ARTICLE 112 OF INDIAN CONSTITUTION
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 112
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 112 केंद्र सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) से संबंधित है, जिसे सामान्य रूप से केंद्रीय बजट कहा जाता है। यह अनुच्छेद सरकार को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अपनी अनुमानित आय और व्यय का विवरण संसद के समक्ष प्रस्तुत करने का संवैधानिक आधार प्रदान करता है।
अनुच्छेद 112 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से पहले संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के समक्ष भारत सरकार की आय और व्यय का विवरण प्रस्तुत कराएंगे। इस विवरण में केंद्र सरकार द्वारा किए जाने वाले सभी प्रस्तावित खर्च और प्राप्त होने वाली आय को शामिल करना अनिवार्य है।
इस अनुच्छेद के अंतर्गत व्यय को दो भागों में विभाजित किया गया है—
भारत की संचित निधि पर भारित व्यय (Charged Expenditure)
मत योग्य व्यय (Votable Expenditure)
भारित व्यय वह होता है जिस पर संसद का मतदान नहीं होता, बल्कि केवल चर्चा की जाती है। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते, ऋण पर ब्याज और संवैधानिक संस्थाओं के खर्च शामिल होते हैं।
मत योग्य व्यय वह होता है जिस पर लोकसभा मतदान करती है और जिसकी स्वीकृति आवश्यक होती है।
अनुच्छेद 112 यह भी स्पष्ट करता है कि वार्षिक वित्तीय विवरण में राजस्व लेखा और पूंजी लेखा से संबंधित व्यय को अलग-अलग दर्शाया जाएगा। इससे सरकारी वित्त में पारदर्शिता और स्पष्टता बनी रहती है।
इस अनुच्छेद का मुख्य उद्देश्य संसदीय नियंत्रण सुनिश्चित करना है, ताकि सरकार बिना संसद की जानकारी और स्वीकृति के सार्वजनिक धन का उपयोग न कर सके। बजट पर बहस और मतदान लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्षतः, अनुच्छेद 112 भारतीय लोकतंत्र की वित्तीय नींव को मजबूत करता है। यह सरकार की आय-व्यय प्रक्रिया को संवैधानिक दायरे में रखता है और वित्तीय जवाबदेही तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
Comments
Post a Comment