BUDGET IN INDIA
भारत में बजट (Budget in India)
भारत में बजट सरकार की वार्षिक वित्तीय योजना होती है, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष के लिए आय और व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाता है। भारत का केंद्रीय बजट हर वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च की अवधि के लिए बनाया जाता है। इसे भारत के वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है। बजट सरकार की आर्थिक नीतियों, विकास प्राथमिकताओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को दर्शाता है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार बजट को “वार्षिक वित्तीय विवरण” कहा जाता है। इसमें सरकार की सभी संभावित आय—जैसे कर राजस्व (आयकर, कॉरपोरेट टैक्स, जीएसटी आदि), गैर-कर राजस्व (शुल्क, लाभांश, ब्याज आय) और उधारी—का अनुमान शामिल होता है। साथ ही, प्रशासन, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढाँचे, कृषि और सामाजिक योजनाओं पर होने वाले व्यय का विवरण भी दिया जाता है।
भारत का बजट मुख्यतः राजस्व बजट और पूंजी बजट में विभाजित होता है।
राजस्व बजट में राजस्व प्राप्तियाँ और राजस्व व्यय शामिल होते हैं, जैसे वेतन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान।
पूंजी बजट में पूंजी प्राप्तियाँ (ऋण, विनिवेश) और पूंजी व्यय (सड़क, रेल, बिजली, सिंचाई जैसी दीर्घकालिक परिसंपत्तियों पर खर्च) शामिल होते हैं।
बजट प्रक्रिया में संसद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बजट प्रस्तुत होने के बाद इस पर चर्चा होती है और अनुदान मांगें पारित की जाती हैं। इसके पश्चात विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पारित किए जाते हैं, जिनसे सरकार को कर लगाने और व्यय करने की वैधानिक अनुमति मिलती है।
बजट का महत्व केवल वित्तीय विवरण तक सीमित नहीं है। यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का प्रमुख साधन है। सरकार बजट के माध्यम से कर नीतियों, सब्सिडी और निवेश प्राथमिकताओं के जरिए अर्थव्यवस्था की दिशा तय करती है।
निष्कर्षतः, भारत में बजट लोकतांत्रिक शासन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो सरकार की नीतियों और जनता की अपेक्षाओं के बीच सेतु का कार्य करता है।
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