PUBLIC ACCOUNT OF INDIA
भारत का सार्वजनिक लेखा (Public Account of India)
भारत का सार्वजनिक लेखा (Public Account of India) भारत सरकार की तीन प्रमुख निधियों में से एक है। इसका प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266(2) में किया गया है। यह खाता उन राशियों से संबंधित होता है जो सरकार के पास अस्थायी रूप से जमा होती हैं, परंतु वास्तव में वे सरकार की स्वयं की आय नहीं होतीं। इस कारण सार्वजनिक लेखा को संचित निधि से अलग रखा गया है।
सार्वजनिक लेखा में जमा धन सरकार का स्वामित्व नहीं होता, बल्कि सरकार केवल न्यासधारी (Trustee) के रूप में उस धन का प्रबंधन करती है। इसमें वे सभी रकमें शामिल होती हैं जिन्हें बाद में संबंधित व्यक्ति, संस्था या खाते को वापस करना होता है। उदाहरण के लिए, भविष्य निधि (Provident Fund), छोटी बचत योजनाएँ, डाकघर बचत, सरकारी जमा, न्यायालयों में जमा धन, तथा अन्य ट्रस्ट फंड इसी खाते में रखे जाते हैं।
भारत के सार्वजनिक लेखा की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इससे धन निकालने के लिए संसद की पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं होती। चूँकि यह धन सरकार की आय नहीं है, इसलिए इसे खर्च मानकर संसद की मंज़ूरी लेने की आवश्यकता नहीं होती। हालाँकि, इन खातों का संचालन निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है तथा इन पर लेखापरीक्षा (Audit) भी होती है।
सार्वजनिक लेखा को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है—
स्मॉल सेविंग्स और प्रोविडेंट फंड
रिज़र्व और ट्रस्ट फंड
जमा और अग्रिम (Deposits and Advances)
इन खातों के माध्यम से सरकार जनता की बचत, कर्मचारियों की निधि और विभिन्न संस्थानों की जमा राशियों का सुरक्षित प्रबंधन करती है।
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) और आकस्मिक निधि (Contingency Fund of India) से सार्वजनिक लेखा पूरी तरह भिन्न है। संचित निधि से सरकारी खर्च होता है, जबकि सार्वजनिक लेखा में रखी राशि को सरकार खर्च नहीं कर सकती।
निष्कर्षतः, भारत का सार्वजनिक लेखा सरकारी वित्तीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह जनता और संस्थानों के धन के सुरक्षित प्रबंधन को सुनिश्चित करता है तथा सरकार की वित्तीय पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को मजबूत बनाता है।
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