीड़ितों की ...

HARSHANKAR PARSAI

 हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य के सबसे प्रमुख व्यंग्यकारों में से एक थे, जिन्होंने व्यंग्य को मात्र हास्य-मनोरंजन से ऊपर उठाकर समाज की गहरी विसंगतियों, पाखंड, राजनीति और रूढ़िवाद पर तीखी लेकिन सटीक टिप्पणी करने वाली विधा बनाया। उनकी लेखनी सरल, बोलचाल वाली और आम आदमी की भाषा में थी, जो सीधे दिल तक उतरती थी। जीवन परिचय: हरिशंकर परसाई का जन्म 22 अगस्त 1924 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी (या जमानी) नामक छोटे से गाँव में हुआ था (इटारसी के निकट)। उनका परिवार साधारण ब्राह्मण परिवार था। पिता का नाम झुमकलाल परसाई और माता का नाम चंपा बाई था। बचपन में ही उन्होंने बड़े दुख झेले—1936-37 में प्लेग महामारी में माँ की मृत्यु हो गई, जब वे मात्र 13 साल के थे। कुछ समय बाद पिता भी लाइलाज बीमारी से चल बसे। चार छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने मैट्रिक के समय से ही नौकरी शुरू कर दी और पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। शुरुआत में उन्होंने विभिन्न नौकरियाँ कीं—18 साल की उम्र में जंगल विभाग में क्लर्क, फिर खंडवा के न्...

PADMSRI KALAMANDALAM VIMALA MENON

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  पद्मश्री कालामंडलम विमला मेनन (Kalamandalam Vimala Menon) 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित की गई एक सुप्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना, अध्यापिका और मोहिनियट्टम (Mohiniyattam) की अग्रणी विदुषी हैं। उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनकी लगभग ६३ वर्षों से भी अधिक समर्पित सेवा, शोध और शिक्षण के लिए दिया गया है।  विमला मेनन का जन्म 7 जनवरी 1943 को त्रिस्सूर (थ्रिस्सूर), केरल में हुआ था और उन्होंने केरल कलामंडलम (Kerala Kalamandalam) से मोहिनियट्टम और भरतनाट्यम की शिक्षा प्राप्त की। वे केरल नाट्य अकादमी, तिरुवनंतपुरम की संस्थापक और निदेशक भी हैं, जहाँ उन्होंने हजारों छात्रों को मोहिनियट्टम में प्रशिक्षित किया है और इस नृत्य-शैली को मजबूत पारंपरिक जड़ों से जोड़ते हुए उसे आधुनिक संदर्भ में भी जीवंत किया है।  विमला मेनन ने मोहिनियट्टम के पोशाक, मुद्रा और संगीत संयोजन में कई सुधार किये हैं, जिससे इस कला-रूप की प्रस्तुति और व्यापक जनता के बीच लोकप्रियता बढ़ी है। उनके विद्यार्थी पूरे देश में स्थापित कलाकार बने हैं और उन्होंने नृत्य के मंचों पर कई बार भ...

PADMSRI NURUDDIN AHAMED

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  पद्मश्री नूरुद्दीन अहमद (Nuruddin Ahmed) को 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, और यह उन्हें कला, विशेषकर मूर्तिकला, थिएटर और स्टेज क्राफ्ट (मंचीय कला-निर्देशन) में उनके बहुआयामी और उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। वे असम के मशहूर कलाकार, मूर्तिकार, थिएटर कलाकार और कला निर्देशक हैं, जिनके काम ने असम की मोबाइल थिएटर संस्कृति को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है और उनकी कला न केवल कला-प्रेमियों बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच भी गहराई से लोकप्रिय रही है।  नूरुद्दीन अहमद का जन्म 17 जनवरी 1958 को असम के नलबाड़ी जिले के साथियाकुची गाँव में हुआ था, जहाँ से उन्होंने अपनी प्रारंभिक कला की राह शुरू की। उन्होंने जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट्स से औपचारिक कला-शिक्षा प्राप्त की और बाद में ललित कला अकादमी से आधुनिक मूर्तिकला तकनीकों का प्रशिक्षण लिया, साथ ही कठपुतली कला (puppetry) में भी विशेषज्ञता हासिल की।  अहमद ने दशकों से मूर्तिकला, कठपुतली, रंगमंचीय परिदृश्य-डिज़ाइन और स्टेज सेट-डिज़ाइन में काम किया है और उन्होंने असम की समृद्ध सांस्क...

PADMSRI MANGALA KAPOOR

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  पद्मश्री मंगला कपूर (Prof. Mangala Kapoor) एक प्रेरणादायक भारतीय शास्त्रीय संगीतकार, शिक्षिका और समाज-प्रेरक हैं, जिन्हें भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा है। यह चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों के लिए दिया गया है — सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर इसकी घोषणा की।  मंगला कपूर का जीवन संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। जब वे सिर्फ 12 वर्ष की उम्र की थीं, तभी उन पर तेज़ाब हमला (acid attack) हुआ, जिससे उनका चेहरा गंभीर रूप से विकृत हो गया और उन्हें कई साल अस्पताल में बिताने पड़े तथा 37 से अधिक शल्यक्रियाएँ (surgeries) करानी पड़ीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और संगीत को अपनी शक्ति और पहचान बनाया।  कपूर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी तक की शिक्षा पूरी की और 1989 से 2019 तक वहीं संगीत विभाग में शिक्षक एवं एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने संगीत को केवल कला नहीं बल्कि समाज-सुधा...

PADMSRI KUMAR BOSE

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  पद्मश्री पंडित कुमार बोस (Pt Kumar Bose) 2026 के पद्मश्री सम्मान से सम्मानित एक प्रतिष्ठित भारतीय तबला वादक (Tabla Maestro) और भारतीय शास्त्रीय संगीत के संगीतकार हैं, जिन्हें भारतीय संस्कृति और संगीत-धरोहर के लिये उनके लम्बे, समर्पित और उत्कृष्ट योगदान के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है — सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर यह घोषणा की।  पंडित कुमार बोस का जन्म 4 अप्रैल 1953 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत में एक संगीत-परिवार में हुआ था, जहाँ उनके पिता बिस्वनाथ बोस स्वयं एक तबला वादक थे और उन्होंने ही सबसे पहले लय और ताल की शिक्षा दी। उनकी माँ विदुषी भारती बोस एक प्रख्यात सितार वादिनी थीं, जिन्होंने उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत के बुनियादी पहलुओं की समझ दी। उनके परिवार में संगीत ही जीवन-धारा थी, और इसी प्रेरणा-भरे माहौल ने उन्हें बचपन से ही तबला वादन में आगे बढ़ाया।  कुमार बोस ने मात्र चार वर्ष की आयु में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन दिया और 14 साल की उम्र तक ही वे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुति देने लगे। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रतिष्ठि...

PADMSRI MADHAVAN RANGANATHAN

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  पद्मश्री मधवन रंगनाथन् (Madhavan Ranganathan) 2026 में पद्मश्री सम्मान पाने वाले एक प्रतिष्ठित भारतीय कलाकार, अभिनेता, पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता हैं, जिन्हें भारतीय सिनेमा और संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला है। माधवन (पूरा नाम रंगनाथन् माधवन) का जन्म 1 जून 1970 को जमशेदपुर (अब झारखण्ड, भारत) में हुआ था और उन्होंने 1990 के दशक में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की, जिसके बाद वे तमिल, तेलुगु और हिन्दी फिल्म उद्योगों में अपनी विविध भूमिकाओं के लिये प्रसिद्ध हुए।  मधवन ने तेलुगु और तमिल फिल्मों में Alai Payuthey और Minnale जैसे फिल्मों से पहचान बनाई, और बाद में Rehnaa Hai Tere Dil Mein (2001) से हिन्दी फिल्मों में भी अपनी जगह बनाई। उनके करियर की कुछ सबसे यादगार भूमिकाओं में 3 Idiots, Vikram Vedha, Tanu Weds Manu सीरीज और Rocketry: The Nambi Effect जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन शामिल हैं, जिनसे उन्होंने आलोचकों और दर्शकों दोनों की प्रशंसा जीती है।  माधवन ने अभिनय के अलावा पटकथा लेखन और निर्देशन में भी काम किया है और उन...

PADMSRI MAHENDRA KUMAR MISHRA

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  पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा (Mahendra Kumar Mishra) एक प्रतिष्ठित भाषा वैज्ञानिक, लोककथा शोधकर्ता और शिक्षाविद् हैं, जिन्हें भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है — यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उनके भाषा, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।  मिश्रा का जन्म ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के सीनापाली क्षेत्र में हुआ था और उन्होंने अपनी लगभग चार दशक लंबी सेवा में ओडिशा की आदिवासी व क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और शिक्षा में योगदान किया। वे एक उत्कृष्ट लिंग्विस्ट (भाषाविद्) और फोल्कलोरिस्ट (लोककथा-शोधकर्ता) हैं, जिन्होंने कई जनजातीय समुदायों की मूल कथाएँ, मिथक, कहावतें और गीत दस्तावेज़ीकृत कर उन्हें पुस्तकों और शोध कार्यों के रूप में आम जनता तक पहुँचाया है, जिससे इन बोली-भाषाओं और संस्कृति को लिखित इतिहास में स्थान मिला।  उन्होंने मूल भाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा (Mother Tongue Based Multilingual Education) को अपनाने और स्कूल पाठ्यक्रम में आदिवासी भाषाओं को शामिल करने में अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे...

KALPETTA

कल्पेट्टा केरल राज्य के वायनाड जिले का एक सुंदर और शांत नगर है। यह वायनाड का जिला मुख्यालय भी है। पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच बसा कल्पेट्टा प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का वातावरण साल भर सुहावना रहता है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कल्पेट्टा के चारों ओर घने जंगल, चाय और कॉफी के बागान तथा ऊँची-नीची पहाड़ियाँ हैं। यहाँ की हरियाली और शुद्ध हवा मन को शांति प्रदान करती है। पास में स्थित पूकोड झील एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह झील पहाड़ियों से घिरी हुई है और यहाँ नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा, चेम्ब्रा पीक भी एक लोकप्रिय स्थान है, जहाँ से पूरे क्षेत्र का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। कल्पेट्टा का ऐतिहासिक महत्व भी है। एडक्कल गुफाएँ यहाँ के पास स्थित हैं, जिनमें प्राचीन चित्र और शिलालेख पाए गए हैं। ये गुफाएँ इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ कई प्राचीन मंदिर और चर्च भी हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। कल्पेट्टा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है। यहाँ काली मिर्च...

PADMSRI MAHENDRA NATH ROY

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  पद्मश्री महेंद्र नाथ रॉय (Mahendra Nath Roy) एक प्रतिष्ठित केमिस्ट्री प्रोफेसर, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा 2026 के पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान के तहत उन्हें “Unsung and Unique Hero” यानी ऐसे अदृश्य और अनजान नायकों में शामिल किया गया, जिन्होंने बिना किसी शो-शोर के समाज और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।  महेंद्र नाथ रॉय खेतिहर परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद उन्होंने कहा कि यह “उनके खामोश कार्यों” को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने जैसा है, और यह सम्मान उन्होंने अपने माता-पिता, शिक्षकों और समाज को समर्पित किया।  वे एक प्रख्यात रसायन विज्ञान (Chemistry) प्रोफेसर रहे हैं और नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री के पूर्व डीन (Dean of Faculties of Sciences, Arts, Commerce & Law) के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वे अलिपुरद्वार यूनिवर्सिटी (Alipurduar Univers...

PADMSRI KUMARSAMY THANGARAJ

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  डॉ. कुमारास्वामी थंगराज (Kumaraswamy Thangaraj) एक प्रसिद्ध भारतीय जीन वैज्ञानिक (Geneticist) और अणु-जीवविज्ञान (Molecular Biology) शोधकर्ता हैं, जिन्हें हाल ही में भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है, जो देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, उनके मानव जनसंख्या अनुवांशिकी और चिकित्सा जीनोमिक्स के क्षेत्र में लंबी और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए।  डॉ. थंगराज का जन्म 2 जून 1963 को चेय्यूर, कांचीपुरम ज़िला, तमिलनाडु में हुआ था और उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अपने बी.एससी., एम.एससी और पीएच.डी. तक की पढ़ाई पूरी की। � वे हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं और उन्होंने मानव जनसंख्या अनुवांशिकी (Population Genetics) और मानव रोगों की जीन आधारित वजहों पर गहन शोध किया है।  उनके शोध में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष शामिल हैं कि भारतीय आबादी मुख्यतः दो मूलभूत पूर्वज समूहों — एनसीआई (Ancestral North Indians) और एएसआई (Ancestral South Indians) — से उत्पन्न हुई है और आंधमान के द्वीपों के आदिवासी समूह, जै...

HARI MADHAB MUKHOPADHYAY

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   पद्मश्री हरी माधब मुखोपाध्याय (Hari Madhab Mukhopadhyay) हरी माधब मुखोपाध्याय को पद्मश्री 2026 के लिए मरणोपरांत (Posthumous) सम्मान से नवाज़ा गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।  यह सम्मान राष्ट्रपति द्वारा भारत के गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किया गया था।  उनके परिवार (पत्नी रीना मुखोपाध्याय और बेटे कृष्णेंदु मुखोपाध्याय) को यह सम्मान प्राप्त करने पर गर्व और खुशी व्यक्त की गई।  🎭 जीवन परिचय (Biography in Hindi) 🧑‍🎨 प्रारंभिक जीवन पूरा नाम: हरी माधब मुखोपाध्याय जन्म: 3 अप्रैल 1941, बालुरघाट, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था।  वे पश्चिम बंगाल के बालुरघाट के हैं, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा और प्रारंभिक थिएटर रुचि विकसित की। 🎭 थिएटर करियर और योगदान 🎬 थिएटर में योगदान हरी माधब मुखोपाध्याय एक प्रसिद्ध थिएटर कलाकार, नाटककार, निर्देशक और थिएटर आयोजक थे।  उन्होंने ट्रितिर्थ (Tritirtha) नामक थिएटर समूह की स्थापना की, जिसने कई यादगार नाटकों को मंच पर लाया।  उनके निर्देशन और अभिनय में करीब 58 से अधिक न...

PADMSRI K VIJAY KUMAR

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  डॉ. के. विजय कुमार (K Vijay Kumar) एक प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जिन्हें गणतंत्र दिवस 2026 पर पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। वे तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और अपने दीर्घत्व अनुभव, असाधारण सेवा और चुनौतियों भरे अभियानों के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। सबसे प्रमुख रूप से, विजय कुमार को 2004 में चलाए गए ‘ऑपरेशन कोकून’ के लिए जाना जाता है — एक उच्च-सूत्रबद्ध विपुल अभियान जिसका नेतृत्व उन्होंने विशेष टास्क फ़ोर्स (STF) के रूप में किया था और इसी अभियान में प्रसिद्ध वनडाकू वीरप्पन को समाप्त किया गया था, जो दक्षिण भारत में दो दशक से अधिक समय तक सेना और पुलिस के लिए सबसे बड़े चैलेंजों में से एक था।  अपनी सेवा के दौरान विजय कुमार ने पुलिस और सुरक्षा बलों के भीतर कई प्रमुख पदों पर कार्य किया, जिनमें चेन्नई पुलिस आयुक्त, सीआरपीएफ (CRPF) के महानिदेशक (DG) और सदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद के निदेशक शामिल हैं। उनकी विशेषज्ञता मुख्यतः जंगल युद्ध, उग्रवाद-रोधी अभियानों और रणनीतिक सुरक्षा संचालन में रही, जिसने...

PADMSRI PRATEEK SHARMA

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  डॉ. प्रतीक शर्मा (Dr. Prateek Sharma) एक internationally मान्यता प्राप्त गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट (gastroenterologist) और चिकित्सा क्षेत्र के अग्रणी शोधकर्ता हैं जिन्हें भारत सरकार ने वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान से पुरस्कृत किया है। यह सम्मान उन्हें चिकित्सा (Medicine) के क्षेत्र में आधुनिक निदान, ऊन्नत एंडोस्कोपिक उपचार और वैश्विक स्तर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के प्रबंधन में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।  डॉ. शर्मा का जन्म चंडीगढ़, भारत में हुआ और उन्होंने एम.एस. यूनिवर्सिटी ऑफ़ बारोडा से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज ऑफ़ विस्कॉन्सिन, मिल्वौकी में आंतरिक चिकित्सा (Internal Medicine) का रेजिडेंसी प्रशिक्षण पूरा किया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना, टुसॉन में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में विशेष विशेषज्ञता हासिल की। आज वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कानसास स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी फ़ेलोशिप प्रोग्राम के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।  डॉ. शर्मा की चिकित्सा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू अंत: जीआई (GI) रोगों और कैंसर न...

PADMSRI K RAMASAMY

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  डॉ. के. रामासामी (Dr. K. Ramasamy) एक प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और समाजसेवी हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण और दीर्घकालिक योगदान के लिए दिया गया, खासकर कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के सशक्तिकरण के लिए।  डॉ. रामासामी तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर के पूर्व कुलपति रहे हैं और उन्होंने कृषि शिक्षा को आधुनिक, व्यावहारिक और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके प्रयासों की वजह से कृषि शिक्षा में नवीन तकनीकों, बेहतर प्रशिक्षण और अनुसंधान-आधारित पद्धतियों को शामिल किया गया, जिससे छात्रों के साथ-साथ किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिला।  उनका मानना है कि कृषि का विकास केवल वैज्ञानिक ज्ञान से ही नहीं बल्कि किसानों के साथ साझेदारी से संभव है, इसलिए उन्होंने किसानों के लिए नई योजनाएँ और कार्यक्रम विकसित किए। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर विधवा महिलाओं को दुधारू पशु, मुर्गियाँ, भेड़...

PADMSRI KAILASH CHANDRA PANT

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  पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत (Kailash Chandra Pant) एक प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार, पत्रकार, लेखक और शिक्षा-सेवी हैं जिन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। वे मध्य प्रदेश के सागर ज़िले से संबंध रखते हैं और 1936 में इंदौर-महो के एक परिवार में पैदा हुए थे, जिनका मूल उत्तराखंड (बागेश्वर के खन्तोली गांव) से है। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार को अपना जीवन उद्देश्य बनाया, स्वतंत्र पत्रकारिता में प्रवेश किया और 22 साल तक साप्ताहिक ‘जनधर्म’ का सफल प्रकाशन किया, जिसने आधुनिक हिंदी पत्रकारिता को एक सामाजिक-सांस्कृतिक आवाज दी। इसके अलावा, उन्होंने ‘शिक्षा प्रदीप’, ‘दुरगामी आउटलुक’ और ‘अक्षरा’ जैसी पत्रिकाओं को प्रकाशित किया और स्वाध्याय विद्यापीठ की स्थापना कर शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। पंत जी ने आलोचनात्मक निबंधों और स्वतंत्र रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया और उन्हें पहले नेहरू साक्षरता पुरस्कार जैसी प्रतिष्ठित मान्यताएँ भी मिली हैं। पद्मश्री सम्मान पा...

PADMSRI KHEMRAJ SUNDRIYAL

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  पद्मश्री सम्मानित खेमराज सुंदरियाल (Khemraj Sundriyal) 🇮🇳 खेमराज सुंदरियाल — जीवनी और नवीनतम जानकारी 👤 मूल परिचय नाम: खेमराज सुंदरियाल (Khemraj Sundriyal) उम्र: लगभग 83–84 वर्ष (जनवरी 2026) मूल स्थान: सुमाड़ी गाँव, पौड़ी (गढ़वाल), उत्तराखंड, भारत  🏆 पद्मश्री 2026 — सम्मान उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री 2026 नागरिक सम्मान से नवाजा गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उन्हें हैंडलूम और पारंपरिक हस्तशिल्प के क्षेत्र में 60+ वर्षों के असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।  🎨 शुरुआती जीवन और शिक्षा खेमराज का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था और उनके परिवार का हैंडलूम या बुनाई से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने ताड़ के बुनाई और हैंडलूम टेक्नोलॉजी का अध्ययन सरकारी आईटीआई, श्रीनगर से किया।  🧵 करियर और योगदान 🪢 हैंडलूम में शुरुआत 1966 में पानीपत (हरियाणा) में वीवर्स सर्विस सेंटर से जुड़े और पानीपत को भारत के सबसे बड़े हैंडलूम हब में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पारंपरिक खेस बुनाई में नए डिज़ाइन और उत्पाद विकसित किए — जैसे बिस्तर के चा...

PADMSRI INDERJIT SINGH SIDHU

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  पद्मश्री हरिचरण सैइकिया (Haricharan Saikia) असम के प्रतिष्ठित सत्रीय (Sattriya) नृत्य के प्रणेता और शास्त्रीय कलाकार हैं, जिन्हें 2026 में भारत सरकार द्वारा “पद्मश्री” सम्मान से विभूषित किया गया है। यह सम्मान उन्हें छह दशकों से अधिक समय तक सत्रीय नृत्य कला के संरक्षण, अभ्यास और प्रचार-प्रसार में उनके अनमोल योगदान के लिए दिया गया है, जिससे असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। सत्रीय भारत की मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है और इसके संरक्षण में सैइकिया का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।  हरिचरण सैइकिया का जीवन सत्रीय कला से गहरे जुड़े रहा है। उन्होंने अपने बचपन में ही कमानाबारी सत्र (माझुली, लखीमपुर जिला) में गुरु मणिराम दत्ता बोरबायन के निर्देशन में सत्रीय नृत्य का अध्ययन शुरू किया था। अपने गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने नृत्य की तकनीक, अभिव्यक्ति और परंपरा की गहन समझ विकसित की, और बाद में अपने संस्थान के माध्यम से अनगिनत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने इस कला में महिलाओं की भागीदारी को भी प्...

PADMSRI HARICHARAN SAIKIA

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  पद्मश्री हरिचरण सैइकिया (Haricharan Saikia) असम के प्रतिष्ठित सत्रीय (Sattriya) नृत्य के प्रणेता और शास्त्रीय कलाकार हैं, जिन्हें 2026 में भारत सरकार द्वारा “पद्मश्री” सम्मान से विभूषित किया गया है। यह सम्मान उन्हें छह दशकों से अधिक समय तक सत्रीय नृत्य कला के संरक्षण, अभ्यास और प्रचार-प्रसार में उनके अनमोल योगदान के लिए दिया गया है, जिससे असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। सत्रीय भारत की मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है और इसके संरक्षण में सैइकिया का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।  हरिचरण सैइकिया का जीवन सत्रीय कला से गहरे जुड़े रहा है। उन्होंने अपने बचपन में ही कमानाबारी सत्र (माझुली, लखीमपुर जिला) में गुरु मणिराम दत्ता बोरबायन के निर्देशन में सत्रीय नृत्य का अध्ययन शुरू किया था। अपने गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने नृत्य की तकनीक, अभिव्यक्ति और परंपरा की गहन समझ विकसित की, और बाद में अपने संस्थान के माध्यम से अनगिनत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने इस कला में महिलाओं की भागीदारी को भी प्...

PADMSRI JYOTISH DEBNATH

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             पद्मश्री ज्योतिष देबनाथ (Jyotish Debnath)  पद्मश्री ज्योतिष देबनाथ पश्चिम बंगाल  के कलना के प्रतिष्ठित मसलिन-जामदानी (Jamdani muslin) शिल्पी हैं, जिन्हें 2026 के पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें भारत सरकार द्वारा कला और शिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए प्रदान किया गया है, जो कि देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। देबनाथ ने भारत की पारंपरिक और प्राचीन बुना-कारी कला को बचाए रखने, सुधारने और आगे बढ़ाने में दशकों तक निरंतर सेवा दी है। उनकी कलाकृति में विशेष रूप से हाथ से बुने गए मसलिन और जमदानी शाड़ियाँ शामिल हैं, जो न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी सूक्ष्मता, गुणवत्ता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं। ज्योतिष देबनाथ का जन्म लगभग 68 वर्ष पहले हुआ और उन्होंने पारिवारिक परंपरा के तहत बुना-कारी सीखना शुरू किया। उनके दादा देबेंद्रमोहन देबनाथ भी पहले इस कला में संलग्न थे और परिवार के साथ देश के विभाजन के बाद बंगाल के कलना-2 ब्लॉक के दत्तद्वारियाटन गाँव में बस गए। वहीं से देबनाथ ने अप...

JANARDAN BAPURAO BOTHE

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 यह जनार्दन बापूराव बोथे (Janardan Bapurao Bothe)  जनार्दन बापूराव बोथे महाराष्ट्र के अखिल भारतीय श्री गुरूदेव सेवा मंडळ के महासचिव (General Secretary) हैं और उन्हें 2026 में सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा “पद्मश्री” सम्मान से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपने जीवन को राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के विचारों और कार्यों का प्रचार–प्रसार, ग्रामीण विकास, शिक्षा और समाजसेवा के लिए समर्पित किया है। बोथे महाराज को गुरु मानते हैं और कहा कि यह पुरस्कार उनके आदर्शों और तुकडोजी महाराज के विचारों के सम्मान में समर्पित है।  उनका जन्म और प्रारंभिक जीवन विदर्भ के तेओसा तालुका के मोझरी गाँव (अमरावती, महाराष्ट्र) से जुड़ा है, जहाँ से उन्होंने अपने सामाजिक अभियान की शुरुआत की। बोथे ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण उत्थान के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए हैं, जिसमें आदिवासी और वंचित समुदायों के लिए विशेष पहलें शामिल हैं। उनका मानना है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए न केवल प्रेरणा बल्कि कर्म भी आवश्यक है।  पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद बोथे ...

PADMASRI DEEPIKA REDDY

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  दीपिका रेड्डी एक प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और गुरु हैं जो खासकर कुचिपुड़ी नृत्य कला के क्षेत्र में पाँच दशकों से अधिक समय से सक्रिय हैं। वह हैदराबाद, तेलंगाना से हैं और 1976 से इस कला को सीखने, सिखाने और प्रदर्शन करने में लगी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की संस्कृति का प्रभावी प्रतिनिधित्व किया है। उनके कार्यों के लिए उन्हें पहले संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे सम्मान मिल चुके हैं और हाल ही में भारत सरकार द्वारा 2026 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है, जो उनके जीवन समर्पण और कला के प्रति उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है।  दीपिका रेड्डी ने नृत्य को न सिर्फ प्रदर्शन के रूप में बल्कि जीवन के पवित्र कार्य के रूप में अपनाया है। उन्होंने कहा है कि बचपन से ही नृत्य की ओर उनका लगाव रहा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में भी यह उनकी पहली प्राथमिकता रही है। परिश्रम, अनुशासन और समर्पण की वजह से उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, जिनमें स्वास्थ्य से जुड़ी बाधाएँ भी शामिल थीं, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में अपने क...

IS INDIA A HINDU COUNTRY BY NATURE?

 भारत को “स्वभावतः हिंदू राष्ट्र” कहा जाए या नहीं—यह प्रश्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक—तीनों दृष्टियों से समझने योग्य है। इस विषय को भावनाओं के बजाय तथ्यों और संतुलित तर्कों के साथ देखना ज़रूरी है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखें तो भारत की सभ्यता अत्यंत प्राचीन है, जिसकी जड़ें वैदिक काल, सिंधु–सरस्वती सभ्यता, उपनिषद, रामायण–महाभारत और अनेक दर्शन परंपराओं में मिलती हैं। “हिंदू” शब्द मूलतः कोई संकीर्ण धार्मिक पहचान नहीं था, बल्कि यह सिंधु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए प्रयुक्त भौगोलिक-सांस्कृतिक पहचान थी। समय के साथ इसमें विविध दर्शनों—जैसे शैव, वैष्णव, शाक्त, जैन, बौद्ध आदि—का समावेश हुआ। सहिष्णुता, अनेकता में एकता, कर्म, धर्म और अहिंसा जैसे मूल्य भारतीय जीवन-पद्धति का हिस्सा बने। इस अर्थ में कहा जा सकता है कि भारत की संस्कृति का आधार व्यापक रूप से हिंदू सभ्यता से पोषित रहा है। लेकिन “हिंदू राष्ट्र” का प्रश्न केवल संस्कृति तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध आधुनिक राष्ट्र-राज्य और संविधान से है। भारत का संविधान 1950 में लागू हुआ, जिसने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी,...

SISSU VALLEY, MANALI

सिस्सू घाटी हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत सुंदर और शांत पर्यटन स्थल है। यह मनाली से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर अटल सुरंग (रोहतांग) के पार स्थित है। अटल सुरंग बनने के बाद सिस्सू तक पहुंचना बहुत आसान हो गया है, जिससे यहां पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सिस्सू घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों और स्वच्छ वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां की ठंडी और ताजी हवा मन को सुकून देती है। घाटी के बीचों-बीच बहती चंद्रा नदी इसकी शोभा को और भी बढ़ा देती है। नदी के किनारे बैठकर प्रकृति के अद्भुत दृश्य का आनंद लेना एक यादगार अनुभव होता है। सिस्सू का झरना यहां का मुख्य आकर्षण है। ऊंचे पहाड़ों से गिरता हुआ यह झरना दूर से ही दिखाई देता है और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। सर्दियों में जब यहां बर्फबारी होती है, तो पूरा क्षेत्र सफेद चादर से ढक जाता है और दृश्य अत्यंत मनोहारी हो जाता है। यहां साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोग ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का आनंद लेते हैं। सिस्सू गांव के लोग सरल और मेहमाननवाज होते हैं। उनकी पारंपरिक जीवनशैली और संस्कृति पर्यटकों को प्रभावित ...

PADMSRI K PANJANIVEL

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    K. Pajanivel  🏅 डॉ. के. पजानिवेल (K. Pajanivel) – Padma Shri पुरस्कार विजेता पूरा नाम: K. Pajanivel पुरस्कार: पद्मश्री (भारत सरकार का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) – 2026 क्षेत्र: पारंपरिक मार्शल आर्ट (Silambam) समारोह: 77वाँ गणतंत्र दिवस सम्मान सूची में शामिल  📌 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि जन्म: 30 जनवरी 1973, Pooranankuppam, पांडिचेरी, भारत में।  पजानिवेल ने Silambam नामक पारंपरिक तमिल मार्शल आर्ट को शुरू से ही प्रशिक्षण लिया।  Silambam एक प्राचीन भारतीय लड़ाई-कला है जिसमें लंबे लकड़ी के डंडे (staff) का उपयोग करके मुकाबला, संतुलन और गति विकसित की जाती है।  🥋 Silambam में करियर और योगदान अनुभव: लगभग 40 वर्षों से अधिक का अभ्यास और प्रशिक्षण उन्होंने Silambam को संरक्षित, प्रचारित और सिखाने में अपनी ज़िंदगी समर्पित की।  कई छात्रों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया ताकि यह कला अगली पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से पहुंचे।  राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन किया और Silambam की पहचान stärker की।  🏆 अन्य प्रमुख सम्मान पद्मश्री से पहले पजा...

VATTAKANAL, TAMILNADU

वट्टाकनाल तमिलनाडु राज्य के डिंडीगुल जिले में स्थित एक छोटा और शांत पहाड़ी पर्यटन स्थल है। यह प्रसिद्ध हिल स्टेशन कोडाइकनाल से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समुद्र तल से लगभग 2,000 मीटर की ऊँचाई पर बसा वट्टाकनाल प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए जाना जाता है। वट्टाकनाल को “लिटिल इज़राइल” भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक, विशेषकर इज़राइल से, घूमने आते हैं। यह स्थान घने जंगलों, ऊँचे पहाड़ों और मनमोहक घाटियों से घिरा हुआ है। यहाँ की ठंडी और स्वच्छ हवा मन को ताजगी से भर देती है। वट्टाकनाल का मुख्य आकर्षण डॉल्फिन्स नोज़ नामक व्यू प्वाइंट है। यह एक चट्टान है जो डॉल्फिन की नाक के आकार की दिखाई देती है। यहाँ से नीचे की गहरी घाटी और चारों ओर फैले हरे-भरे दृश्य अत्यंत सुंदर लगते हैं। इसके अलावा, यहाँ कई छोटे-छोटे झरने और ट्रेकिंग मार्ग भी हैं, जो साहसिक गतिविधियों के शौकीनों को आकर्षित करते हैं। यह स्थान भीड़-भाड़ से दूर होने के कारण शांति और सुकून प्रदान करता है। यहाँ के छोटे कैफे और गेस्ट हाउस पर्यटकों को आरामदायक ठहरने की सुविधा देते हैं। प्रकृति प्रेमियों और ...

PADMSRI GOPAL JI TRIVEDI

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  डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी (Dr. Gopal Ji Trivedi) 🏅 पद्मश्री 2026 — राष्ट्रीय सम्मान 🇮🇳 डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को पद्मश्री (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें विज्ञान और अभियंत्रण (Science & Engineering/Agriculture) के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।  📌 प्रारंभिक जीवन और संघर्ष जन्म: मुज़फ्फ़रपुर जिले के मतलूपुर गाँव, बिहार में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में।  प्रारंभिक पढ़ाई गाँव के स्कूल से शुरू हुई।  पिता के निधन के कारण पढ़ाई बीच में रोकनी पड़ी और खेतों में काम करना पड़ा।  माँ के प्रोत्साहन से उन्होंने पढ़ाई फिर जारी रखी।  🎓 शिक्षा और अनुसंधान मैट्रिक पूसा हाई स्कूल से, फिर विज्ञान विषय में इंटरमीडिएट।  Live Hindustan बी.एससी. (Agriculture) और एम.एससी./M.Sc. कृषि विज्ञान में।  Ph.D. कृषि विज्ञान में प्राप्त की — अध्ययन के बाद वैज्ञानिक अनुसंधान एवं कृषि विकास में सक्रिय भूमिका ली। 👨‍🔬 पेशेवर जीवन और योगदान 📍 कृषि विज्ञान में नवाचार डॉ. त्रिवेदी की विशेषज्ञता खासकर खेती ...

PADMSRI ANKE GOWDA

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  Padma Shri से सम्मानित Anke Gowda  📜 Anke Gowda — जीवन परिचय और उपलब्धियाँ 👤 कौन हैं Anke Gowda? पूरा नाम: M. Anke Gowda उम्र: लगभग 75 साल (2026 में) जन्मस्थान: हरलाहल्ली गाँव, मंड्या ज़िला, कर्नाटक, भारत। पद: सामाजिक कार्यकर्ता, लाइब्रेरियन, समाजसेवी। सम्मान: Padma Shri 2026 (Unsung Heroes श्रेणी) से सम्मानित।  📖 उनकी प्रेरणादायक यात्रा 🔹 साधारण शुरुआत: Anke Gowda का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन में उनके पास किताबें कम थीं, पर उनका ज्ञान और पढ़ने का उत्साह लगातार बढ़ता गया। 🔹 शुरुआत एक बस कंडक्टर के रूप में: 20 वर्ष की उम्र में, जब वे बस में कंडक्टर के रूप में काम कर रहे थे, तब ही उन्होंने किताबें इकट्ठा करना शुरू किया।  🔹 शिक्षा और नौकरी: बाद में उन्होंने कन्नड़ साहित्य में मास्टर डिग्री हासिल की और लगभग 30 वर्षों तक एक शुगर फैक्ट्री में काम किया। 🔹 अपने घर को लाइब्रेरी में बदल दिया: अपनी पढ़ाई और कमाई का लगभग 80% हिस्सा किताबों पर खर्च किया और बाद में उन्होंने मायसूरु में अपना घर भी बेच दिया ताकि और भी अधिक किताबें खरीदी जा सकें।  📚 Pustaka...

DHOLERA

धोलेरा : भारत का पहला स्मार्ट औद्योगिक शहर धोलेरा (Dholera) गुजरात राज्य के अहमदाबाद ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक और आधुनिक महत्व वाला क्षेत्र है। यह स्थान आज धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (DSIR) के रूप में जाना जाता है, जिसे भारत का पहला नियोजित स्मार्ट औद्योगिक शहर माना जाता है। धोलेरा को दिल्ली–मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) की एक प्रमुख परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से धोलेरा का उल्लेख प्राचीन काल में भी मिलता है। यह क्षेत्र कभी व्यापार और समुद्री गतिविधियों के लिए जाना जाता था। आधुनिक भारत में धोलेरा को एक नए औद्योगिक और शहरी मॉडल के रूप में विकसित करने का उद्देश्य देश के औद्योगिक विकास को गति देना है। धोलेरा की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्मार्ट सिटी कॉन्सेप्ट है। यहाँ आधुनिक सड़कें, भूमिगत बिजली और गैस लाइनें, स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली, सीवरेज नेटवर्क, डिजिटल निगरानी और हरित ऊर्जा के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। शहर को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ विकास का उदाहरण बने। उद्योगों के लिए धोलेरा में विशेष आर्थिक सुविधाएँ उपल...

PADMSRI JOGESH DEURI

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  जोगेश देउरी (Jogesh Deuri) 🏅 पद्मश्री 2026 सम्मान (भारत सरकार) श्री जोगेश देउरी को पद्मश्री 2026 के लिए चुना गया है, कृषि (Agriculture) क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए। यह सम्मान उन्हें असम से मिला है।  👤 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि नाम: जोगेश देउरी (Jogesh Deuri) वे असम के प्रसिद्ध सेरिकल्चर विशेषज्ञ (Sericulturist) हैं — यानी रेशम उत्पादन, रेशम उद्योग और खासकर पारंपरिक रेशम प्रकारों से जुड़े कृषि-व्यवसाय में विशेषज्ञ।  देउरी असम सरकार की सेरिकल्चर विभाग में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं और उन्होंने बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) में भी डायरेक्टर ऑफ़ सेरिकल्चर (Director of Sericulture) के रूप में काम किया है।  🧵 प्रमुख योगदान और कार्य ✔️ रेशम (Silk) क्षेत्र में अग्रणी कार्य जोगेश देउरी भारतीय रेशम उद्योग, विशेषकर ERI सिल्क और पारंपरिक असम-रेशम के विकास में अग्रणी रहे हैं: उन्होंने बोडोलैंड सिल्क पार्क (Bodoland Silk Park) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें • कूकून बैंक (Cocoon Bank) • स्पिनिंग मिल • प्रिंटिंग यूनिट • पॉपी प्रोसेसिंग यूनिट शामिल हैं...

PADMSRI KABINDRA PURKAYASTHA

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   कबिंद्र पुरकायस्थ (Kabindra Purkayastha)  📌 पद्मश्री 2026 सम्मान (पोस्टह्युमस) केंद्रीय सरकार ने पद्मश्री 2026 सम्मान में असम के वरिष्ठ भाजपा नेता कबिंद्र पुरकायस्थ को मरणोपरांत शामिल किया है। यह सम्मान उन्हें सार्वजनिक सेवा और देशहित में उनके योगदान के लिए दिया गया है।  🧑‍💼 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि नाम: कबिंद्र पुरकायस्थ जन्म: 15 दिसंबर 1931, कमरखल (अब बांग्लादेश के सुलेिट ज़िले में)  शिक्षा: उन्होंने एम.ए. किया और शिक्षण कार्य (प्रिंसिपल) से राजनीति की ओर कदम बढ़ाया।  🏛️ राजनीतिक करियर राजनीतिक आरंभ: आरएसएस के साथ 1950 के दशक में जुड़कर उन्होंने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत की और बाद में 1980 में भाजपा में शामिल हुए।  भाजपा के संस्थापक सदस्य: वे पूर्वोत्तर भारत में भाजपा को स्थापित करने और संगठन को मजबूत बनाने वाले नेताओं में गिने जाते थे।  लोकसभा सांसद: पहली बार 1991 में सिलचर (असम) से सांसद चुने गए, फिर 1998 और 2009 में भी यही सीट जीती।  केंद्रीय मंत्री: वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1998-99) में राज्य मंत्री (संचार) रहे।  ?...