BANARSI PAAN
बनारसी पान: एक अनूठी पहचान
भारत की सांस्कृतिक राजधानी बनारस अपनी परंपराओं, घाटों और खानपान के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक है बनारसी पान, जो न केवल स्वाद बल्कि अपनी खासियत के कारण देश-विदेश में मशहूर है। कहा जाता है, "काशी का असली स्वाद बनारसी पान में बसता है।"
बनारसी पान की विशेषता
बनारसी पान साधारण पान से अलग और खास होता है। इसे बनाने में कलकत्ता या मगही पान के पत्ते इस्तेमाल किए जाते हैं, जो बेहद मुलायम और सुगंधित होते हैं। इसमें कत्था, चूना, सुपारी, गुलकंद, सौंफ, इलायची, और कई तरह की मीठी व खुशबूदार चीज़ें डाली जाती हैं।
बनारसी पान की सबसे अनोखी बात उसकी पेशकश और बनाने का अंदाज है। बनारसी पान बेचने वाले "पनवाड़ी" खास अंदाज में इसे बनाते हैं और खिलाते हैं, जिससे यह खाने वाले के लिए एक अलग ही अनुभव बन जाता है।
बनारसी पान के प्रकार
- मीठा पान – इसे गुलकंद, सुपारी, सौंफ और चेरी से सजाया जाता है।
- सादा पान – इसमें कत्था, चूना और सुपारी डाली जाती है।
- जर्दा पान – इसमें तंबाकू और जर्दा मिलाया जाता है, जो खासतौर पर तंबाकू पसंद करने वालों के लिए होता है।
- सुपारी वाला पान – यह सुपारी प्रेमियों के लिए एक खास पान होता है।
बनारसी पान का महत्व
बनारसी पान सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा भी है। भारतीय शादियों में पान का विशेष महत्व होता है, और यह मेहमानों को भोजन के बाद परोसा जाता है।
निष्कर्ष
बनारसी पान सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि एक परंपरा, एक शौक और बनारस की अनूठी पहचान है। जो भी बनारस आता है, वह बिना बनारसी पान खाए वापस नहीं जाता!
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